भिवानी। ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बनी गंदे पानी की निकासी को अब प्रशासन मैजिक पिट यानी सोखता गड्ढा से दूर करेगी। प्रत्येक गांव की गलियों में सोखता गड्ढा बनाए जाएंगे। प्रत्येक गांव में 20 से 25 सोखता गड्ढा बनाने का लक्ष्य है। इसे आगामी तीन माह में पूरा करने की तैयारी है। सुखता गड्ढा बनने के बाद गांवों के घरों के गंदे पानी को जोहड़ या तालाबों में डालने की जरूरत नहीं रहेगी। अधिकतर गांवों में घरों से निकलने वाला गंदा पानी लोगों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। दरअसल गलियों में नालियां तो बना दी जाती है मगर आग चलकर पानी निकासी की कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण बंद कर दी जाती है। ऐसे में गंदा पानी गलियों या आसपास के क्षेत्र में ही जमा रहता है। कुछ गलिवासियों ने जोहड़ की ओर गलियों को बनवाया है। जिस कारण गंदा पानी जोहड़ों और तालाबों में जा रहा है। जिस कारण जोहड़ों और तालाबों का पानी भी गंदा हो रहा है। इस समस्या के समाधान के लिए ग्रामीण भी अनेक दफा जिला प्रशासन से गुहार लगा चुके है।
अब इस समाधान के लिए प्लान बनाया गया है। इसके लिए मैजिक पिट यानी सोखता गड्ढा तैयार किए जाएंगे। इसकी बीडीपीओ कार्यालय में ट्रायल की गई। जिसके परिणाम बेहतर रहे। अब सभी गांवों में सोखते गड्ढे तैयार किए जाएंगे। प्रत्येक गांव में 20 से 25 सोखते गड्ढे तैयार किए जाएंगे। हर ब्लॉक में प्रति माह कम से 30 सोखते गड्ढे तैयार किए जाएंगे। इन पर आने वाला खर्च पंचायत वहन करेगी। यह खर्च पंचायतों को मिलने वाली पुरस्कार राशि व अन्य मदों से प्राप्त होने वाली राशि से खर्च होगी। एक मैजिक पिट के निर्माण पर करीब छह हजार रुपये का खर्च आता है।
हर रोज एक हजार लीटर पानी सोखेगा सोखता गड्ढा
सोखता गड्ढा यानी मैजिक पिट हर रोज एक हजार लीटर पानी सोखेगा। इसके लिए तीन से पांच फुट का गड्ढा खोदकर प्लास्टिक ड्रम या टब के सहारे इसे बनाया जाएगा। जिसमें छेद किए जाएंगे। जिनसे पानी निकलकर जमीन में जाता रहेगा। बाल्टी में गाद या मिट्टी जमा होती रहेगी। जिसे कभी भी निकालकर ग्रामीण खाली कर सकते है। ऊपर से इसे पक्का किया जाएगा ताकि वाहन गुजरने से भी इसे नुकसान ना हो।
गांवों में गंदे पानी की निकासी की समस्या के समाधान के लिए मैजिक पिट यानी सोखते गड्ढे बनाने का प्रोजेक्ट है। सभी गांवों में 20 से 25 सोखते गड्ढे बनाए जाएंगे। इससे गंदगी भी नहीं फैलेेगी और गंदे पानी की समस्या का भी समाधान होगा। साथ ही हैजा, मलेरिया जैसी बीमारियों से भी बचाव होगा।
सतीश कुमार, जिला कार्यक्रम प्रबंधक