आरटीए दफ्तर की बदइंतजामी बनी आफत
भिवानी। भ्रष्टाचार और बदइंतजामी की शिकायतों के चलते सरकार के निशाने पर आए आरटीए दफ्तर की व्यवस्था में अब भी कोई सुधार नहीं हुआ। बदइंतजामी का आलम यह है कि लोग सुबह नौ बजे पहुंच गए, जबकि स्टाफ ने 11 बजे के बाद सीट संभाली। फीस को लेकर भी लोगों में भ्रम की स्थिति है। किस काम की कितनी फीस लगेगी, विभाग की ओर से ऐसी कोई लिस्ट नहीं चस्पाई गई।
गत 11 अगस्त को प्रदेश सरकार ने आरटीए सचिव से कार्यभार लेकर एडीसी को सौंपने का निर्णय लिया, ताकि दफ्तरों में सुधार हो, लेकिन फिलहाल ऐसा कुछ दिखा नहीं। अमर उजाला ने आरटीए दफ्तर के इंतजाम और काम के लिए आए लोगों से बात की तो व्यवस्था पुराने ढर्रे पर दिखाई दी। पहले भी लोगों की शिकायत रही है कि स्टाफ टाइम पर नहीं आता। सोमवार को भी ऐसा ही हुआ। लोगों ने बताया कि वे सुबह नौ बजे के दफ्तर आए हुए हैं, लेकिन स्टाफ के ज्यादातर लोग 11 बजे के बाद पहुंचे। अपने काम के लिए लोगों दो से लेकर तीन घंटे तक इंतजार करना पड़ा।
विभिन्न कार्यों की फीस को लेकर भी लोग भ्रम में नजर आए। लोगों को यह नहीं पता कि सरकार की ओर से सही-सही फीस क्या निर्धारित की गई है। लोगों ने यहां तक आरोप लगाए कि पैसे ज्यादा लिये जा रहे हैं और रसीद कम की दी जा रही है।
तिगड़ाना गांव के युवा प्रवीण शर्मा अपने वाहन का परमिट रिन्यू कराने के लिए सुबह नौ बजे आरटीए दफ्तर आ गए थे, लेकिन खिड़की 11 बजे के बाद खुली। दो ढाई घंटे से वह लाइन में खड़ा है, न जाने कब नंबर आएगा। प्रवीण ने बताया कि अपने काम के लिए दस दिन के भीतर दूसरा चक्कर है।
आजाद नगर से आए मांगेराम का कहना है कि डेढ़ घंटे से लाइन में हूं। स्टाफ समय से नहीं आया, इसलिए परेशानी उठानी पड़ी। पूरे ऑफिस में कहीं पीने का पानी नहीं है। लोगों से विभाग इतनी मोटी फीस ले रहा है तो पानी का इंतजाम तो करना ही चाहिए।
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आरोप : तीन
खेड़ा सिवानी से आए संजय का कहना है कि वह लर्निंग हैवी ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने आया है। उससे साढ़े चार सौ रुपये लिये, लेकिन रसीद दी गई तीन सौ रुपये की। उसे नहीं पता कि फीस कितनी है। ऑफिस में फीस की लिस्ट लगानी चाहिए। कुड़ल गांव के प्रदीप ने भी रसीद कम रुपये की देने की बात कही। वहीं मौजूद एक अन्य युवा सतपाल सिंह ने बताया कि लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस के लिए एक महीने पहले उसने 250 रुपये फीस जमा कराई थी।
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आरोप : चार
कायला गांव के नरेंद्र कुमार ने स्टाफ की लेटलतीफी पर नाराजगी जाहिर की। नरेंद्र ने बताया कि उसे दो घंटे हो गए लाइन में लगे। पहले तो स्टाफ लेट आया और अब काम नहीं हो रहा। लोगों को इसलिए परेशान किया जा रहा है कि लोग दलाल के माध्यम से काम कराएं। विभाग में दलाल सक्रिय हैं। कर्मचारी काम के लिए आनाकारी करते हैं और दलालों के माध्यम से तुरंत काम हो जाते हैं।
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सचिवालय में शिफ्ट होगा आरटीए दफ्तर
चौधरी सुरेंद्र सिंह पार्क के समीप बिल्डिंग में चल रहा आरटीए दफ्तर लघु सचिवालय में शिफ्ट होगा। ताकि, बेहतर तरीके से मॉनिटरिंग हो सके। एडीसी संगीता तेतरवाल ने बताया कि आरटीए दफ्तर एडीसी कार्यालय परिसर में शिफ्ट किए जाने का निर्णय लिया जा चुका है। अगले हफ्ते-दस दिन में शिफ्ट हो जाएगा। इसके बाद सभी चीजों पर नजर रखी जाएगी और पूरी व्यवस्था को सुधारा जाएगा। लोगों को परेशान नहीं होने दिया जाएगा।