जिला नागरिक अस्पताल की ओपीडी के समीप धूम्रपान रहित क्षेत्र में कतार में बैठकर बीड़ी के कश लगाते
भिवानी। पुरुषों के साथ करीब 20 फीसदी महिलाएं भी बीड़ी के कश लगा रही हैं, इसमें सबसे अधिक तादाद तो ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं की है। हालांकि सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान करने वालों पर शिकंजा कसने के लिए जिलास्तर पर धूम्रपान निषेध कमेटी भी कठिन की हुई है। इसके बावजूद लोग वहां बैठकर धुएं के कश लगाते हैं, जहां नियम स्पष्ट लगे दिखाई दे रहे हैं।
सार्वजनिक स्थलों पर नियमों को धुएं में उड़ाने वालों के दो सौ से लेकर दो हजार रुपये तक के चालान भी धूम्रपान निषेध कमेटी काट रही है। लेकिन बीड़ी और सिगरेट का नशा छोड़ने के भी स्वास्थ्य विभाग के समक्ष करीब 250 मामले अब तक सामने आ चुके हैं, मगर इन्हें बीड़ी की लत छोड़ने और परिजनों को इसे छुड़वाने में भी काफी मेहनत करनी पड़ रही है।
बीड़ी सिगरेट का लंबे अर्से से सेवन करने वाले लोग इसे अचानक नहीं छोड़ पा रहे हैं, क्योंकि उनके दिमाग पर इसका काफी गहरा असर है और शरीर भी उसका आदी हो चुका है। हालांंकि धूम्रपान निषेध कमेटी के नोडल आफिसर डॉ. आशीष कुमार का कहना है कि सार्वजनिक स्थल धूम्रपान करने वालों पर जुर्माने और सजा दोनों का प्रावधान है। लेकिन फिर भी लोग नियम तोड़ते हैं।
नागरिक अस्पताल में नशा मुक्ति केंद्र बना है इसके अलावा सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान करने वालों के धूम्रपान निषेध कमेटी का भी स्वास्थ्य विभाग ने गठन किया है। इसमें एक नोडल अधिकारी भी नियुक्त है। ये कमेटी सार्वजनिक स्थलों पर बीड़ी-सिगरेट पीने और इनकी बिक्री करने वालों के चालान करती है। वहीं लोगों को इस तरह के नशे से दूर रहने के लिए भी जागरूक किया जाता है।
-डॉ. रघुवीर शांडिल्य सिविल सर्जन भिवानी।