अब मुस्लिम महिलाओं को मिलेगा समानता का हक
भिवानी।
तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से सब खुश हैं। मुस्लिम समाज के लोगों ने इस फैसले को बड़े सामाजिक बदलाव की शुरुआत बताया है। अधिवक्ताओं का कहना है कि समानता के हक के लिए मुस्लिम महिलाएं वंचित थीं, अब उन्हें यह हक मिलने का रास्ता साफ हो गया है। यह ऐतिहासिक फैसला है।
सुप्रीम कोर्ट का मंगलवार सुबह 11 बजे तीन तलाक को असंवैधानिक करार देने के फैसले के बाद यहां तारीफों के पुल बंध गए। हर कोई इस फैसले की प्रशंसा कर रहा है। अमर उजाला ने लोहारू नवाब के पोते रियाजुद्दीन अहमद खान से बात की। उन्होंने कहा कि इससे महिलाओं का शोषण रुकेगा। अधिवक्ताओं ने कोर्ट के फैसले को सराहा है।
महिलाओं के लिए एक बड़ा दिन है। महिलाओं के लिए मुक्ति का दिन है। दशकों पुरानी तीन तलाक की परंपरा खत्म करके सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा और ऐतिहासिक काम किया है। कोर्ट, सरकार और महिलाओं को बधाई।
सुमित कुमार, एडवोकेट
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यह उन बहादुर महिलाओं की जीत है जो तीन तलाक के खिलाफ लड़ रही थीं। महिलाओं की अधिकारों की जीत हुई है। बरसों पुरानी कुप्रथा का खात्मा हुआ और प्रोग्रेसिव इंडिया की ओर यह बड़ा कदम है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला स्वागत योग्य और सराहनीय है।
मुकेश चौहान, एडवोकेट
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ट्रिपल तलाक से जुड़ा आज जो फैसला आय है, वह मुस्लिम समाज के लिए ऐतिहासिक फैसला है। यह बहुत पहले आ जाना चाहिए था। इस निर्णय के अभाव में समाज के कुछ अनपढ़ लोग तीन तलाक की आड़ में महिलाओं का शोषण करते थे जो कि अब पूरी तरह से रुक जाएगा। यह फैसला निश्चित रूप से मुस्लिम समाज के विकास का प्रतीक बनेगा।
रियाजुद्दीन अहमद खान
लोहारू नवाब के पोते
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तीन तलाक से मुस्लिम समाज में कुछ महिलाओं की स्थिति बेहद खराब थी। कुछ लोग इसका दुरूपयोग करते थे, ऐसी स्थिति में महिलाओं की जिंदगी नर्क से भी बदतर बन जाती थी। आज का दिन मुस्लिम महिलाओं के लिए बेहद खास दिन माना जाएगा। अब भविष्य में इस फैसले की आड़ में मुस्लिम महिला की जिंदगी कोई नर्क नही बना पाएगा।
शहीदा बानो, लोहारू
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