अमर उजाला ब्यूरो
भिवानी। आमजन का भले ही एक पंखा, कूलर सीएफएल होने के बावजूद बिजली बिल हजारों में आता हो मगर सिविल सर्जन के सरकारी आवास पर पांच एसी, 20 पंखे, चार कूलर, दो गीजर, 25 ट्यूब लाइट्स होने के बावजूद लोड महज ढाई किलोवाट दिखाया गया और बिजली मीटर नहीं होने पर 600 रुपये मासिक के हिसाब से भुगतान किया गया। यह भुगतान भी हुआ है या नहीं जांच का विषय है। यहां तक कि कुत्ते के कमरे में भी कूलर आदि सुविधाएं थी। ये आरोप चरखी दादरी वासी एक लैब संचालक जितेंद्र कुमार ने लगाए हैं। उन्होंने सीएम, स्वास्थ्य मंत्री, बिजली निगम के एमडी, डीसी और सीएमओ को शिकायत कर सरकार को हुए 50-60 लाख रुपये की रिकवरी करने की मांग की है। वहीं शिकायत के बाद विभाग ने भी वीडियोग्राफी करवाई है।
शिकायत में लैब संचालक जितेंद्र कुमार ने बताया कि 2014 से 2018 तक सिविल सर्जन रहे डॉ. रणदीप पूनिया ने सरकारी आवास में रहे थे, मगर उन्होंने बिजली का मीटर नहीं लगाया। सरकारी आवास में पांच एसी, 20 पंखे, चार कूलर, दो गीजर, 25 ट्यूब लाइट्स, के अलावा पानी गर्म करने का हीटर तक लगा है। इसके बावजूद बिजली निगम कर्मचारियों से साठ-गांठ कर ढाई किलोवाट का लोड दिखाया गया। इस तरह सरकार को करीब 50 से 60 लाख का चूना लगाया गया है। सरकार को इसकी रिकवरी सिविल सर्जन पूनिया से ही करनी चाहिए।
600 रुपये महीना के हिसाब से जमा कराया बिल
इतना लोड होने, बिजली मीटर नहीं होने के बाद सिविल सर्जन की ओर से 600 रुपये महीना के अनुसार बिल भरने की बात कही जा रही है। इस पर भी शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया और कहा कि किस कमेटी के कहने पर और किस आधार पर 600 रुपये के अनुसार बिल भरा गया।
चार सदस्यीय कमेटी गठित, करवाई गई वीडियोग्राफी
स्वास्थ्य विभाग ने मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय कमेटी का गठन किया है जिसमें डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. कृष्ण कुमार और डॉ. सुनील कुमार, कार्यकारी प्रधान चिकित्सा अधिकारी डॉ. कृष्ण कुमार, सुपरिंटेंडेंट मूलचंद शामिल है। टीम ने यहां की वीडियोग्राफी करवाई है। इस केस की विजिलेंस जांच भी चल रही है जिसे यह वीडियो दी जाएगी।
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सिविज सर्जन डॉ. रणदीप पूनिया के खिलाफ शिकायत आई है जिसके आधार पर जांच की जा रही है। यह लॉजीस्टिक सेंटर था, जिसे सरकारी आवास बनाया गया। मामले की जांच के लिए एक कमेटी बनाई गई है। वीडियोग्राफी करवाई गई है। इसकी विजिलेंस जांच भी चल रही है।
-डॉ. आदित्य स्वरूप गुप्ता सिविल सर्जन
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2003 से ये लॉजिस्टिक सेंटर सीएमओ आवास के रूप में प्रयोग हो रहा है। 2003 से जो निर्धारित शुल्क था, वहीं मैने जमा करवाया है।
-डॉ. रणदीप पूनिया, सिविल सर्जन झज्जर