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अब पशु अस्पतालों में बिकेगी दहीं, आइसक्रीम और पनीर

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भिवानी। अब पशु अस्पतालों में दही, आइसक्रीम और पनीर की बिक्री की जाएगी। इसके लिए जल्द ही ग्राम पंचायतों को सब्सिडी पर मशीनें दी जाएगी। इस मशीन के माध्यम सेे दही, पनीर और आइसक्रीम बनाई जाएगी। इसके लिए ग्राम पंचायत और पशु चिकित्सकों की कमेटी बनाई जाएगी। यह निर्णय चंडीगढ़ मुख्यालय में हुई बैठक में लिया गया है। इस बारे में स्थानीय उप निदेशक पशु पालन विभाग ने स्थानीय चिकित्सकों की बैठक ली।
पशुपालन विभाग ने दुधारू पशु पालन को बढ़ावा देने के लिए दुग्ध प्रतियोगिताओं के बाद अब सरकारी अस्पतालों में ही दुध उत्पादक बेचने की योजना बनाई है। योजना के तहत सभी पशु अस्पतालों में करीब 10 लाख रुपये लागत की एक मशीन दी जाएगी। जिसके माध्यम से दूध से दही, आइसक्रीम और पनीर तैयार होगी। खास बात यह है कि इन सब की बिक्री के लिए पशुपालन विभाग अपने अस्पताल में ही जगह मुहैया करवाएगा। इसके लिए एक समिति बनाई जाएगी। जिसमें सरपंच, पंच, नंबरदार, वेटरनरी सर्जन शामिल होंगे। इस समिति को यह मशीन सब्सिडी पर दी जाएगी। सब्सिडी कितनी होगी यह अभी तय नहीं की गई है।
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अब 10 रुपये में मिलेगी भैंस के लिए ट्रीटमेंट स्लिप
सभी पशु अस्पतालों में अब तक सभी पशुओं का नि:शुल्क इलाज होता था। ट्रीटमेंट स्लिप नि:शुल्क थी। लेकिन दवाइयों की कमी के कारण पशुपालकों को दवाइयां बाहर से खरीदकर लानी पड़ती थी। अब पशुपालन विभाग ने एक और बदलाव किया है। अब ट्रीटमेंट स्लिप नि:शुल्क नहीं बनेगी बल्कि चार्ज लगेगा। भैंस के लिए 10 रुपये की ट्रीटमेंट स्लिप लगेगी तो कट्ड़ा, कट्ड़ी आदि छोटे जानवरों के लिए पांच रुपये शुल्क लगेगा। इसके अलावा कुत्ता, बिल्ली आदि जानवरों का इलाज कराने के लिए 25 रुपये में ट्रीटमेंट स्लिप मिलेगी। योजना बनाई गई है कि इससे एकत्र होने वाली राशि को अस्पताल के ही जीर्णोद्धार, विकास पर खर्च किया जाएगा।
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सरकार ने योजना बनाई है कि पशु अस्पताल में ही मशीन देकर दही, आइसक्रीम, पनीर आदि दूध के उत्पादों की बिक्री करवाई जाए। यह पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए है। मशीन की कीमत करीब 10 लाख रुपये है जो कि सब्सिडी पर दी जाएगी। समिति बनाई जाएगी जिसमें सरपंच, पंच, नंबरदार, वेटरनरी सर्जन शामिल होंगे। अब पशुओं की ट्रीटमेंट स्लिप के लिए शुल्क लिया जाएगा और शुल्क से एकत्रित होने वाली राशि को संबंधित में डेवलेपमेंट पर खर्च किया जाएगा।
जय सिंह, उप निदेशक
पशु पालन विभाग
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