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शिक्षण कार्य व्यवसाय नहीं, तपस्या है: शिक्षा मंत्री

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शिक्षण कार्य व्यवसाय नहीं, तपस्या है: शिक्षा मंत्री
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अमर उजाला ब्यूरो
भिवानी।
प्रदेश के शिक्षा मंत्री प्रोफेसर रामबिलास शर्मा ने कहा कि शिक्षा, संस्कार और संस्कृति भारत देश की विशेष पहचान है। शिक्षण कार्य व्यवसाय नहीं बल्कि तपस्या है, शिक्षक को बच्चे व समाज के प्रति समर्पित होना चाहिए। एक अच्छा अध्यापक वही होता है, जो पहली कक्षा से ही बच्चे की प्रतिभा को पहचान लेता है।
शिक्षा मंत्री शुक्रवार को शहर के सिटी सीनियर सेकेंडरी स्कूल के शुभारंभ के अवसर पर बया पर्यटन केंद्र में आयोजित स्कूल के समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वर्तमान में भी बहुत से अभिभावकों के मन में यह भ्रम की स्थिति रहती है कि केवल बड़े और महंगे स्कूलों में ही अच्छी शिक्षा मिलती है, लेकिन प्रतिभावान बच्चे हर जगह होते हैं।
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विधायक बिशंभर वाल्मीकि ने कहा कि इस स्कूल में बिना दाखिला फीस के बच्चों का एडमिशन होगा, जिससे अभिभावक आसानी से अपने बच्चों को शिक्षा ग्रहण करवा सकेंगे। कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री व विधायक वाल्मीकि ने स्कूल के लिए एक-एक लाख रुपये देने की घोषण की। स्कूल की तरफ से अजीत कुमार ने स्कूल की गतिविधियों पर प्रकाश डाला। इस दौरान स्कूली बच्चों ने विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। इस मौके पर मंहत अशोक गिरी, संगम गिरी, साध्वी माया मंजू, जिला परिषद के चेयरमैन रणसिंह यादव, प्राचार्य पंकज, शीलू बलियाली, सुंदर अत्री, भाजपा जिला अध्यक्ष नंदराम धानिया, बबीता तंवर, सुषमा शर्मा, आजाद वाल्मीकि, दीपा तंवर, यशपाल कटारिया, सुनील सरदाना आदि मौजूद रहे।
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