डीजी रोडवेज दफ्तर का घेराव करेंगे रोडवेज कर्मचारी
भिवानी। रोडवेज कर्मचारियों ने बैठक कर सरकार को एक बार फिर मांगें पूरी न होने पर निर्णायक आंदोलन करने व हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी है। रोडवेज कर्मचारियों ने घोषणा की कि मांगों को लेकर 22 दिसंबर को डीजी रोडवेज कार्यालय का घेराव करेंगे। इसके बाद भी मांग पूरी नहीं हुई तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
मंगलवार को यहां हरियाणा रोडवेज कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति संबंधित सर्व कर्मचारी संघ एवं कर्मचारी महासंघ द्वारा डिपो में कर्मचारियों की बैठक की अध्यक्षता डिपो प्रधान राजकुमार दलाल व हरज्ञान घणघस ने संयुक्त रूप से की।
संयुक्त संघर्ष समिति के वरिष्ठ नेता विरेंद्र सिंह धनखड़, सरबत सिंह पूनिया, नरेंद्र दिनोद, ओमप्रकाश ग्रेवाल, ईश्वर तालू व जयबीर घणघस ने कहा कि रोडवेज कर्मचारियों की कई मांगें लंबे समय से लंबित हैं। परिवहन विभाग के महानिदेशक व सरकार कर्मचारियों की मांगों के प्रति गंभीर नहीं है। उलटे आए दिन कर्मचारी विरोधी नए-नए फरमान जारी कर रहे हैं। इसलिए रोडवेज कर्मचारियों में रोष है। संयुक्त संघर्ष समिति की ओर से कर्मचारियों की विभिन्न मांगों का 30 सूत्रीय मांग पत्र तैयार किया गया है।
कर्मचारी नेताओं ने ऐलान किया कि मांगों को लेकर रोडवेज कर्मचारी 22 दिसंबर को चंडीगढ़ में महानिदेशक के कार्यालय पर प्रदर्शन करेंगे। प्रदर्शन के लिए प्रदेश के सभी डिपो का दौरा करके तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। उन्होंने कहा कि सरकार व परिवहन महानिदेशक रोडवेज कर्मचारियों की मांगों का समाधान करने के लिए शीघ्र ही संयुक्त संघर्ष समिति के प्रतिनिधिमंडल को बुलाकर बातचीत के माध्यम से मांगों का समाधान करे। बैठक का संचालन राज्य प्रेस सचिव पवन शर्मा ने किया। बैठक में राजेश शर्मा, जगदीश सांगवान, जोगेंद्र शर्मा, सत्यवान, विक्रम, रणबीर गोरिया, प्रदीप, धर्मेंद्र, सोनू, राज बड़ेसरा, विकाश, राजकुमार शर्मा, रमेश मान व अन्य कर्मचारियों ने भाग लिया।
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ये हैं कर्मचारियों की मुख्य मांग
कर्मशाला सहित विभाग में सभी रिक्तपदों पर शीघ्र भर्ती करने, पिछले 2 वर्षों का बकाया बोनस शीघ्र देने व पुलिस विभाग की तरज पर एक माह का वेतन बोनस के रूप में देने की स्थायी नीति बनाने, तकनीकी वेतनमान से वंचित सभी पत्र कर्मचारियों को तकनीकी वेतनमान देने, एलटीसी, ओवर टाइम व रात्रि भत्ता आदि का भुगत शीघ्र करने, अन्य राज्यों में जाने वाली बसों को बंद करने की बजाय जनसंख्या के अनुसार विभाग में 14 हजार साधारण बसें शामिल करने आदि प्रमुख मांगें हैं।
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