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लावारिस हालत में मिली बच्ची को पुलिस ने परिजनों से मिलवाया

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लावारिस हालत में मिली बच्ची को पुलिस ने परिजनों से मिलवाया
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अमर उजाला ब्यूरो
बवानीखेड़ा।
कस्बा बवानीखेड़ा के रेलवे स्टेशन के नजदीक लावारिस हालात में दो वर्षीय बच्ची घूमती हुई मिली। लोगों ने पुलिस को सूूचना दी। पुलिस ने लड़की के परिजनों को खोज बच्ची को उसके परिजनों से मिलाया।
मंगलवार को सीनियर सिटीजन रामकिशन काजल ने बताया कि मंगलवार 11 बजे रेलवे स्टेशन के सामने स्थित ढ़ाणी में करीब 2 वर्षीय एक बच्ची लावारिस हालत में घूमती हुई पाई गई। बच्ची से पूछताछ करने पर न तो वह सही ढंग से अपना नाम बता पाई और न ही परिजनों का। उन्होंने बताया कि पहले लड़की के परिजनों की तलाश के लिए ढाणी व रेलवे स्टेशन पर पूछताछ की गई, लेकिन कही पर भी उसके परिजनों का पता नहीं लग पाया। बच्ची को बवानीखेड़ा पुलिस को सौंपा गया। पुलिस को दोपहर बाद बच्ची के परिजनों का सुराग हाथ लगा और उन्होंने लड़की के परिजनों को इस बारे में सूचित कर थाने बुलाया। मौजिज व्यक्तियों के बीच एएसआई मदन कुमार ने कार्रवाई के बाद लड़की को परिजनों को सौंप दिया। बताया गया है कि यह लड़की कस्बा बवानीखेड़ा के बाईपास रोड के नजदीक एक बस्ती निवासी बताई गई है। इसके माता-पिता घटना के वक्त मजदूरी पर गए हुए थे। लड़की के पिता का नाम करणू व मां का नाम गीता बताया गया है तथा लड़की की पूजा के नाम से पहचान हुई है। लड़की के माता-पिता मजदूरी के लिए बाहर गए हुए थे। इसके चलते लड़की के अन्य परिजनों को अन्य परिजनों को सौंप दिया।
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नंदीशाला निर्माण को लेकर दो गुटों में बंटे ग्रामीण
अमर उजाला ब्यूरो
बवानीखेड़ा
गांव बलियाली में नंदीशाला के निर्माण को लेकर मंगलवार को आयोजित पंचायत के दौरान ग्रामीणों में निर्माण स्थान को लेकर सहमति नहीं बन पाई और इसको लेकर दो गुटों में ग्रामीण बंट गए। एक गुट नंदीशाला को गोशाला की जमीन पर निर्माण करवाने की पक्ष में नहीं है, जबकि एक गुट यही पर नंदीशाला का निर्माण करवाना चाहता है। इसके चलते नंदीशाला के निर्माण को लेकर आयोजित पंचायत में कोई फैसला नहीं हो पाया और पंचायत बेनतीजा ही रही। नंदीशाला निर्माण को लेकर गांव में पिछले कुछ समय से सर्वसम्मति नहीं बन पा रही। एक गुट नंदीशाला का निर्माण गोशाला की जमीन पर चाहता है, परंतु गोशाला की कमेटी इसके खिलाफ है। हालांकि ग्राम पंचायत ने पशुओं के निर्माण के लिए लाखों रुपये के शैडों का निर्माण भी करवा दिया है, लेकिन नंदीशाला के निर्माण का सर्वसम्मति से फैसला न होने के कारण पंचायत बेनतीजा रही। गांव में नई पंचायत के गठन के बाद बेसहारा पशुओं को सहारा देने के लिए सरपंच सुरेश रंगा ने अपनी जमीन पर अस्थाई नंदीशाला का निर्माण करवाया, परंतु वहां पर शैड न होने के कारण बेसहारा पशुओं को फिर से छोड़ दिया गया। एक गुट लिलानी जोहड़ के साथ लगती जमीन पर तो दूसरा गुट गोशाला की जमीन पर ही नंदीशाला का निर्माण चाहता है। इसके चलते लाखों रुपये की लागत से बन शैड भी बेकार पड़े है।
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