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गुरुग्राम की घटना के बाद चिंता में डूबे अभिभावक

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भिवानी। गुरुग्राम के रेयान इंटरनेशनल स्कूल के वॉशरूम में सात वर्षीय बच्चे के हत्या के बाद अभिभावक अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। अभिभावकों की चिंता इसलिए और गहरी हो जाती है कि बड़ी संख्या में जिलेभर में ऐसे स्कूल हैं, जो बच्चों की सुरक्षा से बेपरवाह हैं या फिर अनजान हैं। सरकारी स्कूल तो इस मामले में बहुत पीछे हैं। कई सरकारी स्कूलों में दीवार तोड़कर आने-जाने के लिए रास्ता तक बना लिया गया है।
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गुरुग्राम में हत्या और दिल्ली में बच्ची से रेप की दो वारदात के बाद बड़ा प्रश्न यह है कि स्कूल स्टाफ में आखिर ऐसा शख्स कैसे कंडक्टर नियुक्त कर दिया गया, जो किसी मासूम की स्कूल परिसर में ही हत्या कर दे। स्कूल में ऐसा चौकीदार कैसे लगा दिया गया, जो बच्ची की आबरू लूटने जैसा घृणित कार्य कर सकता है।
अमर उजाला से बातचीत में अभिभावकों और मनो वैज्ञानिकों ने कहा कि स्कूलों में शिक्षकों के साथ नॉन टीचिंग स्टाफ की नियुक्ति से पहले साइकोलॉजिकल एनालॉसिस (मनो स्थिति विश्लेषण) होना अनिवार्य होना चाहिए। आज की परिस्थतियों में यह पता लगाना बेहद जरूरी हो गया है कि कर्मचारी की पारिवारिक स्थितियां क्या हैं।
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एक बड़ी चिंता स्कूल प्रबंधन की सुरक्षा के प्रति बेपरवाही को लेकर भी है। शायद ही कोई ऐसा निजी स्कूल होगा, जिसने अपने स्टाफ का वैरिफिकेशन कराया हो। सीसीटीवी कैमरे लगे हैं या नहीं, लगे हैं तो चल रहे हैं या नहीं, चहारदीवारी है या नहीं, स्कूल में आने वाले शख्स पड़ताल की व्यवस्था कितनी दुरुस्त है...आदि ऐसे बिंदु हैं, जिन पर न तो कभी पुलिस प्रशासन ध्यान देता है और न ही शिक्षा विभाग।
यहां दो सरकारी स्कूलों का जिक्र जरूरी है। शहर से सटे निनान गांव के सरकारी स्कूल की चहारदीवारी का बड़ा हिस्सा अरसे से टूटा है। लेकिन, मरम्मत की जरूरत नहीं समझी गई। शहर के सेठ किरोड़ीमल गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल ने अपनी बैक साइड (अशोका रोड की ओर) चहारदीवारी तोड़ कर गेट का रूप दे दिया है। कोई भी स्कूल में आ-जा सकता है। इस तरह की लापरवाही ज्यादातर सरकारी स्कूलों में है। इस मामले में सरकारी स्कूल से प्राइवेट स्कूलों की स्थिति कुछ ठीक है, लेकिन लापरवाही यहां भी कम नहीं हैं।
डीपीएस स्कूल की पूर्व स्कूल काउंसलर (साइकोलॉजिस्ट) डॉ. अनुपमा धमीजा का कहना है कि स्कूल में नौकरी से पहले, चाहे वह शिक्षक हो और या गैर शिक्षक, यह जानना बेहद जरूरी है कि उसकी मनोस्थिति कैसी है। जिस बंदे को नौकरी पर रखा जा रहा है, उसके पारिवारिक हालात क्या हैं। छोटे बच्चे और बच्चियों के स्कूल में हर कर्मचारी की साइकोलॉजी एनालॉसिस हो जाए तो इस तरह की घटनाओं को कुछ कम किया जा सकता है। स्कूलों में नियुक्ति प्रक्रिया में साइकोलॉजी एनालॉसिस शामिल किया जाना अब जरूरी हो गया है।

डीपीएस पेरेंट्स एसोसिएशन के पूर्व प्रेसिडेंट डॉ. देवेंद्र बोहरा का सुझाव है कि शिक्षा विभाग और प्रशासन को स्कूल सुरक्षा के सभी पहलुओं पर गौर करना होगा। स्कूल संचालकों से हर जरूरी उपायों पर अमल कराना होगा। प्रशासन की ओर से कभी यह जांच करने की जहमत नहीं उठाई गई कि स्कूलों में सीसीटीवी कैमरे हैं या नहीं। हैं तो चल रहे हैं या नहीं। लापरवाही बरतने वाले स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। स्कूलों की हर महीने जांच होनी जरूरी है।

अभिभावक पूजा देवी का कहना है कि गुरुग्राम की घटना ने हर अभिभावक को झकझोर कर रख दिया। आज हर अभिभावक चिंता में है। बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी पूरी तरह से स्कूल की है। सरकार को चाहिए कि स्कूलों में सुरक्षा के हर जरूरी इंतजाम उठाए। स्कूलों की भी जिम्मेदारी तय करे।
जल्द होगी मीटिंग, करेंगे समीक्षा: डीईओ
जिला शिक्षा अधिकारी सुरेश कुमार शर्मा ने बताया कि स्कूलों में सुरक्षा के इंतजामों पर जल्द समीक्षा की जाएगी। इस बात पर विचार किया जाएगा कि कैसे चीजें बेहतर हो सकती है। जल्द ही प्राइवेट स्कूल संचालकों के साथ विभाग बैठक करेगा और हर जरूरी कदम उठाए जाएंगे।

दो महीने पहले सुई गांव में हुआ था हादसा
लगभग दो महीने पहले स्कूल में लापरवाही का एक मामला सुई गांव में भी सामने आया था। स्कूल के बगल में जोहड़ में 5-6 साल के बच्चे की डूबने से मौत हो गई थी। परिजनों का आरोप था कि स्कूल प्रबंधन ने लापरवाही बरती, इसलिए बच्चे की मौत हुई। बाद में परिजनों ने एक अध्यापक के खिलाफ मामला दर्ज भी कराया था।
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