भिवानी। समय पर आरटीआई का जवाब नहीं देने के एक मामले में नगर परिषद के सचिव व तत्कालीन बिल्डिंग इंस्पेक्टर के खिलाफ शहरी निकाय विभाग पंचकूला को विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इसी के साथ राज्य सूचना आयोग ने आरटीआई कार्यकर्ता को चार हजार रुपये हर्जाना के तौर पर अधिकारियों द्वारा व्यक्तिगत तौर पर देने के आदेश जारी किए हैं।
आयोग ने शहरी निकाय विभाग द्वारा दोनों ही अधिकारियों के खिलाफ एक सप्ताह के अंदर कार्रवाई कर इसकी रिपोर्ट भी आयोग के समक्ष भेजे जाने के आदेश दिए हैं। स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बृजपाल परमार ने चार अक्टूबर 2017 को नगर परिषद कार्यालय से शहर में चल रहे निजी अस्पतालों के भवनों से जुड़ी जानकारी आरटीआई के माध्यम से मांगी थी। इस संबंध में नगर परिषद ने कोई जानकारी नहीं दी। नौ नवंबर को इस मामले की प्रथम अपील सीटीएम के समक्ष की गई। सीटीएम ने एक सप्ताह के अंदर मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराने के आदेश दिए। फिर भी जानकारी नहीं दी गई। इसके बाद नौ जनवरी 2018 को मामला राज्य सूचना आयोग के समक्ष रखा गया। इसी मामले में राज्य सूचना आयोग ने 20 अगस्त को नप सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए 20 नवंबर को व्यक्तिगत तौर पर सूचना आयोग के समक्ष पेश होने के आदेश दिए। आयोग के निर्देशों की पालना न करने पर नगर परिषद के सचिव व तत्कालीन बीआई के खिलाफ अनुशासनात्मक विभागीय कार्रवाई के शहरी निकाय विभाग को निर्देश दिए। इस मामले में बृजपाल परमार ने फिर 27 मई 2019 को राज्य सूचना आयोग के समक्ष दोबारा मामला रखा। जिस पर राज्य सूचना आयोग ने नगर परिषद के अधिकारियों के गैर जिम्मेदाराना रवैय से नाराजगी जताते हुए संज्ञान लिया। सूचना आयोग ने इस मामले में अब शहरी निकाय विभाग पंचकूला के मुख्य सचिव व निदेशक को निर्देश जारी करते हुए नप सचिव व तत्कालीन बीआई के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए। वहीं चार हजार रुपये हर्जाना आरटीआई कार्यकर्ता को देने की हिदायतें भी जारी कर दी। सूचना आयोग ने शहरी निकाय विभाग को एक सप्ताह के अंदर दोनों ही अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर सूचना आयोग को भी अवगत कराने के आदेश दिए हैं।