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पेंशन की टेंशन के बीच बुजुर्गों में दुविधा: अविवाहित बुजुर्गों से भी मांग रहे बेटा- बेटी के जन्म प्रमाण

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60 की उम्र कर चुके पूरी, फिर भी नहीं बन रही पेंशन, अविवाहित बुजुर्गों से भी मांग रहे बेटा-बेटी के जन्म प्रमाण
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अमर उजाला ब्यूरो
भिवानी। हाथ में जन्म प्रमाण पत्र, पहचान पत्र, आधार कार्ड के साथ-साथ स्कूल लिविंग सर्टिफिकेट लेकर बुजुर्ग बुढ़ापा पेंशन के लिए चक्कर काट रहे हैं। इन सबके बावजूद उनकी बुढ़ापा पेंशन नहीं लग पा रही है। सोमवार को सिविल सर्जन कार्यालय के सामने बने पार्क में करीब छह सौ बुजुर्ग पेंशन के लिए अपनी मेडिकल जांच कराने पहुंचे। सामान्य अस्पताल में पहुंचे बुजुर्गों ने आरोप लगाया कि 70 वर्ष की उम्र के बावजूद डाक्टर उन्हें मेडिकल जांच में बाहर कर रहे हैं। इतना ही नहीं अविवाहित बुजुर्गों से भी उनके बच्चों की उम्र के सर्टिफिकेट मांगे जा रहे हैं। उनका कहना था कि 15 से 20 फीसदी बुजुर्गों को ही बुढ़ापा पेंशन के लिए पास किया जा रहा है।
बुढ़ापा पेंशन बनवाने के लिए हर माह करीब पांच सौ आवेदन जिला समाज कल्याण विभाग के पास आ रहे हैं। इन आवेदनों की जांच के बाद जो आवेदन त्रुटिपूर्ण होते हैं या जिन आवेदनों में उम्र को लेकर कोई संदेह या विवाद होता हैं, उन मामलों की अलग से छंटनी कर दी जाती है। ऐसे मामलों को फिर मेडिकल रिपोर्ट पर ही आधारित रखा जाता है। इसी को लेकर हर सोमवार और शुक्रवार को सिविल अस्पताल में बुुजुर्गों की मेडिकल जांच के बाद विशेषज्ञ रिपोर्ट देते हैं। इसी रिपोर्ट के आधार पर बुढ़ापा पेंशन बनती है या रिजेक्ट होती है।
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दांत, हड्डियों की जांच से होती है उम्र की पहचान
चिकित्सकों की मेडिकल जांच में बुजुर्गों की हड्डियों और दांतों की जांच की जाती है। नियमानुसार तीन चिकित्सकों का पैनल, जिसमें एक हड्डी रोग विशेषज्ञ, एक दंत रोग विशेषज्ञ और एक रेडियोलॉजिस्ट होता है। बुजुर्गों के दांतों और हड्डियों की स्थिति से उनकी उम्र का अंदाजा लगाया जाता है।
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गलत तरीके से बुजुर्गों को किया जा रहा बाहर
बुजुर्गों की पेंशन बनवाने और मेडिकल जांच में सहयेाग कर रहे पार्षद ईश्वर मान और पार्षद सुभाष तंवर ने बताया कि महज 15 से 20 फीसदी बुजुर्गों को मेडिकल टेस्ट में पास किया जा रहा है। यहां आए पांच सौ बुजुर्गों के चेहरे देखकर कोई नहीं कह सकता कि इनकी उम्र 60 वर्ष से कम होगी। मगर इन्हें क्यों फेल किया जाता है, पता नहीं। अगर सहीं तरीके से जांच नहीं की तो वे बुजुर्गों को साथ लेकर आंदोलन करेंगे।
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प्रदेश सरकार के दिशा निर्देशों के अनुसार शिक्षा बोर्ड द्वारा जारी किए गए प्रमाण पत्र में ही उम्र को प्रमाणित माना गया है। इसके अलावा अन्य दस्तावेजों में दर्ज उम्र को प्रमाण के तौर पर नहीं माना जाता है। अगर ये दस्तावेज बुजुर्ग के पास नहीं है या फिर किसी अन्य कारण से उसकी उम्र का पता नहीं चल पा रहा है तो ऐसी स्थिति में बुजुर्ग का मेडिकल कराया जाता है। डॉक्टर उसकी उम्र प्रमाणित कर देता है तो फिर 60 साल के बाद उसकी पेंशन बना दी जाती है। पेंशन बनवाने के लिए बुजुर्ग की उम्र 60 साल निर्धारित है, जबकि बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र में उनकी उम्र 40 साल अनिवार्य की गई है।
- अमित शर्मा, जिला समाज कल्याण अधिकारी
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