जच्चा-बच्चा को घर पहुंचाने के लिए नहीं मिलीं एंबुलेंस
अमर उजाला ब्यूरो
भिवानी। एनएचएम कर्मचारियों ने नियमित करने और जॉब सिक्योरिटी की मांग को लेकर शुरू की दो दिन की हड़ताल मरीजों के लिए परेशानी बनी। ज्यादा परेशानी जच्चा-बच्चा को झेलनी पड़ी और उन्हें डिलिवरी के लिए लाने और घर वापस छोड़ने के लिए एंबुलेंस नहीं मिलीं। वहीं सीएचसी-पीएचसी पर कर्मचारियों की हड़ताल के कारण भी कर्मचारियों को परेशानी झेलनी पड़ी। हड़ताल कर कर्मचारियों ने सिविल सर्जन कार्यालय के बाहर पार्क में धरना दिया और नारेबाजी कर रोष जताया।
मांगों को लेकर बुधवार को लगातार दूसरे दिन करीब करीब 400 एनएचएम कर्मचारी हड़ताल पर रहे। जिस कारण स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित नजर आईं। एंबुलेंस चालकों ने सिर्फ सड़क हादसे में घायलों और इमरजेंसी केसों को ही लाने-ले जाने का निर्णय ले रखा था। वहीं सामान्य अस्पताल में औसतन 10-15 जच्चा-बच्चा को डिलिवरी के बाद घर पहुंचाया जाता है। ऐसे में उनके परिजन एंबुलेंस और निजी गाड़ियों को खोजते नजर आए। इस दौरान निजी एंबुलेंस के लिए लोगों को एक से दो हजार रुपये खर्चने पड़े। इसके अलावा
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नारेबाजी कर जताया रोष
एनएचएम कर्मचारियों ने सिविल सर्जन कार्यालय के बाहर पार्क में धरना दिया और नारेबाजी कर रोष जताया। हरियाणा एनएचएम कर्मचारी संघ के जिला प्रधान प्रदीप कुमार, उप प्रधान मंजू रानी, सुधीर भारद्वाज ने कहा कि करीब साढ़े 13 हजार कर्मचारी एनएचएम के तहत प्रदेशभर में लगे है। पिछले करीब 20 सालों से अपनी सेवाएं दे रहे है। बावजूद इसके ना तो उन्हें नियमित किया जा रहा और ना ही जॉब सिक्योरिटी। कर्मचारी नेताओं ने उन्हें नियमित करने की मांग की।