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गाद से लबालब वॉटर टैंक, घरों में पहुंच रहा दूषित पानी

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गाद से लबालब वॉटर टैंक, घरों में पहुंच रहा दूषित पानी
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भिवानी। शहर को पेयजल आपूर्ति करने के लिए बनाए गए वाटर टैंकों की सालों से सफाई नहीं होने से लोगों को घरों में दूषित पानी पहुंच रहा है। सफाई के नाम पर केवल जन स्वास्थ्य विभाग द्वारा खानापूर्ति किए जाने से वाटर टैंक में दो से तीन फुट तक गाद भरा हुआ है। वहीं, वाटर लाइन व सीवरेज लाइन लीक होने से एक महीन से शहर में दूषित पेयजल सप्लाई किया जा रहा है। अब यह दूषित पानी लोगों की सेहत के लिए खतरनाक हो गया है। दूषित पानी की वजह से शहर में पीलिया रोग के मरीज बढ़ गए हैं। सरकारी अस्पताल में रोजाना 20 से 30 मरीज पीलिया जैसी खतरनाक रोग से ग्रस्त पहुंच रहे हैं।
शहर में पेयजल आपूर्ति के लिए छह जलघर हैं। सबसे पुराने जलघर महम रोड स्थित टैंकों की हालत दयनीय बनी हुई है। 70 फीसदी शहर को इन वाटर टैंकों से पेयजल आपूर्ति की जाती है। महम रोड पर चार वाटर टैंक बनाए हुए है। इन टैंकों की सफाई कागजों में यूं तो हर साल हो रही है, लेकिन हकीकत यह है कि टैंकों में दो से तीन फुट तक गाद जमी हुई है। जिन टैंकों का पानी शहर में सप्लाई किया जा रहा है, वहां इतनी दुर्गंध फैलती है कि कोई व्यक्ति खड़ा नहीं हो सकता।
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पानी के सैंपल हो रहे फेल
स्वास्थ्य विभाग द्वारा शहर के अनेक क्षेत्रों से 50 से अधिक सैंपल लेकर जांच के लिए लैब भेजे गए। चौंकाने वाली बात यह है कि 90 फीसदी सैंपल फेल पाए गए, बावजूद जन स्वास्थ्य विभाग अधिकारियों की नींद नहीं टूट रही है।
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सरकारी अस्पताल में रोजाना 20 से 30 पीलिया व टाइफाइड ग्रस्त मरीज ओपीडी में पहुंच रहे हैं, तो निजी अस्पतालों मेें इनकी संख्या और भी ज्यादा है। डा. नितेश का कहना है कि ओपीडी में पीलिया व इस बीमारी जैसे लक्षण के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। हर रोज अनुमानित 30-40 मरीज पहुंच रहे हैं।
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सीवरेज लीकेज है बड़ी समस्या
शहर में दूषित पानी सप्लाई होने का मुख्य कारण वाटर लाइन व सीवरेज लाइन लीकेज भी है। दोनों लाइन टूटी होने से पानी मिक्स होकर घरों में पहुंचता है। अनेक बार तो लोगों के घरों में स्थिति ऐसी बनती है नल चलाने पर पूरे घर में दुर्गंध फैलने लगती है। इसके बावजूद विभाग की सुस्ती टूटने का नाम नहीं ले रही है।
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भंडारण क्षमता पर भी असर
शहर की आबादी करीब ढाई लाख है। इस आबादी के लिए रोजाना 50 लाख एमएलडी पेयजल की आवश्यकता होती है। जिसके लिए चार वाटर टैंक महम रोड, एक बड़ा टैंक तोशाम बाईपास व एक गांव निनान के पास बना हुआ है, लेकिन आज भी शहर की 70 फीसदी आबादी पुराने टैंकों की सप्लाई का ही पानी पी रहे है। ये टैंक गाद से भरे हुए हैं और जलस्तर कम होने पर सड़ांध मारता हुआ पानी पेयजल के लिए सप्लाई किया जाता है।
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वर्जन
पीलिया रोग मुख्य रूप से दूषित पेयजल के सेवन से ही होता है। इस रोग से बचने के लिए जरूरी सावधानी बरतें। पेयजल को पहले ठीक से उबालें और उसके बाद ठंडा कर सेवन करें।
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डॉ. नितेश गोयल, वरिष्ठ चिकित्सक सामान्य अस्पताल
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वाटर टैंकों की सफाई हर साल करवाई जा रही है। दूषित पेयजल की शिकायत जरूरी मिल रही है। इसका जल्द ही समाधान किया जाएगा। टैंकों की सफाई के साथ ही वाटर लाइन लीकेज को ठीक करने का काम जारी है। काफी जगह 30 से 40 साल पुरानी वाटर लाइन होने से कंडम हो चुकी है। इन्हें बदला जा रहा है।
-आरके मुंजाल, एसडीओ जन स्वास्थ्य विभाग
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