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स्मॉग का कहर : दृश्यता के दस साल पुराना रिकॉर्ड टूटा

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स्मॉग का कहर : दृश्यता के दस साल पुराना रिकॉर्ड टूटा
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भिवानी। स्मॉग का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। वायु प्रदूषण का स्तर पिछले 24 घंटे में और बढ़ गया है। रविवार शाम आठ बजे शुरू हुए स्मॉग ने जनजीवन को जकड़ लिया। रविवार रात रात दृश्यता 27 मीटर प्रति मील रही जो कि पिछले दस साल का सबसे निम्नतम स्तर आंका गया है। धुंध की वजह से लंबी दूरी की रोडवेज की बसों को बीच रास्ते से लौटना पड़ा। वहीं ट्रेनें भी देरी से पहुंचीं।
पिछले 24 घंटे में वायु प्रदूषण के स्तर और स्मॉग ने जनजीवन को अपने आगोश में जकड़ लिया। रविवार की रात नौ बजे हालत यह हो गई कि सड़क पर चलना दूभर हो गया। वाहन रेंग-रेंग कर चले और मिनटों का सफर घंटों में तय किया। मध्य रात्रि तक शहर के भीतर के मार्ग भी कोहरे की जद में आ गए। यह आलम सोमवार सुबह आठ बजे तक रहा।
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रविवार की रात और सोमवार तड़के दृश्यता पिछले दस साल के सबसेे न्यूनतम स्तर पर दर्ज की गई। 300 मीटर प्रति मील के सापेक्ष में दृश्यता 27 मीटर प्रति मील दर्ज की गई। राज्य प्रदूषण बोर्ड के एसडीओ विनय गिल ने बताया कि दृश्यता का इतना कम स्तर संभवतया 10 पहले भी न रहा हो। इधर, वायु प्रदूषण का स्तर और खराब हो गया। शहर की आबोहवा में 2.5 पार्टिकल मैटर की मात्रा 600 पार कर गई। जबकि, पीएम 10 की मात्रा लगभग स्थिर है।
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पानी का छिड़काव, सड़क पर उतारी वैक्यूम क्लीनर मशीन
बढ़ते प्रदूषण से लोगों को बचाने के लिए राज्य प्रदूषण बोर्ड ने एहतियाती इंतजाम किए हैं। सोमवार सुबह दमकल विभाग की गाड़ियां सड़क पर पानी का छिड़काव करती दिखीं। पानी का छिड़काव इसलिए किया जा रहा है, ताकि धूल-मिट्टी के कण हवा में शामिल न हों, जमीन पर रहें। प्रदूषण बोर्ड के एसडीओ ने बताया कि सोमवार को दमकल की पांच गाड़ियों ने पानी का छिड़काव किया। सड़क पर धूल-कचरे को उठाने के लिए आज दो वैक्यूम क्लीनर मशीनों का भी सहारा लिया गया है।
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बड़े-छोटे मिल हुए बंद
नेशनल ग्रीन ट्रियूब्लन की सख्ती के चलते शहर में चल रहे बड़े और छोटे लगभग सब उद्योग बंद रहे। प्रदूषण बोर्ड व प्रशासन की टीम ने शहर की कई फैक्ट्रियों का औचक निरीक्षण किया। बोर्ड के एसडीओ ने बताया कि शहर में 17 औद्योगिक इकाइयों का औचक निरीक्षण किया गया और सभी इकाइयां बंद पाई गईं।

रोडवेज बसों के पहिये थमे, ट्रेन हुईं लेट
घने कोहरे और दृश्यता की कमी का असर परिवहन सेवाओं पर देखने को मिला। चंडीगढ़ जाने वाली 2-3 बसों को घने कोहरे की वजह से बीच रास्ते से लौटना पड़ा। पानीपत रूट की ओर जाने वाली एक बस के साथ भी ऐसा ही हुआ।
उधर, रेल यातायात भी स्मॉग से अछूता नहीं रहा। गोरखधाम एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय सुबह 8:45 बजे से लगभग चार घंटे देरी से पहुंची। किसान एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय से लेट पहुंची, इसलिए करीब दो घंटे देरी से रवाना हो सकी।
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कैसे चलेंगे स्कूल वाहन, अभिभावक चिंतित
दिन-ब-दिन गंभीर होती स्मॉग की स्थिति को लेकर अभिभावक चिंतित हैं। यह चिंता उन अभिभावकों की ज्यादा है, जिनके बच्चे शहर से पांच से लेकर 20 किलोमीटर का सफर तय कर स्कूल पहुंचते हैं। जब दृश्यता इतनी खराब है तो जिला प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए। बच्चों की हिफाजत पहली चीज है।
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