फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

स्कूल के पास कचरे में मिला नवजात

विज्ञापन
विज्ञापन
भिवानी/बहल। बहल से करीब तीन किमी दूर ढाणी सहजमानपुर के प्राइमरी विद्यालय के पास कचरे के ढेर में नवजात (लड़का) मिलने से सनसनी फैल गई। मिट्टी से सने नवजात की हालत से अनुमान लगाया जा रहा था कि उसकी पैदाइश बीती रात की हो। नवजात को सबसे पहले खेतों में काम करने वाले मजदूरों ने देखा। इसकी बाद में पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस नवजात का लोहारू में प्राथमिक उपचार करवाने के बाद उसे भिवानी सिविल अस्पताल लेकर गई।
विज्ञापन

ढाणी सहजमानपुर के प्राइमरी विद्यालय के पास कचरे के ढेर लगे हैं। सोमवार सुबह जब खेतों में कपास की चुगाई के लिए जाने वाले मजदूर वहां से गुजरे तो उनको कचरे में नवजात दिखाई दिया। उन्होंने इसकी सूचना ग्रामीणों को दी तो काफी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे। जीवित अवस्था में पड़ा नवजात मिट्टी और खून से सना था। ग्रामीण महिलाओं ने उसकी साफ-सफाई की और उसे घूंटी पिलाई। वहीं, ग्रामीणों की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और लोहारू से एंबुलेंस बुलाकर नवजात को लोहारू लेकर गई। लोहारू में चिकित्सकों ने नवजात का प्राथमिक उपचार कर उसे भिवानी भेज दिया। जांच अधिकारी राजेंद्र सिंह ने बताया कि पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज किया है।
--
5 से 7 घंटे पहले का हो सकता है नवजात का जन्म
पुलिस ने नवजात को सूचना मिलने के कुछ देर बाद ही लोहारू सीएचसी में लेकर गई। सीएचसी के चिकित्सक डॉ. मनीष पुनिया ने बताया कि नवजात का वजन एक किलो 900 ग्राम था, जो औसत से कम है। इसलिए, अनुमान है कि बच्चा प्रीमेच्योर हो सकता है। इसके अलावा ठंड में रहने के कारण वह हाइपाथर्मिया (कम तापमान) की स्थिति में था। उसे प्राथमिक उपचार के बाद भिवानी नर्सरी के लिए भेज दिया गया। उन्होंने बताया कि बच्चे का प्लेसेंटा (ओलनाल) भी नहीं कटा हुआ था और अनुमान है कि बच्चे का जन्म उस समय से पांच, सात घंटे पहले हुआ हो।
विज्ञापन

फोटो : 13
--
मां ने ठुकराया तो दूसरी महिला ने दूध पिलाया
लोहारू। एक मां ने अपने कलेजे के टुकड़े को जन्म लेतेेे ही मरने के लिए लावारिस छोड़ दिया वहीं दूसरी मां’ ने उसे अपनी ममता के आंचल की छांव में रखने की इच्छा जताई तो स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्टाफ भावुक हो गया।
सोमवार अल सुबह लोहारू उपमंडल के गांव सहजमानपुर के राजकीय स्कूल के साथ लगे एक कचरे के ढेर पर गांव के कुछ लोगों ने एक नवजात को बिलखते हुए देखा। ग्रामीणों ने तुरंत ही गांव की महिलाओं को बुलाया और महिलाओं ने मौके की नजाकत की भंापते हुए नवजात को जन्म के समय दी जाने वाली विशेष प्रकार का पेय पदार्थ (घुट्टी) तैयार कर पिलाई और उसे लोहारू के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पहुंचाया। स्वास्थ्य केंद्र में भी उस नन्ही सी जान को जब एक मां की ममता की दरकार हुई तो सामने आई एक मां जिसने रविवार दोपहर को ही एक बच्ची को जन्म दिया था और यहां वार्ड में भर्ती थी। क्षेत्र के गांव ढ़ाणा जोगी निवासी मंजू पत्नी राजेश कुमार ने जब नवजात को रोते हुए देखा तो उसके अंदर की ममता जाग उठी और उसने नवजात को अपना दूध पिलाने की इच्छा जताईं। अस्पताल के कर्मचारियों ने भी बिना कोई क्षण गवाए रोते बिलखते नवजात को मंजू की गोद में डाल दिया। मंजू ने नवजात को अपना दूध पिलाकर तथा एक मां का दुलार देते हुए चुप करा कर वापस चिकित्सा कर्मियों को सौंप दिया। परंतु मां की ममता मंजू के मन में उफान मार रही थी। उसने अपने पति राजेश के समक्ष लावारिस नवजात को गोद लेने की इच्छा जताई। इसे अस्पताल कर्मियों ने यह कह कर ठुकरा दिया कि इसके लिए निर्धारित एक प्रक्रिया है जिसे पूर्ण कर वो इसको गोद ले सकते हैं। परंतु अभी नवजात बच्चे को भिवानी अस्पताल में चाइल्ड नर्सरी में भेजना पड़ेगा ताकि इसका जीवन बचाया जा सके।
मंजू के पति राजेश ने अमर उजाला को बताया कि प्रशासन इस बच्चे को उसे गोद दे दे तो वह इसकी परवरिश अपनी बच्चे के समान ही करेगा। इसके जीवन में मां-बाप की कमी नहीं रहने देगा। राजेश ने यह भी कहा कि वह बच्चों को गोद लेने की सभी प्रकार की कानूनी प्रक्रिया पूर्ण करने को तैयार है। लोहारू के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. मनीष पूनिया और डा. गौरव चतुर्वेदी ने बताया कि बच्चा अभी स्वस्थ है परंतु इसे चिकित्सा व्यवस्था में रखना जरूरी है इसलिए इसे भिवानी चाइल्ड नर्सरी के लिए रेफर किया जा रहा है।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें