- गबन मामले में दोषियों के खिलाफ एफआईआर की सिफारिश
- बिना रजिस्ट्रार की अनुमति के गठित की थी स्कूल प्रबंध समिति
- बोर्ड सचिव की जांच रिपोर्ट के आधार पर जिला रजिस्ट्रार ने भेजी स्टेट रजिस्ट्रार को प्रशासक नियुक्त किए जाने और एफआईआर के लिए सिफारिश
अमर उजाला ब्यूरो
भिवानी। वैश्य मॉडल स्कूल में लाखों के गबन मामले की शिक्षा बोर्ड सचिव ने जांच की तो नया खुलासा हुआ कि स्कूल प्रबंधकारिणी समिति ही अवैध है। तत्कालीन बोर्ड सचिव ने अपनी जांच के बाद वर्तमान प्रबंध समिति को पूरी तरह से अवैध करार देते हुए गबन मामले में सभी दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने तक की सिफारिश की है। वहीं सोसायटी पदाधिकारियों का कहना है कि हमारा चुनाव वैश्य ट्रस्ट के माध्यम से होता है।
मामला वर्ष 2014 का है, जब वैश्य मॉडल स्कूल की प्रबंध समिति के महासचिव द्वारा 30 लाख रुपये का गबन कर अपने निजी हितों के लिए इस्तेमाल कर लिया था। इसी मामले को लेकर 26 मार्च 2018 को स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बृजपाल परमार ने उपायुक्त को शिकायत देकर मामले की जांच की मांग की। उपायुक्त ने छह अप्रैल को जांच के लिए बोर्ड सचिव को जांच अधिकारी नियुक्त किया। तत्कालीन बोर्ड सचिव धीरेंद्र खडग़टा ने जांच की। उन्होंने मामले की जांच के बाद तीन अगस्त 2018 को रिपोर्ट उपायुक्त को सौंपी। जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि वैश्य मॉडल स्कूल की वर्तमान गवर्निंग बॉडी सोसायटी एक्ट 2012 के अंडर सेक्शन 33 के अनुसार अवैध है। इतना ही नहीं स्कूल में बच्चों की फीस की 30 लाख की राशि का भी गबन किया गया। यह राशि स्कूल प्रबंध समिति के महासचिव ने नियमों को ताक पर रखते हुए निजी हित साधने में प्रयोग की। हालांकि बाद में विवाद बढ़ा तो यह राशि जमा करवा दी गई।
दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग
बोर्ड सचिव ने वर्तमान स्कूल प्रबंधु कारिणी समिति को अवैध करार देने के साथ-साथ इसे भंग कर स्कूल में प्रशासक नियुक्त करने की सिफारिश भी की जबकि गबन मामले में अकाउंटेंट, कैशियर सहित प्रबंध समिति के दोषी पदाधिकारियों व अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश भी की। जांच रिपोर्ट के बाद उपायुक्त ने 12 सितंबर को जिला रजिस्ट्रार भिवानी को पत्र जारी कर रिपोर्ट के आधार पर गैर कानूनी तरीके से हुए चुनाव को रद्द करते हुए प्रशासक नियुक्त करा आगामी कार्रवाई के निर्देश दिए जाए। जिला रजिस्ट्रार ने उपायुक्त के आदेशों पर बोर्ड सचिव की जांच रिपोर्ट 18 सितंबर 2018 को राज्य रजिस्ट्रार को अपनी सिफारिश भेजी।
अपने स्तर पर बना ली कमेटी
स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बृजपाल परमार ने बताया कि 19 दिसंबर 2017 को वैश्य महाविद्यालय ट्रस्ट की तथाकथित प्रबंध कमेटी की बैठक नई दिल्ली में हुई जिसके अनुसार शिवरत्न गुप्ता को प्रधान, विधायक घनश्यामदास सर्राफ को उप प्रधान, पवन कुमार बुवानीवाला को सचिव, बृजलाल सर्राफ को खजांची चुना गया था। लेकिन इस कमेटी के गठन संबंधी कोई भी सूचना या अनुमति जिला रजिस्ट्रार से नहीं ली गई थी। 2 जनवरी 2018 को प्रबंध समिति चुनाव की रिपोर्ट रजिस्ट्रार कार्यालय में जमा कराई गई। मगर रजिस्ट्रार कार्यालय ने इस चुनाव को पूरी तरह से अवैध घोषित कर दिया। किसी भी सोसायटी या प्रबंध समिति के चुनाव से पहले रजिस्ट्रार से लिखित में अनुमति लेनी होती है। इसके बाद ही नोटिस, चुनाव की प्रक्रिया होती है। मगर वैश्य मॉडल स्कूल की प्रबंध समिति चुनाव में रजिस्ट्रार ने हरियाणा सोसायटी एक्ट 2012 के सेक्शन 33 के तहत पूरी तरह से अवैध मानते हुए कार्रवाई की सिफारिश की है। परमार ने कहा कि अगर जल्द ही स्टेट रजिस्ट्रार से प्रबंध कमेटी को भंग कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो इस मामले को उच्च न्यायालय में चुनौती देते हुए उन अधिकारियों पर भी विभागीय कार्रवाई की मांग करेंगे।
यूं हुआ स्कूल में लाखों का गबन
वैश्य मॉडल स्कूल में करीब 30 लाख रुपये की राशि स्कूल प्रबंध समिति के महासचिव ने निजी लाभ के लिए घर मंगवा ली थी। जब 2014 में गबन का मामला उजागर हुआ तो इस राशि में से 18 लाख रुपये की राशि 29 जनवरी 2014 को स्कूल में जमा करा दिए गए थे। उसके बाद भी स्कूल के पास 18 लाख कैश इन हैंड होने के बावजूद बैंक से एक लाख 42 हजार 199 रुपये की राशि 30 अगस्त 2013 व 11 जनवरी 2014 को नकद निकासी की गई।
वर्जन:::
हमारे पास उपायुक्त कार्यालय से मामले की जांच रिपोर्ट आई थी जिसे स्टेट रजिस्ट्रार कार्यालय में कार्रवाई के लिए भेज दिया है।
-राजेश कुमार, जिला रजिस्ट्रार सोसायटी
नियमानुसार हुआ चुनाव
वैश्य महाविद्यालय ट्रस्ट की ओर से सभी वैश्य संस्थाओं के चुनाव सर्वसम्मति से करवाए जाते हैं। वैश्य मॉडल स्कूल चुनाव भी नियमानुसार हुआ है।
-पवन बुवानीवाला, महासचिव वैश्य मॉडल स्कूल
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