तहसीलदार के अलावा जिला राजस्व अधिकारी और एसडीएम की लाॅगइन आईडी से भूमि की रजिस्ट्री मामले में शुक्रवार को जिला प्रशासन ने कड़ा संज्ञान लिया। शुक्रवार को भिवानी तहसील कार्यालय में 139 टोकन काटे गए। इसमें 63 भूमि की रजिस्ट्री तहसीलदार ने की। जबकि पहली बार डीआरओ के लाॅगइन से आठ भूमि की रजिस्ट्री हुई।
इसके लिए जिला राजस्व अधिकारी कार्यालय में ही रजिस्ट्री क्लर्क की व्यवस्था भी शुक्रवार को करा दी गई। अमर उजाला ने शुक्रवार के अंक में एसडीएम व डीआरओ के नाम काटे भिवानी तहसील में टोकन, नहीं हुई एक भी रजिस्ट्री शीर्षक के साथ प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया था। इसके बाद जिला प्रशासन ने तुरंत प्रभाव से जिला राजस्व अधिकारी कार्यालय में अलग से रजिस्ट्री क्लर्क की ड्यूटी लगाई और वहां पर रजिस्ट्री कराने का भी इंतजाम करा दिया। जबकि एसडीएम की अभी तक लाॅगइन आईडी नहीं बनी और न ही रजिस्ट्री की कोई वहां पर व्यवस्था हो पाई है।
भिवानी तहसील कार्यालय में भूमि की रजिस्ट्री के लिए 139 लोगों ने टोकन कटवाए। इन टोकनों में 63 टोकनों पर तहसीलदार ने रजिस्ट्री कर दी जबकि आठ टोकन जिला राजस्व अधिकारी के नाम काटे गए। इन सभी टोकनों की जिला राजस्व अधिकारी कार्यालय में रजिस्ट्री कराई गई। 68 भूमि की रजिस्ट्री नहीं हो पाई। इनके टोकन कट जाने के बाद या तो रजिस्ट्री कराने कोई नहीं पहुंचा या फिर इनके टोकन एसडीएम के नाम काटे गए।
करीब एक पखवाड़े से भिवानी तहसील कार्यालय में रजिस्ट्री के 200 टोकन रोजाना काटे जा रहे हैं, जबकि पहले रोजाना सौ टोकन ही कटते थे। टोकन की संख्या दोगुनी किए जाने के साथ एसडीएम और डीआरओ को भी भूमि की रजिस्ट्री के आदेश हैं। मगर पिछले काफी दिनों से इनके कार्यालय में रजिस्ट्री की कोई व्यवस्था तक नहीं थी। क्योंकि दोनों ही अधिकारियों को भूमि रजिस्ट्री के लिए अलग से कोई लाॅगइन नहीं दिया गया था और न ही उनके कार्यालय में रजिस्ट्री के लिए रजिस्ट्री क्लर्क मिला था। अमर उजाला ने भिवानी तहसील कार्यालय में टोकन कटने के बाद भी रजिस्ट्री के लिए भटक रहे लोगों की व्यथा को उजागर किया। दसके बाद प्रशासन ने डीआरओ कार्यालय में अलग से रजिस्ट्री क्लर्क और एक सिस्टम की व्यवस्था कराई। जिसके बाद जिला राजस्व अधिकारी कार्यालय में भी शुक्रवार को पहली बार ऑनलाइन सिस्टम से आठ भूमि की रजिस्ट्रियां कराई गई।
यह है रजिस्ट्री की व्यवस्था
भिवानी तहसील कार्यालय में किसी भी प्लाट या फिर अधिकृत दायरे के मकान या फिर प्रतिष्ठान की रजिस्ट्री कराने के लिए लेखाकार से पहले क्रेता और विक्रेता के साथ हुआ अनुबंध तैयार कराना पड़ता है। इस अनुबंध में भूमि के सभी वाजिब दस्तावेजों का हवाला दर्ज होता है। ये दस्तावेज पूरे होने के बाद इनकी तहसील कार्यालय में बैठे कर्मचारी से जांच कराई जाती है। अगर सभी दस्तावेज पूरे हैं तो इसके बाद ऑनलाइन टोकन के लिए अप्लाई एक दिन पहले ही किया जाता है। इसके बाद अगले दिन उसकी रजिस्ट्री का टोकन जारी कर दिया जाता है। टोकन में कौन अधिकारी रजिस्ट्री करेगा और रजिस्ट्री कराने का समय भी दर्ज होता है। टोकन में जिस अधिकारी का नाम दर्ज है वहीं अधिकारी उस भूमि की रजिस्ट्री करेगा। कोई दूसरा अधिकारी उस रजिस्ट्री को नहीं कर सकता है। क्योंकि रजिस्ट्री के लिए अधिकारी को लाॅगइन अलॉट किया जाता है। एक बार पोर्टल पर रजिस्ट्री दर्ज हो जाती है तो फिर 15 दिन के अंदर रजिस्ट्री की कॉपी भी क्रेता को तहसील कार्यालय से मिल जाती है।
मेरे कार्यालय में एक रजिस्ट्री क्लर्क की व्यवस्था हो गई है। मेरा लाॅगइन आईडी भी बन चुका है। मैंने शुक्रवार को आठ भूमि की रजिस्ट्रियां दर्ज कराई हैं। इसी तरह अब नियमित रूप से टोकन के हिसाब से रजिस्ट्री की जाएगी। रजिस्ट्री के लिए किसी तरह की लोगों को कोई परेशानी नहीं होने देंगे।
- राजकुमार, जिला राजस्व अधिकारी, भिवानी।