अमर उजाला ब्यूरो
भिवानी। सामान्य अस्पताल में मोतियाबिंद के ऑपरेशन कराने आने वाले मरीजों को इंजेक्शन का दर्द, चीरा या टांकों की परेशानी से नहीं जूझना पड़ेगा। अस्पताल में फेको मशीन आई है। चिकित्सकों ने इसका उपयोग भी शुरू कर दिया है।
अस्पताल में मंगलवार, वीरवार और शनिवार को मोतियाबिंद के ऑपरेशन किए जाते हैं। औसतन 80 से 100 ऑपरेशन हर महीने किए जाते हैं। अब तक जो ऑपरेशन किए जाते हैं। उसमें सबसे पहले आंख में दो इंजेक्शन लगाए जाते हैं। आंख के अंदर ऊपर और नीचे ये इंजेक्शन लगाए जाते थे। इंजेक्शन आंख का हिस्सा सुन करने के लिए लगाए जाते थे। इंजेक्शन के 15 से 20 मिनट बाद ही ऑपरेशन किए जाने की प्रक्रिया शुरू होती है। ऑपरेशन के दौरान चीरे के लिए ब्लेड का भी प्रयोग किया जाता और ऑपरेशन प्रक्रिया हाथ से होती थी।
मरीज को पैराकेन आई ड्रोप डालकर सुन किया जाएगा और तुरंत ही फेको मशीन से ऑपरेशन किया जा सकेगा। बाजार में मशीन से यह ऑपरेशन कराने पर 25 से 30 हजार रुपये का खर्च आता है जबकि सामान्य अस्पताल में ये ऑपरेशन नि:शुल्क किए जा रहे हैं। डॉ. मोनिका मित्तल, नेत्र सहायक सुभाष चोपड़ा, स्टाफ नर्स अमदा, सहायक अरुण की टीम ने मशीन से पहला ऑपरेशन किया।
कुछ समय बाद ही मिलेगी छुट्टी
पहले जो ऑपरेशन किया जाता था, उसे ब्लॉक लगाकर हाथ से किया जाने वाला ऑपरेशन बोला जाता था। इसमें ऑपरेशन के बाद मरीज को अस्पताल में भर्ती रखा जाता था। कम से कम दो दिन मरीज को अस्पताल में ही रहना पड़ता था। मशीन से होने वाले ऑपरेशन के तुरंत बाद ही मरीज को छुट्टी मिल जाएगी।
नहाने का नहीं रहेगा परहेज
पहले ऑपरेशन के बाद चिकित्सक मरीज को एक सप्ताह तक नहाने से परहेज की सलाह देते थे। साथ ही डेढ़ माह तक आंख को पानी से बचाने की सलाह दी जाती थी। फेको मशीन से ऑपरेशन के बाद नहाने की कोई बंदिश नहीं है। एक सप्ताह तक आंख में सीधे पानी से धोने की ही मनाही है।
काला चश्मा से भी मिलेगा छुटकारा
पहले की ऑपरेशन प्रक्रिया के बाद मरीज को डेढ़ से दो महीने तक काला चश्मा दिन-रात लगाना अनिवार्य था ताकि मरीज अपनी आंखों को मसले नहीं और तेज रोशनी से बचाव हो सके। नई पद्धति में चश्मा लगाने की आवश्यकता नहीं होगी।
सामान्य अस्पताल में अब अति आधुनिक फेको मशीन से मोतियाबिंद के ऑपरेशन शुरू किए गए हैं। इसमें सुन करने के लिए न तो इंजेक्शन लगाने की जरूरत है और न ही चीरा या टांकों की जरूरत पड़ती है। मरीज को तुरंत छुट्टी दे दी जाती है। फेको मशीन मरीजों के लिए लाभदायक साबित होगी।
डॉ. वेदपाल, इंचार्ज
ऑपरेशन थियेटर, सामान्य अस्पताल