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शहीद हुए जवान की शहादत में बहल के बाजार बंद

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अमर उजाला ब्यूरो
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बहल। कश्मीर के कुलगाम जिले के तुरीगाम इलाके में रविवार को सुरक्षा बलों एवं आतंकियों के बीच हुई मुठभेड़ में शहीद हुए मिट्ठी गांव के हवलदार सोमबीर काद्यान की शहादत पर कस्बे में लोग गमगीन रहे। शोक में कस्बे के बाजार दिनभर बंद रहे और लोग उसकी बहादुरी के गुणगान करते रहे। वहीं, युवाओं ने बाजारों में हाथ में तिरंगा लेकर अमर शहीद की शहादत का समान किया।
सोमवार को सुबह जैसे ही बाजार खुले तो लोगों को मिट्ठी गांव के सोमबीर की शहादत का समाचार मिला। जैसे-जैसे सूचना मिलती गई वैसे-वैसे दुकानों के शटर डाऊन होते गए। लोगों की जुबान पर जहां सोमबीर की बहादुरी के चर्चे थें वहीं दुश्मन की नापाक हरकतों के लिए उसे सबक सिखाने का गुस्सा था। क्षेत्र के युवाओं ने हाथ में तिरंगा लेकर अमर शहीद सोमबीर, भारत माता के नारे लगाकर शहीद की शहादत को नमन किया। युवाओं ने पाक, आतंक के विरोध में नारेबाजी की। युवाओं ने कहा कि शहीद सोमबीर अपना, परिवार तथा क्षेत्र का नाम अमर कर गया है। उसने तीन आतंकियों को ढेर करने के बाद शहादत पाई है जो कि गर्व की बात है। लोग शहीद के घर उसके परिवारजनों के साथ बैठे रहे तथा शहीद के पार्थिव शरीर के आने की सूचना का इंतजार करते रहे।
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31 जनवरी को छुट्टी पूरी होने पर गए थे
शहीद सोमबीर काद्यान गांव में हंसमुख स्वभाव के लिए जाना जाता था। 4 फरवरी 1982 को शेर सिंह काद्यान व राजेन्द्री देवी के घर दूसरे बेटे के रूप में जन्म लेने वाले सोमबीर ने दसवीं तक की शिक्षा गांव के राजकीय विद्यालय से ली थी। महज 18 साल की उम्र में 20 जनवरी 2000 को सोमबीर ने 8 जाट 34 आरआर यूनिट में सिपाही के पद पर सेना ज्वाइन की थी। सोमबीर के बड़े भाई संजीव ने बताया कि सोमबीर 20 दिन की छुट्टी पूरी करने के बाद 31 जनवरी को वापस ड्यूटी पर गए थे। जाते समय सोमबीर ने बताया था कि वह अपनी जगह पर सही सलामत है तथा उसे किसी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं है।

रविवार को 11.30 बजे बात हुई, 9 बजे शहादत की सूचना
शहीद सोमबीर की पत्नी सुमन एमए तक शिक्षित हैं। सोमबीर की दो बेटी प्रिया (कक्षा आठवीं), स्नेहा (कक्षा सातवीं) और बेटा रोहित (कक्षा पांच) है। भाई संजीव ने बताया कि रविवार को उससे बात नहीं हो सकी। सोमबीर की घर पर अन्य सभी सदस्यों से बात हुई थी। उसने सभी से आमदिनों की तरह बात की थी तथा ऐसे किसी ऑपरेशन के बारे में नहीं बताया था। रात को करीब नौ बजे उनको जब सोमबीर की शहादत का समाचार मिला तो सहसा विश्वास भी नहीं हुआ।
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मंगलवार को होगा अंतिम संस्कार
शहीद सोमबीर के शव के लिए लोग दिनभर इंतजार में रहे। दोपहर बाद तक यह सूचना नहीं मिल सकी थी कि पार्थिव शरीर गांव में आज पहुंचेगा या कल। आखिरकार सूचना मिली की शहीद का पार्थिव शरीर मंगलवार सुबह गांव में पहुंचेगा। शहीद के परिजनों ने बताया कि उनके पास पार्थिव शरीर आने की अभी कोई अधिकारिक सूचना तो नहीं आई है लेकिन पता चला है कि अभी पार्थिव शरीर दिल्ली मुख्यालय में नहीं पहुंचा है। इसलिए, संभव है कि अंतिम संस्कार कल होगा।
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