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स्टांप तक नहीं लगाते हुए डाक कर्मी, दलील दी कि कर्मचारी नहीं है

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अमर उजाला ब्यूरो
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भिवानी। सड़क पर पड़ी मिली हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की मैट्रिक की मार्कशीट मामले की जांच शुरू हुई तो पता चला कि ना तो डाक विभाग के पास उनका कोई रिकॉर्ड है और ना ही बोर्ड के पास। बोर्ड चेयरमैन के पास दोनों ही विभागों के कर्मचारी अपनी-अपनी दलील देते नजर आए। हैरान करने वाली बात है कि मार्कशीट के किसी पैकेज पर डाक विभाग की ओर से कोई स्टांप नहीं लगाई जा रही। ऐसे में अगर रास्ते में कोई मार्कशीट का पैकेट गुम हो जाता है तो यह बताना मुश्किल है कि कहां से गुम हुआ। यानी बोर्ड की ओर से भेजी जाने वाली मार्कशीट विद्यार्थी तक पहुंचेंगी भी या नहीं इसकी किसी की जिम्मेवारी तय नहीं। इतना ही नहीं इन पर लगाई गई टिकट का भी आसानी से दोबारा प्रयोग किया जा सकता है। दोनों विभागों के कर्मचारियों की दलीलों से नाखुश बोर्ड चेयरमैन ने बोर्ड कर्मचारियों को डाक विभाग को सौंपी जाने वाली सभी मार्कशीट का रिकॉर्ड रखने के निर्देश दिए। साथ ही डाक विभाग के कर्मचारियों की लापरवाही के लिए डाक विभाग के अंबाला मुख्यालय के अधिकारियों को पत्र लिखने की बात कही।
उल्लेखनीय है कि करीब 10 दिन पहले हांसी गेट के पास से गुजर रहे जमाई रोड पर एक व्यक्ति को हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की करीब 50 मार्कशीट मिली थी। बोर्ड अधिकारियों का कहना था कि बोर्ड की ओर से मार्कशीट बोर्ड परिसर में ही खुली डाक विभाग की शाखा के सुपुर्द की जाती है और वो ही आगे विद्यार्थियों तक पहुंचाते हैं। सभी मार्कशीट पलवल जिले की थी।
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ये मार्कशीट सड़क पर कैसे पहुंची इसकी शुक्रवार को बोर्ड चेयरमैन डॉ. जगबीर सिंह ने जांच की। पहले बोर्ड कर्मचारियों को बुलाया गया। उनका कहना था कि वे डाक विभाग की शाखा में सौंप देते हैं। मगर इनका ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं रखा जाता कि किसी सीरियल नंबर की मार्कशीट कब डाक विभाग को दी है। डाक विभाग की शाखा इंचार्ज व अन्य कर्मचारियों को बुलाया गया तो उन्होंने कहा कि वे सभी डाक सुरक्षित पहुंचाते हैं। हो सकता है कि बोर्ड कर्मचारियों की लापरवाही हो।
सरकारी पोस्ट टिकट का भी हो सकता है दोबारा प्रयोग
बोर्ड की ओर से डाक विभाग को दी जाने वाली मार्कशीट के पैकेज पर डाक की कोई स्टांप नहीं लगाई जाती जबकि नियमानुसार स्टांप लगानी अनिवार्य है। डाक विभाग की बोर्ड शाखा इंचार्ज ने कहा कि लाखों डाक होती हैं और कर्मचारियों की कमी के चलते स्टांप नहीं लगाई जाती। इतना ही नहीं कुछ मार्कशीट पता पूरा या सही नहीं होने के कारण वापस आ जाती हैं। उन पर भी कोई स्टांप नहीं है। मार्कशीट के पैकेज पर सरकारी पोस्ट टिकट भी लगाई जाती है। स्टांप नहीं लगने के कारण इसी पोस्ट टिकट का दोबारा भी आसानी से प्रयोग किया जा सकता है।
वर्जन::::
हम मार्कशीट के पैकेट डाक विभाग को सौंपते हैं। अब जांच की तो डाक कर्मचारियों की लापरवाही सामने आई है। वे डाक विभाग की कोई स्टांप नहीं लगाते जबकि नियमानुसार सरकारी पोस्ट टिक पर स्टांप लगाई जाती है। इस बारे में डाक विभाग के अंबाला मुख्यालय के अधिकारियों को शिकायत की जाएगी। बोर्ड कर्मचारियों को भी डाक विभाग को दी जाने वाली सभी मार्कशीट का रिकॉर्ड रखने के निर्देश दिए गए हैं।
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-डॉ. जगबीर सिंह, चेयरमैन, हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड
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वर्जन:::
हमारे पास लाखों डाक आती हैं और कर्मचारियों की कमी के कारण स्टांप नहीं लग पाती। हो सकता है कि बोर्ड कर्मचारियों ने ये मार्कशीट देने में लापरवाही की हो। क्योंकि अक्सर बोर्ड कर्मचारी दरवाजे के पास से डाक खिसका देते हैं। हम सभी डाक को सुरक्षित पहुंचाते हैं। ये भी संभावनाएं है कि डाक ले जाते समय उक्त पैकेट रास्ते में गिर गया हो।
-रंजना, इंचार्ज, डाक विभाग बोर्ड शाखा
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