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अब लावारिस सांड़ों निजात दिलाने के लिए पशु पालन विभाग ने संभाली कमान

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दस हजार लावारिस सांड़ों की होगी नसबंदी, सांसद के गांव तालू से शुरुआत
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अमर उजाला ब्यूरो
भिवानी।
जिले में आतंक का पर्याय बने लावारिस सांड़ों की बढ़ती संख्या पर अंकुश लगने का रास्ता साफ हो गया है। सांड़ों से निजात दिलाने के लिए अब पशुपालन विभाग ने इनकी नसबंदी करने का निर्णय लिया है। इसके लिए मंगलवार को पशुपालन विभाग ने सांसद धर्मवीर सिंह के गांव तालू से इस अभियान की शुरुआत की है। पहले चरण में ग्रामीण एरिया से अभियान शुरू किया गया है। इस चरण के पहले दिन गांव तालू की गोशाला में बंद करीब 700 लावारिस सांड़ों में 50 सांड़ों की पशुपालन विभाग की टीम ने नसबंदी की। विभाग दस हजार लावारिस सांड़ों की नसबंदी करेगा।
जिले में करीब 15 हजार लावारिस सांड़ सड़क व गलियों में घूम रहे हैं। अकेले भिवानी शहर में चार हजार सांड सड़कों पर मौत बनकर घूम रहे हैं। गांवों में इससे भी खराब हालात हैं। आए दिन सांड़ किसानों की साल भर की मेहनत से पैदा की गई फसल उजाड़ देते हैं। वहीं लोगों को अपना शिकार बनाने से भी नहीं हटते हैं।
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इन हालात में पशुपालन विभाग ने हिंसक हुए सांड़ों की नसबंदी करने का फैसला लिया है। इसके तहत विभाग ने ग्रामीण एरिया से यह अभियान शुरू किया है। पहले चरण में बड़े गांवों में ऐसे पशुओं की नसबंदी की जाएगी। उसके बाद शहरी क्षेत्र की गोशालाओं में यह अभियान चलेगा। गांव में ब्लॉक स्तर पर टीमें गठित कर गांवों की गोशाला में बंद किए गए इन हिंसक सांडों की नसबंदी की जाएगी, ताकि सांड़ों की संख्या कम हो सके। इसके साथ ही तेजी से बढ़ रही मुहंखुर की बीमारी से बचाने के लिए भी टीकाकरण किया जा रहा है।
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सांसद के गांव तालू की गोशाला से शुरू किया अभियान
सांसद धर्मवीर के गांव तालू व धनाना में सबसे अधिक लावारिस सांड़ों का आतंक बना हुआ है। कुछ माह पूर्व गांव धनाना के ग्रामीणों ने करीब तीन हजार पशु पकड़ कर गांव के जलघर में बंद किए थे। जिसे लेकर विवाद भी हुआ था। अब गांव तालू स्थित गो लोकधाम गोशाला से पशुपालन विभाग ने सोमवार से हिंसक सांड़ों की नसबंदी का काम शुरू किया है। पशु चिकित्सा अधिकारी सुखवीर पंघाल व सहायक अधिकारी मननदीप के नेतृत्व में तालू की गोशाला से यह अभियान शुरू किया गया। वीएलडीए जयसिंह, योगेश, सीताराम, रमेश की टीम ने पशुओं की नसबंदी की। 50 सांड़ों की नसबंदी व 150 पशुओं को बचाने के लिए मुंहखुर के टीके लगाए गए।
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जल्द ही शहर में भी शुरू करवाएंगे अभियान
इसके लिए पशुपालन विभाग को पत्र लिखा जा चुका है। हिंसक पशुओं की नसबंदी होना जरूरी है। जल्द ही भिवानी शहर की गोशाला में यह अभियान चलाएंगे। लावारिस पशुओं को पकड़ कर गोशाला ले जाने का कार्य रात के समय चलाया जा रहा है, ताकि किसी तरह की दुर्घटना से बचा जा सके।
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आरके महता, सचिव नप
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नसबंदी व मुंहखुर टीकाकरण एक साथ ही किया जा रहा है। यह अभियान तेज किया जाएगा। देखने में आया है कि नसबंदी के बाद सांडों की प्रवृति में बदलाव होता है। लावारिस सांड खुले में ही नहीं गोशाला में बंद करने के बाद भी दूसरे पशुओं को मारने से नहीं बचते है, लेकिन नसबंदी के बाद उनके स्वाभाव व प्रवृति में बदलाव होता है।
डॉ. सुखवीर पंघाल, पशु चिकित्सा अधिकारी
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