देश के बेरोजगारों और गरीब मजदूरों को सौ दिन का रोजगार देने का दावा करने वाली महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) श्रमिकों के गले की फांस बन गई है। 25 गांवों के करीब 12 सौ मजदूरों का 20 लाख मेहनताना पिछले तीन साल से फंसा है। विकास एवं पंचायत विभाग की लचर कार्यप्रणाली के कारण श्रमिकों को मेहनताना के लिए सरपंचों के घरों और पंचायत प्रतिनिधि खंड कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
बाढड़ा खंड के बेरोजगार युवाओं व ग्रामीण श्रमिकों को सौ दिन का रोजगार देने के लिए वित्त वर्ष 2011-2012 में लगभग 10 हजार से ज्यादा आवेदकों के जॉब कार्ड जारी कर उनको गांव के कच्चे रास्तों को समतल करने के अलावा जोहड़ों व गंदे जलनिकासी के लिए नालों की खुदाई का काम दिया गया।
गांव गोपालवास, लाडावास, काकड़ौली हठ्ी, आर्यनगर, रहड़ौदा, धनासरी, मांढी केहर, पंचगावां, माईकलां, कारी तोखा आदि लगभग 25 गांवों के इन सभी श्रमिकों से सरकारी नियमानुसार काम तो करवाया गया लेकिन दिहाड़ी के लिए बजट आने का लॉलीपाप थमा दिया गया। हवासिंह, सतबीर सिंह, सोमबीर सिंह, राजेन्द्र सिंह आदि सभी श्रमिकों ने बताया कि विकास एवं पंचायत विभाग ने मनरेगा के तहत काम तो करवाया लेकिन उसके बाद उनकी कोई सुध नहीं ली। वे अपने मेहनताने के लिए बार-बार सरपंच के घर जाते हैं तो वे उनको पैसे देने की बजाए बीडीपीओ कार्यालय से दिहाड़ी लेने की बात कहकर बैरंग लौटा देते हैं।
ये श्रमिक कई बार बीडीपीओ कार्यालय में भी दस्तक दे चुके हैं लेकिन वहां नियुक्त अधिकारी पीछे से बजट न आने का मामला बता कर उनको अगले सप्ताह आने की बात कह कर दोबारा घर भेज देते हैं। बाढड़ा खंड के मौजूदा समय में लगभग 20 लाख की राशि विभाग की फाइलों में दब कर रह गई। समय पर दिहाड़ी न मिलने से दुखी मनरेगा मजदूरों ने जिला प्रशासन से उनकी मेहनत से किए गए काम की एवज में दिहाड़ी दिलवाने की मांग की है।
पंचायत प्रतिनिधि भी हैं परेशान
मनरेगा योजना में लगभग 20 लाख की राशि अटकने से श्रमिक ही नहीं अपितु खंड के सभी पंचायत प्रतिनिधियों में भी गहरा रोष बना हुआ है। सरपंच एसोसिएशन अध्यक्ष बिजेन्द्र बाढड़ा, उपाध्यक्ष रणबीर कादमा, सरपंच नरेश पुनिया गोपालवास, सरंपच संजय श्योराण, सरपंच दिलबाग बेरला, सरंपच संदीप गोदारा, जागेराम मांढी, अमीलाल, अजीत सिंह आदि ने बताया कि उन्होंने अपने-अपने गांवों में मनरेगा योजना से बेरोजगार युवाओं व श्रमिकों से काम तो करवाया लेकिन उनको दो वर्ष बीतने के बाद भी मेहनताना न मिलने से उनके घरों पर पैसे लेने वाले श्रमिकों की भीड़ बनी रहती है। इस बारे में वे कई बार उपायुक्त व डीडीपीओ सहित मनरेगा योजना संभाल रहे अधिकारियों को मांगपत्र दे चुके हैं लेकिन हर बार कोरे आश्वासन मिलने से श्रमिकों के अलावा सरपंचों में भी प्रशासन के प्रति गहरा रोष बना हुआ है।
उच्चाधिकारियों को भेजी गई है रिपोर्ट: कादयान
बाढड़ा के खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी सेामबीर कादयान व एसईपीओ करतार सिंह ने बताया कि यह मामला उनके आने से पूर्व की है इसीलिए सरपंचों की मांग पर उन्होंने उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेज दी है। मनरेगा मजदूरों की दिहाड़ी कई बार बजट न आने से समय पर नहीं दी जाती है इसीलिए इसमें विलंब पैदा हो गया लेकिन विकास एवं पंचायत विभाग ने देरी के बारे में उच्चाधिकारियों को अवगत करवा दिया है और मनरेगा राशि के जल्द आने की संभावना है।