भिवानी। जिले का अपना डाइट (डिस्ट्रिक्ट इंस्टीट्यूट ऑफ एजूकेशन एंड ट्रेनिंग) कार्यालय सी-मैट भवन में होगा। इसकी सभी तैयारी हो गई है और सरकार की अनुमति के बाद सी-मैट भवन में इसे चलाया जाएगा। भवन के जीर्णोद्धार व अन्य गतिविधियों के लिए करीब 40 लाख का बजट मंजूर किया गया है। सोमवार को स्टेट कंसलटेंट ने सी-मैट भवन का निरीक्षण किया।
भिवानी जिले में पहले बिरही कलां गांव में डाइट कार्यालय था। जो अब दादरी जिले में आता है। ऐसे में वहां का पूरा कार्यालय ही दादरी के सुपुर्द कर दिया गया। अब भिवानी जिले में डाइट का कोई कार्यालय नहीं है। ऐसे में यहां से प्रपोजल भेजा गया, जिसमें प्रदेश सरकार ने स्वीकृति की मोहर लगा दी है। अब सी-मैट भवन में भिवानी जिले का डाइट कार्यालय खोला जाएगा। यहां फर्नीचर आदि पर करीब 20 लाख व डाइट कार्यालय की गतिविधियों के लिए 20 लाख रुपये स्वीकृत किए गए है। जल्द ही यहां स्टाफ नियुक्त किया जाएगा। शुरूआत में छह से सात कर्मचारियों का स्टाफ रहेगा। उसके बाद स्टाफ सरकार की ओर से स्वीकृत कर भेजा जाएगा। 15 अक्तूबर से यहां कार्यालय शुरू होने की उम्मीद है। इसके लिए सोमवार को स्टेट कंसलटेंट और सीमैट के इंचार्ज डा. बालकिशन यादव ने निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान टपक रही थी छत
स्टेट कंसलटेंट और सीमैट के इंचार्ज डा. बालकिशन यादव जब भवन का निरीक्षण कर रहे थे तो दो-तीन जगह रूम, हॉल रूम, गैलरी में छत टपक रही थी। साथ ही एक कमरे में छत टपकने के कारण करंट भी आया हुआ था। उन्होंने बताया कि बिल्डिंग की रिनोवेशन की काफी जरूरत है।
चौ. बंसीलाल यूनिवर्सिटी के विभाग भी खाली करेंगे भवन
सी-मैट भवन में फिलहाल सर्व शिक्षा अभियान कार्यालय चल रहा है। यहां डाइट कार्यालय शुरू किए जाने की सूरत में इसे यहां से शिफ्ट किया जाएगा। इसके लिए किसी अन्य सरकारी कार्यालय में जगह देखी जा रही है। इसके अलावा इस भवन के ज्यादा कमरे चौ. बंसीलाल यूनिवर्सिटी को दे रखे है जहां विभिन्न विभागों की कक्षाएं लगती है। डाइट कार्यालय आने के चलते यूनिवर्सिटी अधिकारियों से भी इस बारे में बातचीत की गई। यूनिवर्सिटी अधिकारियों ने दो साल में उनका भवन बनने पर कक्षाएं वहां शिफ्ट करने की बात कही है।
डाइट के तहत होंगी ये गतिविधियां
जेबीटी, डीएलएड कोर्स डिस्ट्रिक्ट इंस्टीट्यूट ऑफ एजूकेशन एंड ट्रेनिंग के तहत ही आते है। इसमें टीचर्स की ट्रेनिंग के अलावा एकेडमिक गतिविधियां होती है। इसके अलावा रिसर्च वर्क भी होता और शिक्षा विभाग में बच्चों के लिए चल रही सरकारी योजनाओं का रिव्यू भी किया जाता है।