अमर उजाला ब्यूरो
भिवानी। अनाज मंडी में गेहूं की सरकारी खरीद होने के बाद 72 घंटो में भुगतान होने के सरकार के वादे फेल होते दिखाई दे रहे हैं। गेहूं बेचने के बाद पहले तो खाद्य आपूर्ति विभाग से आढ़तियों के पास पैसा लेट पहुंच रहा है। दूसरा बैंकों में पैसा न होने के कारण किसानों व आढ़तियों को परेशान होना पड़ रहा है। किसान फसल बेचने के बाद आढ़तियों से पैसे मांगने जाते हैं तो आढ़ती भी कुछ दिन बाद आने के लिए कहते हैं। सरकारी विभाग में लंबे प्रोसेस होने के कारण आढ़तियों को 5 से 7 दिन में राशि का भुगतान हो रहा है।
मंडी में किसानों को हर रोज नई मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। चाहे गेहूं की खरीद का मामला हो जा पैसों के भुगतान का। किसान फसल बेचने के बाद भी फसल की राशि प्राप्त करने में असमर्थ हो रहे हैं। किसान आढ़तियों के पास फसल की राशि लेने के लिए पहुंचते हैं तो आढ़ती बैकों में पैसा न होने के कारण किसानों को खाली वापिस लौटा देते हैं।
गांव आसलवास दुबियां के किसान नरेश, संजय, धर्मपाल, रमेश व कालू ने बताया कि दस दिन पहले गेहूं की फसल बेची थी लेकिन अभी तक पैसा नहीं मिल पाया है। मंडी में आढ़तियों के पास जाते हैं तो वह कुछ पैसे देकर वापस लौटा देते हैं और 5 से 7 दिनों तक आने के लिए कहते हैं। अब गेहूं कटवाकर बेची हैं और खाद, स्प्रे, बीज व फसल कटाई के पैसों का भुगतान करना हैं लेकिन भुगतान नहीं कर पा रहे हैं। और आगे भी बीजाई का समय शुरू हो चुका हैं जिसमें बीजों के लिए पैसों की जरूरत हैं। लेकिन 10 हजार तक काम नहीं चल पा रहा।
आढ़ती एसोसिएशन प्रधान बजरंग ने बताया कि एक तो खाद्य आपूर्ति विभाग से पैसा लेट हो मिल रहा है। दूसरा बैंकों में पैसा नहीं होने उन्हें पांच लाख तक की राशि देकर लोटा दिया जाता है। किसानों के भुगतान की राशि काफी अधिक हैं ऐसे में सभी किसानों को बांटकर राशि दी जा रही हैं। बैंकों मेें पैसों की भारी कमी होने से किसानों को मजबूरन 5 से 7 दिन बाद आने के लिए कहना पड़ रहा है। बैंक में नगद राशि की भारी कमी हैं जिसके कारण कई किसानों को चैक तो कई को अन्य माध्यमों से पैसे दे रहे है।
बैंक में नगदी की कमी से परेशान आढ़ती
बैंकों में नगद राशि की कमी आने के कारण आढ़तियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा हैं। बैंक में आढ़ती करोड़ की राशि लेने जाते हैं तो उन्हें पांच लाख का भुगतान कर वापिस लौटा दिया जाता है।
इस तरह से होती हैं पूरी प्रोसेस
खाद्य आपूर्ति विभाग के द्वारा आढ़तियों के माध्यम से 1735 रुपये प्रति क्विंटल गेहूं खरीदी जा रही हैं। मंडी से खरीदी गई गेहूं का बिल बनाकर खाद्य आपूर्ति विभाग के द्वारा मंडी में बैठाए बीसीपीए को दिया जाता है। इसके बाद बीसीपीए खाद्य आपूर्ति विभाग को बिल जमा होता है। इसके बाद सरकार द्वारा पूर्ण भुगतान राशि बीसीपीए के खाते में ट्रांसफर होता। भुगतान राशि होने के बाद बीसीपीए के द्वारा सभी आढ़तियों के खातों में राशि भेज दी जाती है। इस प्रोसेस में कम से कम भी 5 से 7 दिन का समय लगता है।
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मंडी में बिलिंग होने के बाद जे फार्म जमा करवाया जाता है। इसके बाद इसे आगे विभाग में भेजा जाता है। लंबी प्रोसेस होने के कारण चार से पांच दिन तक पैसों को आढ़तियों तक पहुंचाए जा रहा है। सरकारी छुट्टी होने के बाद कई बार भुगतान लेट होता है। लेकिन हमारी तरफ से भुगतान समय पर हो रहा है।
- मुकेश कुमार, मंडी इंस्पेक्टर, खाद्य आपूर्ति विभाग