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अस्पताल में टोकन सिस्टम ठप, हर रोज धक्का-मुक्की

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जिला अस्पताल में टोकन सिस्टम बंद, हर रोज धक्का-मुक्की
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भिवानी। मरीजों की सुविधा के लिए एक साल पहले ओपीडी में शुरू किया टोकन सिस्टम करीब चार महीने से बंद है। टोकन सिस्टम बंद होने से औषधालय की चारों खिड़कियों पर दिनभर अफरा-तफरी का माहौल रहता है। भारी भीड़ व धक्का-मुक्की के बीच बुजुर्ग और महिला मरीजों को दवा लेने के लिए विवश होना पड़ रहा है।
वीरवार सुबह जिला अस्पताल स्थित औषधालय में निशुल्क दवा के लिए जबरदस्त मारा-मारी रही। चारों खिड़कियों पर इस कदर व्यवस्था अस्त-व्यस्त रही कि फार्मासिस्ट के एक के नाम की आवाज लगाते ही खिड़की पर लोगों का हजूम उमड़ पड़ा। सेल्स टैक्स विभाग से रिटायर गजानंद गुप्ता ने बताया कि दवा लेने वाली खिड़की पर कोई व्यवस्था नहीं है। घंटों इंतजार के बाद खिड़की से नाम बोला जाता है जो अक्सर लोगों को सुनाई नहीं देता। इस वजह से हर नाम की आवाज पर अफरा-तफरी मच जाती है।
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यह समस्या एक अकेले गजानंद गुप्ता की नहीं है, बल्कि औषधालय केंद्र पर दवा लेने के लिए हर रोज पहुंचने वाले 1000 से 1200 मरीजों की परेशानी है। दरअसल, टोकन सिस्टम बंद होने की वजह से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पहले जिस मरीज का दवा के लिए नंबर आता था तो उसके टोकन नंबर का स्क्रीन पर डिस्पले हो जाता था। लोगों को आसानी से दवा मिल जाती थी।
समस्या की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि औषधालय स्टाफ को तीन बजे तक दवा बांटनी होती हैं, लेकिन टोकन सिस्टम पंगु होने के कारण अक्सर चार-पांच बज जाते हैं। बुधवार को शाम साढ़े पांच बजे तक दवा के लिए लोगों ने इंतजार किया। वीरवार को साढ़े चार बजे तक दवा वितरित हुई।
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साल में कई बार आ चुकी है खराबी
टोकन सिस्टम आरंभ होने के दो-तीन महीने बाद तकनीकी खराबियों की गिरफ्त में आ गया। इसके बाद टोकन सिस्टम कभी चालू तो कभी बंद रहा। बताया जाता है कि अब पिछले चार महीने से अधिक समय से यह सिस्टम बंद है। सूत्र बताते हैं कि मशीन से प्रिंट आउट नहीं निकलने की वजह से पूरा सिस्टम बंद कर रखा है।
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माइक की भी है सख्त जरूरत
औषधालय स्टाफ की ओर से माइक की व्यवस्था कराए जाने की मांग की गई है। स्टाफ का कहना है कि बिना माइक आवाज लगाना बड़ा मुश्किल है। अंदर से मरीज के नाम की आवाज अक्सर बाहर के लोगों तक नहीं पहुंच पाती है। इसलिए, अंदर और बाहर दोनों तरफ समस्या रहती है।
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मशीन में कुछ तकनीकी खराबी की वजह से टोकन सिस्टम बंद है। इस मशीन को दुरुस्त कराया जा रहा है। इसके अलावा चार और मशीन खरीदने और दो नई खिड़की शुरू किए जाने की योजना है।
डा. रघुवीर शांडिल्य, पीएमओ, जिला अस्पताल
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