वैश्य कॉलेज ट्रस्ट पर आरोपों की बौछार,
भिवानी। वैश्य कॉलेज में प्रशासक की नियुक्ति की अनुशंसा के बाद अब वैश्य महाविद्यालय ट्रस्ट पर शुक्रवार को आरोपों की झड़ी लगी। कार्यकाल खत्म होने के सालभर बाद भी कॉलेज की गर्वनिंग बॉडी के चुनाव न कराने का मसला उठाने वाले एडवोकेट ओमप्रकाश परमार ने ट्रस्ट पर संगीन आरोप लगाकर सनसनी फैला दी। उधर, ट्रस्ट के महासचिव ने परमार के आरोपों को एक हजार प्रतिशत झूठा बताया है।
शुक्रवार को एडवोकेट परमार ने 1951 में वैश्य महाविद्यालय ट्रस्ट और किरोड़ीमल ट्रस्ट के बीच हुए एग्रीमेंट की फोटो कॉपी से लेकर तमाम कागजात मीडिया के सामने रखे। वैश्य महाविद्यालय ट्रस्ट के पदाधिकारियों पर एक के बाद एक कई संगीन आरोप जड़े।
परमार ने बताया कि जब पूरे हरियाणा में कोई कॉलेज नहीं था, तब इस कॉलेज की स्थापना हुई थी। 1951 में वैश्य कॉलेज ट्रस्ट और किरोड़ीमल चैरिटेबल ट्रस्ट के बीच एग्रीमेंट हुआ था, जिसके तहत सात आदमी किरोड़ीमल ट्रस्ट व चार आदमी वैश्य ट्रस्ट के शामिल होने प्रावधान रखा गया था। बाद में 1975 में राजनीतिक दबाव के चलते इस एग्रीमेंट को शपथ पत्र के माध्यम से बदल दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि 1975 में कोई एग्रीमेंट नहीं हुआ। जो शपथ पत्र लगाया गया है, वह कोलकाता में बना था। आरटीआई के माध्यम से यह जानकारी उन्होंने हासिल की है।
परमार ने कहा कि गर्वनिंग बॉडी का कार्यकाल खत्म होने के बाद पैसों के लेन-देन नहीं होना चाहिए। यह नियम कहता है। लेकिन, वैश्य कॉलेज के पदाधिकारियों ने कार्यकाल खत्म होने के बाद से लेकर 31 मार्च 2017 तक करीब 40 लाख रुपये खाते से निकलवाए। यही नहीं, कॉलेज में टीचिंग व नॉन-टीचिंग स्टाफ में 52 नए लोगों को नियुक्त किया गया। यही नहीं, वेलफेयर फंड से पैसा निकालकर कर्मचारियों को तनख्वाह दी गई।
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पांच प्रतिशत कॉलेज शेयर जमा नहीं
चुनाव के मामले को सीएम विंडो पर ले जाने वाले एडवोकेट परमार ने बताया कि कॉलेज चलाने के लिए सरकार 95 प्रतिशत फंड देती है। पांच प्रतिशत कॉलेज का शेयर होता है, जो उसे हर साल जमा कराना होता है। परमार ने आरोप लगाया कि लगभग 25 साल से कॉलेज ने अपना शेयर जमा नहीं कराया।
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परमार के आरोप एक हजार प्रतिशत झूठे : बुवानीवाला
वैश्य महाविद्यालय ट्रस्ट के महासचिव पवन बुवानीवाला ने परमार के आरोपों को एक हजार प्रतिशत झूठा और आधारहीन बताया है। उन्होंने बताया कि पांच प्रतिशत कॉलेज शेयर हर साल जमा हुआ है। हर साल डबल ऑडिट होता है। इसलिए, इस पर सवाल नहीं उठाया जा सकता है। 40 लाख रुपये निकलवाने के आरोप भी एकदम बेबुनियाद हैं। जो भी भर्ती हुई हैं, उस समय एमडी यूनिवर्सिटी की ओर से भेजे गए नॉमिनी की उपस्थिति में हुई है। उन्होंने परमार के उस आरोप को भी नकारा कि 1975 में एग्रीमेंट नहीं हुआ। बुवानीवाला ने बताया कि एग्रीमेंट हुआ है। इसकी कॉपी उच्चतर शिक्षा विभाग व यूनिवर्सिटी को दी गई हैं। उन्होंने सवाल किया कि इस मसले को बाहरी लोग उठा रहे हैं, जबकि किरोड़ीमल ट्रस्ट की ओर से कोई नहीं बोल रहा है।