भिवानी। जिला मुख्यालय सहित तोशाम, सिवानी और लोहारू न्यायिक परिसरों में शनिवार को इस वर्ष की दूसरी राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। लोक अदालत में कुल 27,173 मामलों में से 11,476 मामलों का निपटारा किया गया तथा 3.87 करोड़ रुपये की राशि पर सहमति बनी।
मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी पवन कुमार ने बताया कि लोक अदालत वैकल्पिक विवाद समाधान की एक प्रभावी प्रणाली है जो बदलते समय के साथ भारत में एक सशक्त व्यवस्था के रूप में स्थापित हुई है। लोक अदालतें न केवल लंबित विवादों और पक्षकारों के बीच उत्पन्न मामलों का समाधान करती हैं बल्कि सामाजिक सद्भाव बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
उन्होंने कहा कि पक्षकार आपसी सहमति और सौहार्दपूर्ण तरीके से मामलों का निपटारा करते हैं जिससे अदालतों में लंबित मामलों का बोझ कम होता है। साथ ही अपील और संशोधन जैसी आगे की कानूनी प्रक्रिया भी समाप्त हो जाती है। लोक अदालत के माध्यम से त्वरित और प्रभावी न्याय उपलब्ध कराया जाता है तथा पक्षकारों को जमा करवाई गई अदालती फीस वापिस मिलने का भी लाभ मिलता है।
सीजेएम पवन कुमार ने बताया कि लोक अदालत में आपराधिक, मोटर वाहन दुर्घटना, पारिवारिक विवाद, चालान, बैंक ऋण, दीवानी, चेक बाउंस और राजस्व मामलों सहित विभिन्न प्रकरण रखे गए। उन्होंने बताया कि लोहारू में 70 में से 43, तोशाम में 72 में से 29 तथा सिवानी में 65 में से 37 मामलों का मौके पर ही निपटारा किया गया।
इस दौरान जिला मुख्यालय पर अतिरिक्त प्रिंसिपल जज फैमिली कोर्ट रूपम, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश आशीष कुमार शर्मा, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी मीता कोहली, सिविल जज जूनियर डिवीजन हरजोत कौर, अंतरप्रीत सिंह, सिवानी में सिविल जज जूनियर डिवीजन सुखबीर, तोशाम में सिविल जज जूनियर डिवीजन रेनू तथा लोहारू में सिविल जज जूनियर डिवीजन अजय पाल सिंह माल्ही की अदालतों में मामलों की सुनवाई की गई। लोक अदालत के दौरान दोनों पक्षों के अधिवक्तागण, पैनल अधिवक्ता और अधिकार मित्र भी मौजूद रहे।