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क्लर्की कर रहे 55 कंडक्टर अब रोडवेज बसों पर देंगे ड्यूटी

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भिवानी। रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल के बादओवर टाइम खत्म कर कर्मचारियों से प्रति सप्ताह 48 घंटे ही काम लेने के आदेश के बाद रोडवेज में बड़े स्तर पर फेरबदल शुरू हो गए। क्लर्क का कार्य व अन्य ड्यूटी देने वाले 55 कंडक्टर की अब बसों पर ड्यूटी लगाई है। चक्का जाम के बाद अब ओवर टाइम खत्म करने के फेर में परिवहन व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। वहीं कर्मचारी नेताओं को भी मूल ड्यूटी पर लौटने के निर्देश दिए गए हैं। आंदोलन में सक्रिय रहे 69 कर्मचारी नेताओं व कर्मचारियों के ट्रांसफर भी किए गए हैं। भिवानी के कर्मचारी नेताओं के तोशाम सब डिपो और तोशाम सब डिपो के कर्मचारी नेताओं के भिवानी ट्रांसफर किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि मुख्यालय के आदेशों के बाद ओवरटाइम खत्म करने के लिए प्लानिंग की जा रही है। कर्मचारियों को एक जगह से दूसरी जगह समायोजित करना कार्यालय की सामान्य प्रक्रिया है।
परिवहन सेवा के निदेशक ने तीन दिन पहले सभी रोडवेज महाप्रबंधक को पत्र जारी कर कर्मचारियों का ओवरटाइम खत्म करने के निर्देश दिए थे। ओवर टाइम दिए जाने की स्थिति में रिकवरी रोडवेज डिपो के जीएम समेत स्थानीय अधिकारियों से करने की बात कही गई थी। जिसके बाद अब भिवानी डिपो प्रबंधन ने भी कर्मचारियों का ओवरटाइम खत्म करने के लिए तैयारी शुरू कर दी है। सबसे पहले क्लर्की व अन्य ड्यूटी कर रहे 55 कंडक्टरों की ड्यूटी मार्ग पर यानी बसों पर लगाई है। ये कर्मचारी कैश ब्रांच, अग्रिम बुकिंग, कार्य शाखा, बुकिंग ब्रांच में लगे थे। फ्लाइंग के कुछ कर्मचारियों को अब क्लर्की व अन्य कार्यों पर लगाया जा रहा है। करीब 69 कर्मचारियों को इधर से उधर समायोजित किया है। इनमें ज्यादातर कर्मचारी नेता और आंदोलन में सक्रिय रहने वाले कर्मचारी शामिल है।
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अब कर्मचारी नेता भी काटेंगे टिकट, चलाएंगे बस
अब तक अधिकतर कर्मचारी नेता कागजों में ही ड्यूटी कर रहे है। अब प्रबंधन ने सभी कर्मचारियों को पत्र जारी कर अपनी मूल ड्यूटी करने के निर्देश दिए है। साथ ही उनकी ट्रांसफर भी कर दिए हैं। यानी अब कर्मचारी नेता भी रोडवेज बसों को चलते और टिकट काटते नजर आएंगे।
व्यवस्था बनाना कड़ी चुनौती
भिवानी से चंडीगढ़ जाने वाली बस को आवागमन में 13 घंटे लगते है। भिवानी से मथुरा जाने वाली बस को 14 घंटे और भिवानी से वाया दिल्ली चिढ़ावा जाने वाली बस को 12 घंटे से ज्यादा समय लगता है। दिल्ली तक ही आवागमन में आठ घंटे लगते है। ऐसे में सप्ताह में 48 घंटे ही कर्मचारियों से काम लेना रोडवेज प्रबंधन के लिए कड़ी चुनौती है। क्योंकि कुछ रूट ऐसे है जहां 12 से 14 घंटे लगते है। इतने कर्मचारी नहीं है कि सभी बसें भी चलाई जा सके और एक दिन काम लेकर अगले दिन छुट्टी दे दी जाए।

कर्मचारियों से सप्ताह में 48 घंटे काम लेने के निदेशालय के निर्देश है। इसके लिए व्यवस्था बनाई जा रही है। सभी चालक-परिचालकों की रोडवेज बसों पर ड्यूटी लगाई है। पूरा प्रयास रहेगा कि बेहतर व्यवस्था बनाई जाए ताकि ओवरटाइम को भी शून्य किया जा सके और यातायात व्यवस्था भी बेहतर तरीके से चल सके। लंबे रूट के लिए प्लान बना रहे है कि कर्मचारियों को अगले दिन छुट्टी दे दी जाए और उनकी जगह दूसरे कर्मचारी जाए। ऐसे ही अन्य रूटों पर व्यवस्था बनाई जाए। ताकि कर्मचारियों से सप्ताह में 48 घंटे ही काम लिया जाए।
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भरत सिंह, यातायात प्रबंधक
भिवानी रोडवेज डिपो

कर्मचारियों की ट्रांसफर किए हैं। सभी कंडक्टर, ड्राइवरों की अन्य कार्यों से हटाकर बसों पर तो ड्यूटी लगा दी मगर कर्मचारियों की कमी को कैसे पूरा किया जाएगा। 200 चालक-परिचालक भिवानी डिपो में और चाहिए।
राज कुमार दलाल, डिपो प्रधान
हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन

ट्रांसफर के बाद करीब 15 कर्मचारियों ने रिपोर्ट करते हुए ड्यूटी ज्वाइन की है। सोमवार को सभी के आने की उम्मीद है। जिसके बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
जयकिशन, ड्यूटी इंस्पेक्टर,
भिवानी डिपो

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