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आग लगाने वालों को माफ किया, लेकिन बचाने वालों की सुध भी लो सरकार

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आग लगाने वालों को माफ किया, लेकिन बचाने वालों की सुध भी ले सरकार
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भिवानी। जाट आरक्षण के दौरान सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों को सरकार राहत दे रही है...कोई बात नहीं। लेकिन, जिन्होंने सरकारी संपत्ति जलाने से रोका, सरकार यदि उनकी भी सुध लेती तो अच्छा होता। यह दर्द उस युवक विरेंद्र के पिता भगवाना राम का है, जिसका बेटा बैंक जलाने से बचाते हुए अपाहिज हो गया। आगजनी पर आमादा भीड़ को रोकने के प्रयास में विरेंद्र ने अपनी एक आंख गंवाई, जबड़े में प्लेट डलवानी पड़ी। विरेंद्र फिलहाल अपाहिज हालत में बिस्तर पर है।
हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के रिटायर्ड कर्मचारी व ढिगावा मंडी के सरंपच भगवाना राम ने कहा कि 20 फरवरी का मंजर वह ताउम्र नहीं भूल पाएगा। इसी दिन उसका 33 वर्षीय पुत्र विरेंद्र कुमार ने ढिगावा मंडी में बैंक को आग के हवाले करने वाली भीड़ से टक्कर लेकर बैंक तथा एटीएम को जलने से बचाया था।
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भगवाना राम ने बताया कि इस हादसे में उसका पुत्र विरेंद्र सदा के लिए अपाहित बनकर रह गया। उसके पुत्र ने इस हादसे में अपनी एक आंख गंवाई। उसके सिर तथा जबड़े में प्लेट डाली गई। इस समय भी हालत यह है कि वह चारपाई से हिल-डुल नहीं सकता, परंतु सरकार ने अभी तक उसकी सुध नहीं ली है। भगवानाराम के अनुसार, जिस समय भीड़ बैंक को जलाने का प्रयास कर रही थी, वे अपने घर थे। मौके पर मौजूद उनके बेटे ने भीड़ को रोकने का प्रयास किया, लेकिन, भीड़ ने विरेंद्र पर हमला कर दिया। यह मुकदमा उनकी शिकायत पर लोहारू थाने में दर्ज है। इस मामले में एक नाबालिग सहित कुछ अज्ञात लोगों के विरुद्ध मामला दर्ज है।
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सरकार माफ करे तो करे, वे खुद लड़ेंगे कानूनी लड़ाई
भगवानाराम का कहना है कि यदि सरकार ने इस मामले को खारिज किया तो इस लड़ाई को वो अपने स्तर पर अदालत में लड़ेंगे।
उन्होंने कहा कि एक ओर तो सरकार जाट आरक्षण के दौरान अपंग हुए लोगों को सरकारी नौकरी सहित हर मदद का दावा कर रही है जबकि इस आंदोलन के दौरान राज्यभर में एकमात्र उसका पुत्र है जो सरकारी संपत्ति को बचाते हुए अपाहिज हुआ है।
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