भिवानी। अब मानसून से पहले जिले के करीब 25 गांवों की करीब साढ़े 11 हजार एकड़ कृषि भूमि को बरसाती जलभराव से स्थायी निजात मिल गई है। इसके लिए सिंचाई विभाग ने करीब 48 करोड़ के बजट से साढ़े 42 किलोमीटर लंबी पाइप लाइन डालकर जिले की चार मुख्य और 19 सब ड्रेनों से सीधा जोड़ दिया है। बारिश के चंद मिनटों बाद ही खेतों का अतिरिक्त बरसाती पानी चैंबर और पाइप लाइन के जरिए सीधा मुख्य ड्रेन तक पहुंचेगा।
इस अतिरिक्त बरसाती पानी से सूखाग्रस्त इलाके की करीब पांच हजार एकड़ बंजर भूमि भी सिंचित हो पाएगी। मानसून से पहले ही चार मुख्य ड्रेनों की सफाई भी सिंचाई विभाग करा रहा है, ताकि खेतों से पाइप लाइन के जरिए आने वाले अतिरिक्त पानी का दबाव भी ड्रेन झेल सकें।
सिंचाई विभाग की भिवानी वाटर डिविजन के तहत आने वाली चार मुख्य ड्रेनों से आसपास के करीब 25 बड़े गांवों की साढ़े 11 हजार एकड़ कृषि भूमि को पाइप लाइन के जरिए जोड़ने का काम 2023 में शुरू किया गया था। सिंचाई विभाग की इस महत्वाकांक्षी योजना पर विभाग ने करीब 48 करोड़ का बजट भी खर्च किया है। भिवानी-घग्गर ड्रेन से गांव बापोड़ा, सूई, रामपुरा, अलखपुरा, किरावड़, दाईमा, रतेरा की करीब 7500 एकड़ कृषि भूमि से बरसाती पानी की निकासी के लिए पाइप लाइन से ड्रेन तक नेटवर्क जोड़ा गया है। इसी तरह मिताथल-घुसकानी लिंक ड्रेन से छह मुख्य बड़े गांव बड़ेसरा, मिताथल, घुसकानी, तिगड़ाना, गुजरानी और प्रेमनगर की करीब साढ़े 2800 एकड़ कृषि भूमि से बरसाती पानी की निकासी का पाइप लाइन डालकर स्थायी बंदोबस्त कर दिया है।
सामाण-धनाना लिंक ड्रेन से भी आसपास के गांव सुखपुरा, जताई, धनाना, मंढाना, जाटूलुहारी की करीब साढ़े 3200 एकड़ कृषि भूमि को बरसाती जलभराव से निजात दिलाने के लिए पाइप लाइन डालकर सीधा जोड़ दिया है। वहीं मुंढाल-तालू लिंक ड्रेन से पांच गांव की कृषि भूमि जुड़ गई है। जिसमें मुंढाल कलां, बांडाहेड़ी, तालू, कुुंगड़, अलखपुरा शामिल है। इन गांवों की 2300 एकड़ कृषि भूमि को बरसाती जलभराव से हमेशा के लिए निजात मिल गई है।