दिनोद। राधास्वामी सत्संग दिनोद के निर्माता ताराचंद महाराज का 100वां अवतरण दिवस मनाया गया। गुरु को उनके अवतरण दिवस पर स्मरण करते हुए कंवर साहेब ने कहा कि हम सौभाग्यशाली हैं कि हमें साक्षात परमात्मा के दर्शन ताराचंद महाराज के रूप में हुए।
उन्होंने कहा कि जैसे बिना दीपक के मकान अंधेरे में रहता है वैसे ही गुरु रूपी दीपक के बिना हमारा अंतर रूपी मकान भी अंधकारमयी रहता है। जीवन को बर्बाद मत करो क्योंकि कोटि जन्म के भटकने के बाद आपको यह जीवन मिला है। इसलिए मातृ-पिता का और गुरु का एहसान कभी मत भूलो।
महाराज ने फरमाया कि संत को कोई क्या दे सकता है, वो तो इस जगत को देने के लिए आते हैं। संत अपने हाथ से काम करके खाते हैं। उन्होंने कहा कि छाया और माया का गुण एक है। दोनों कितनी ही कोशिश करो हाथ में नहीं आती। दूसरों के सुख को देखकर जलन मत करो क्योंकि दूसरे के बारे में बुरा सोचने से पहले आप स्वयं का बुरा कर लेते हो। चोर डाकू ठगों के महल किसी ने नहीं देखे। बेईमानी और चोरी का धन जैसे आता है वैसे ही जाता भी है। थोड़ा कमाओ लेकिन मेहनत का कमाओ। यही संदेश ताराचंद महाराज का था। किसी की मदद कर सको तो तन मन और धन से मदद करो। इस अवसर पर संगत ने 200 यूनिट रक्त का दान भी किया। रक्तदान को महादान बताते हुए महाराज ने कहा कि इस पावन पर्व पर उपकार का फल आपको निश्चित रूप से मिलेगा।