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इंटरनेट सेवाएं बंद होने से आंदोलन आंदोलन में बढ़ी युवाओं की संख्या

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अंबाला सिटी: शंभू बॉर्डर पर नारेबाजी करते किसान। संवाद - फोटो : Ambala
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इंटरनेट सेवाएं बंद होने से शंभू बार्डर पर चल रहे किसान आंदोलन को नई संजीवनी मिल गई है। जब तक इंटरनेट चल रहा था शंभू बार्डर पर आने वाले युवाओं की संख्या बेहद कम थी, लेकिन पिछले दो दिन से पूरे आंदोलन की कमान अब युवा किसानों ने संभाल ली है। अब तक युवा सोशल मीडिया के माध्यम से ही आंदोलन में एक्टिव था लेकिन अब सड़क पर उतर आया है।
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इतना ही नहीं अब शंभू बार्डर से सटे पंजाब और अंबाला के हर गांव से एक व्यक्ति ने इस आंदोलन में शामिल होने का प्रण भी कर लिया है। यही कारण है कि शंभू पर रविवार को आंदोलन पर बैठने वाले किसानों की संख्या शनिवार के मुकाबले भी 200 बढ़ गई। गणतंत्र दिवस से पहले यहां औसतन 500 किसान ही आंदोलन का हिस्सा बन रहे थे। इतना ही नहीं युवाओं के साथ बच्चों ने भी शंभू बार्डर पर पहुंचना शुरू कर दिया है। किसानों ने साफ कर दिया है कि बिना कानून को रद्द करवाए हम वापसी नहीं करेंगे।
उधर, अंबाला में पहुंचे मुख्यमंत्री मनोहर लाल से जब किसान आंदोलन के बारे में सवाल किए गए तो उन्होंने साफ कहा कि सरकार बातचीत के लिए तैयार है और बातचीत के माध्यम से ही हर समस्या का निदान किया जा सकता है। दरअसल इंटरनेट सेवाएं बंद होने से पहले युवा सोशल मीडिया के जरिए एक्टिव थे और वह धरना स्थल पर पहुंचे बिना ही अपनी सेवाएं जैसे-तैसे दे रहे थे, लेकिन इंटरनेट बंद होने के कारण अब वह खुद मौके पर पहुंचकर पल-पल की जानकारी जुटा रहे हैं। इतना ही नहीं रात के समय भी इन युवाओं ने खुद ठीकरी पहरा देना शुरू कर दिया है।
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शंभू बार्डर पर करीब 15 करोड़ 20 लाख का हो चुका नुकसान
शंभू बार्डर पर 37 दिन से चल रहे धरने के चलते टोल बंद होने के कारण सरकार को करीब 15 करोड़ 20 लाख रुपये का नुकसान हो चुका है। औसतन यहां रोजाना 40 लाख रुपये का राजस्व सरकार को मिलता था। दूसरी ओर पिछले तीन चार दिनों से दिल्ली जाने वाले किसानों की थमी ट्रैक्टर ट्रालियों की रफ्तार में एक बार फिर तेजी आ गई है। पंजाब से दिल्ली जाने वाले किसान अब अधिक संख्या में रवाना हो रहे हैं। रविवार को भी 300 से अधिक वाहन गुजरे हुए, जबकि यह सिलसिला आगे भी लगातार जारी है। इस दौरान कई किसानों ने शंभू बार्डर पर रुक कर पहले लंगर ग्रहण किया और शंभू बार्डर पर पिछले 37 दिन से धरना दे रहे किसानों का उत्साह बढ़ाते हुए जमकर नारेबाजी की। वहीं, इंटरनेट सेवा ठप होने पर शंभू बार्डर पर बैठे किसानों व युवाओं ने सरकार को उनकी नाकामी बताया। किसानों का कहना है कि 26 जनवरी पर जो दिल्ली में घटना हुई थी उसकी वीडियो जगह-जगह वायरल हो रही थी, जिसमें सीधे तौर पर पता चल रहा था कि इस सारी घटना के पीछे सरकार का ही हाथ है। उन्होंने कहा कि सरकार चाहे जितना मर्जी जोर लगा ले कृषि कानून रद्द करवाए बिना वापसी नहीं करेंगे।
पुलिस भी रख रही आंदोलन पर निगरानी
दूसरे तरफ पुलिस भी पिछले करीब चार दिनों से आंदोलन पर पैनी नजर गड़ाए हुए है। किसान आंदोलन में किसी भी तरह की अनहोनी और आशंका को टालने के लिए पुलिस ने बार्डर पर कर्मचारियों की तैनाती कर दी है। हालांकि अभी तक शंभू पर स्थिति पूरी तरह से सामान्य होने के चलते पुलिस राहत भरी सांसें ले रही है।
पीएम के प्रस्ताव देने पर बोले किसान, जो संयुक्त मोर्चा का होगा आदेश वही करेंगे
पीएम द्वारा कृषि कानूनों को लेकर दिया गए प्रस्ताव पर किसानों ने कहा कि पीएम से बात करनी है या नहीं यह सारी जिम्मेवारी संयुक्त किसान मोर्चा की है। उनकी ओर से हम शंभू बार्डर पर बैठे किसानों को जो भी आदेश आएगा वह उन्हीं आदेशों के अनुसार चलते हुए अपने आंदोलन को जारी रखेंगे और यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार इन कृषि कानूनों को वापस नहीं ले लेती है।
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