कोरोना संक्रमण से मुक्त हुए लोगों को अभी भी बीमारियों ने जकड़ा हुआ है। ऐसे लोगों के लिए पोस्ट कोविड केयर सेंटर ‘उमंग’ की शुरुआत की गई थी। एक महीने में इस केंद्र में अब तक करीब 90 मरीज पहुंचे हैं। इनमें सबसे ज्यादा संख्या डिप्रेशन के मरीजों की है।
सबसे ज्यादा डिप्रेशन का शिकार युवा हो रहे हैं। 25 से 40 आयु वर्ग के युवा कोरोना के बाद डिप्रेशन से ग्रस्त हुए हैं। वहीं 18 से 24 आयु वर्ग के करीब 5 मरीज इन कोविड पोस्ट केयर सेंटर में ऐसे भी आए जिन्हें अब घर के कमरे की खिड़की खुलने पर भी डर लगता है। यह मरीज अपने परिजनों को खिड़की खुलते ही बंद करने के लिए बोलते हैं। इन्हें इतना डर लगता है कि खिड़की खुलते ही कमरे में कोरोना घर के भीतर आ जाएगा। औसतन पोस्ट कोविड केयर सेंटर में 4-5 केस आते हैं। यदि एक बार दवा लेकर दोबारा आने वाले केस को गिना जाए तो अब तक करीब 110 मरीज यहां से उपचार ले चुके हैं। हालांकि 50 साल से ज्यादा उम्र के मरीजों में डिप्रेशन के केस बेहद कम हैं।
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इस तरह के कोविड इफेक्ट
पोस्ट कोविड के बाद डिप्रेशन के अलावा छाती और सीने में दर्द, चेहरे पर सूजन आना, घबराहट महसूस होना, नींद न आना, अवसाद सूंघने की शक्ति कम होना और जोड़ों के दर्द की शिकायत वाले ज्यादा मरीज आ रहे हैं।
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सहमे हुए हैं मरीज
सबसे ज्यादा केस डिप्रेशन के आए हैं। इसके बाद दूसरे नंबर पर खांसी के मरीज भी काफी आ रहे हैं। इतना ही नहीं कुछ मरीज कमजोरी और छाती में दर्द के भी आ रहे हैं। यहां आने वाले मरीजों को एक बच्चे की तरह ट्रीट करना पड़ रहा है, क्योंकि वह बहुत ज्यादा सहमे हुए हैं।
डॉ. अशोक शर्मा, पूर्व डिप्टी सीएमओ।