अंबाला में बेड़ियां डालकर अवैध हिरासत में रखे युवकों में से एक युवक की मौत के मामले में शुक्रवार को मृतक रामकुमार के साथी विक्रम को अदालत में पेश किया गया।
अदालत में जज के सामने युवक के पैर में बीते चार दिन से बंधी बेड़ी को खोला गया। साथ ही बंद कमरे में जज के सामने युवक ने अपने बयान दर्ज कराए।
युवक ने अपने बयान में बताया कि वे लोग सफेदी का काम करके घर लौट रहे थे। रास्ते में नशे में धुत पुलिसकर्मी मिले। उन्होंने रात में घूमने का कारण पूछा।
युवकों ने पुलिस को बताया कि वह सफेदी का काम करता है। सीजन होने के कारण दोनों सफेदी का काम करके लौट रहे हैं। लेकिन पुलिस वालों ने एक न सुनी और पीटते हुए उसे और रामकुमार को चौकी ले गए। वहां उन्होंने खूब शराब पी और उनकी पिटाई की और उनके पैरों में बेड़ियां डालकर एक खूंटी से बांध दिया। रात को कई बार पानी मांगने पर भी पानी नहीं दिया।
रात को जब उनके परिजन उन्हें छुड़वाने आए तो भी पुलिस ने उन्हें भी भगा दिया और बिना केस दर्ज किए चौकी में बेड़ियां पहनाकर अवैध हिरासत में रखकर बुरी तरह पीटा।
युवक के अनुसार उसके बाद शराब पी रहे पुलिस वालों ने आधी रात को उनसे कहा कि दोनों मिलकर दीवार में लगी खूंटी तोड़ों और भाग जाओ।
ऐसा न करने पर फिर से उन्हें पीटा, जिस पर उन्होंने दीवार में लगी खूंटी की कमजोर कील को निकाल दिया। उसके बाद पुलिस वालों ने डंडा हाथ में लिया और उन्हे चौकी से पीटकर दौड़ाया।
वे रात को वहीं साथ ही में शहर स्टेशन के पास लाइनों पर पहुंचे, जहां नुकीले पत्थर से उन्होंने संगल की कड़ी तोड़ दी, मगर तभी पुलिस वाला भी डंडा लेकर वहां आ गया और उसने जोर से डंडा मारा, जो रामकुमार के लगा और वह गिर गया और तभी वहां गुजर रही गाड़ी का शिकार हो गया।
जिसे देखकर वह घबरा गया और वह तुंरत भागकर वहीं नजदीक खेतों में छिपा रहा और देररात पैरों में बेड़ियां बांधकर अपने घर पहुंचा।