अंबाला छावनी में हेरिटेज वाक के दौरान रिडीमर चर्च की जानकारी हासिल करते आगंतुक। प्रवक्ता
अंबाला। किसी शहर की तरक्की का पैमाना जांचना हो तो ये देखिये कि उस शहर की पुरानी विरासत को हमने किस हाल में रखा है। उक्त विचार डॉ. चांद सिंह ने रविवार को अंबाला हेरिटेज वाक के दौरान कहे। छावनी के ऐतिहासिक भवनों और यूरोपियन कब्रगाह के भ्रमण के इस कार्यक्रम में उन्होंने आगंतुकों और छात्रों को संबोधित किया।
उन्होंने कहा कि हरियाणा-पंजाब के इतिहास, ब्रिटिश शासन के दौरान अंग्रेजों की शासन व्यवस्था और उनकी की ओर से किए निर्माणों के पीछे की नीति को बताया। पुरातन इमारतों के रख-रखाव एवं संरक्षण के महत्व को इस वाक के माध्यम से प्रतिभागियों को समझाया गया। डॉ. आराधना जिंदल ने अंबाला छावनी के बसाने के विषय में जानकारी दी। ब्रिटिश आर्किटेक्ट की विशेषताओं और इमारतों में प्रयुक्त विभिन्न गुणों की चर्चा की गई।
उन्होंने बताया कि किस प्रकार छावनी के निर्माण के समय अलग-अलग बाजारों को विकसित किया गया। यहां सामाजिक जीवन में प्रयोग होने वाली प्रत्येक वस्तु उपलब्ध थीं। पुरातत्व और संग्रहालय विभाग हरियाणा द्वारा आयोजित इस वाक में छावनी के बसने और यहां आरंभिक रूप से आबाद किए गए शहर के विषय में विशेषज्ञों की ओर से कई अनसुनी जानकारियों से लोगों को अवगत करवाया गया।
होली रिडिमर चर्च के बनने और इसकी निर्माण कला की बारीकियों पर चर्चा हुई। इस प्रकार 1840 में बनी यूरोपियन कब्रगाह में ऐतिहासिक महत्व की कई कब्रों को लोगों ने देखा व इनके इतिहास को जाना। 1902 में दक्षिण अफ्रीका में हुए बोर-वार के बंदियों को ब्रिटिश सरकार की ओर से भारत में अंबाला में रखा गया था। उनमें से कई विभिन्न कारणों से मृत्यु को प्राप्त हुए। उनकी सामूहिक कब्रों पर बाद में एक स्मारक का निर्माण किया गया जो आज भी इस स्थान पर मौजूद है।
इस प्रकार गंगाराम होली के निर्माण की बारीकियों को दर्शकों ने समझा। बीडी वीमेन अस्पताल के विशाल सुंदर द्वार एवं भवन को देखकर लोगों ने आश्चर्य व्यक्त की। अंबाला छावनी की सबसे पहली हवेली राजो बिला को भी दर्शकों को देखने का अवसर प्राप्त हुआ। कार्यक्रम की समाप्ति सरकारी पीजी कॉलेज में सूर्य घड़ी को देखने से हुई। इस अवसर पर प्रेम अग्रवाल, डॉ. प्रदीप शर्मा स्नेही, डॉ. कौशिक, रोहित मिश्र आदि मौजूद रहे।