अंबाला। निराकारी जागृति मिशन के चेयरमैन व महामंडलेश्वर एडवोकेट सतगुरु स्वामी ज्ञान नाथ महाराज ने कहा कि यज्ञ भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग है। इससे न केवल आत्मशुद्धि होती है बल्कि वातावरण भी दोषमुक्त होता है। वे कोतरखाना गांव में महात्मा रामप्रसाद व ज्ञान ज्योति माया की रहनुमाई में आयोजित पावन यज्ञ एवं सत्संग में श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे।
स्वामी ने कहा कि यज्ञ ऋषियों की ओर से निर्धारित एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है। इसकी आहुतियों से जानलेवा बैक्टीरिया खत्म होते हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। गुरु-भक्ति पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि जब शिष्य को सोते-जागते हर पल गुरु के अंग-संग होने का आभास हो, तभी वह सच्चा शिष्य कहलाता है। इस अवसर पर स्वामी को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया और ज्ञान दीक्षा के उपरांत विशाल भंडारा आयोजित हुआ।