अंबाला सिटी। परिवार पहचान पत्र के नाम पर सीएससी संचालक जिले में सरेआम लूट का खेल खेल रहे हैं। जिला प्रशासन का दावा है कि सभी सीएससी सेंटरों और अन्य स्थानों पर परिवार पहचान पत्र निशुल्क बनाए जा रहे हैं, लेकिन सीएससी संचालक पीपीपी बनवाने वालों से सरेआम 100 रुपये से लेकर 300 रुपये तक वसूल रहे हैं।
बात यहीं खत्म नहीं होती। भोली-भोली जनता के परिवार पहचान पत्रों में किसी न किसी बात की जानबूझ कर सीएससी संचालक खामियां छोड़ देते हैं, ताकि वह दोबारा से अपडेशन करवाने आए और फिर दोबारा से अपडेशन के नाम पर उसकी जेब काट ली जाए। जी हां, कुछ ऐसा ही खेल-खेला जा रहा है इस समय परिवार पहचान पत्र बनवाने वालों से। सरेआम चल रहे इस लूट के खेल को प्रशासन भी आंखें मूंदकर देख रहा है। अमर उजाला टीम ने लोगों से जब इस बारे में पूछताछ कि तो उन्होंने इनके राज खोल दिए। यह हालात उस समय हैं जब 750 से ज्यादा स्थानों पर परिवार पहचान पत्र जिले में बनाए जा रहे हैं। -संवाद
क्यों है परिवार पहचान पत्र की जरूरत
सभी सरकारी सेवाओं और योजनाओं का लाभ घर पर ही देने, डुप्लीकेसी को समाप्त करने व नागरिकों का डाटाबेस तैयार करने के लिए परिवार पहचान पत्र सरकार ने जरूरी किया है। इस पोर्टल से मुख्यमंत्री परिवार समृद्धि योजना, वृद्धावस्था सम्मान भत्ता योजना, नि:शक्त पेंशन योजना तथा विधवा व निराश्रित महिला पेंशन योजना आदि को जोड़ा गया है। भविष्य में सरकार द्वारा चलाई जा रही जन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ परिवार पहचान पत्र के माध्यम से जनता तक पहुंचाया जायेगा। फैमिली डाटा के आटोमेटिक अपडेशन को सुनिश्चित करने के लिए फैमिली आईडी को बर्थ और डेथ व मैरिज रिकार्ड से जोड़ा जायेगा। वृद्धावस्था, विधवा और दिव्यांग पेंशन के लिए अब परिवार पहचान पत्र का होना अनिवार्य कर दिया गया है।
आखिर क्यों रुपये देने के लिए मजबूर हैं लोग
प्रशासन ने आदेश दिए हैं कि पेंशन लेने के लिए परिवार पहचान पत्र अपडेट करना जरूरी है, वरना उनकी पेंशन रोक दी जाएगी। इसके साथ ही जन्म और मृृत्यु प्रमाण पत्र के लिए भी परिवार पहचान पत्र अनिवार्य है। इसके साथ ही अन्य कार्यों के लिए भी परिवार पहचान पत्र जरूरी है। वहीं, पिछले दिनों कहा जा रहा था कि 31 जनवरी परिवार पहचान पत्र अपडेट करने की आखिरी तारीख है। इसके बाद लोगों का सरकारी योजनाओं का लाभ रुक जाएगा। इसी डर से लोगों ने बिना किसी देरी के सीएससी संचालकों से मनमाने दाम देकर पीपीपी तैयार करवाएं हैं।
केवल एक पर हुई थी कार्रवाई उसे भी माफी देकर छोड़ा
अधिकारी की माने तो उनके पास अभी तक नग्गल सीएससी की एक शिकायत आई है। जहां पर संचालक पीपीपी बनवाने के लिए रुपये मांग रहा था। जिस पर कार्रवाई करते हुए पहले सीएससी को बंद करने के डीएम को निर्देश दे दिए गए, लेकिन बाद में सीएससी संचालक ने लिखित में माफी मांग ली और आगे से रुपये न लेने का आश्वासन दिया तब उसे छोड़ा दिया गया।
सीएससी संचालकों को कितने रुपये मिल रहे
जानकारी के अनुसार सीएससी संचालक को सरकार की ओर से एक कार्ड अपडेट करने के 20 रुपये दिए जा रहे हैं। जिससे कि कोई भी व्यक्ति बिना रुपये कि चिंता किए अपना परिवार पहचान पत्र अपडेट करवा ले और सरकारी योजनाओं का लाभ उठा सके।
यह लोग जिन्होंने रुपये देकर बनवाया पीपीपी
हमने तो यहीं पास से ही बनवाया था। हमसे 100 रुपये मांगे थे तो हमने दे दिये, क्योंकि यह भी बनवाना जरूरी था, क्योंकि कह रहे है कि बिना परिवार पहचान पत्र के कोई भी काम नहीं होगा। इसलिए जितने कंप्यूटर वाले ने रुपये मांगे हमने दे दिए। - सतनाम सिंह।
एक परिवार पहचान पत्र बनवाने के सीएससी वाले ने हमसे 100 रुपये मांगे थे। हमें पता नहीं था कि पीपीपी निशुल्क बन रहा है तो हमने दे दिए। हमारे साथ साथ अन्य लोगों ने भी रुपये देकर ही परिवार पहचान पत्र बनवाए हैं। - हरजिंद्र
परिवार पहचान पत्र के बनवाने के लिये सीएससी वाले ने रुपये मांगे थे तो हमने दे दिये, क्योंकि उसने एक कार्ड बनवाने के 100 रुपये कहा था वहां कई सारे लोग बैठे थे सभी ने ही 100-100 रुपये दिए तो अब कार्ड बनवाना जरूरी था तो हमने भी दे दिए। - महिंद्र।
कह रहे थे कि परिवार पहचान पत्र बनवा लो वरना किसी भी योजना का लाभ नहीं मिलेगा। पहले सरकारी विभाग में गए लेकिन वहां बहुत भीड़ थी। फिर सीएससी सेंटर में 70 रुपये देकर बनवाया है। - मोनू।
मैंने पहले कहीं और पूछा था उसने 300 रुपये मांगे। फिर यहीं पास के सीएससी वाले का पता चला जो 100 रुपये में बना रहा था। फिर मैंने वहां 100 रुपये देकर परिवार पहचान पत्र बनवाया है। - शीला।
सरकार की ओर से सभी परिवारों को निशुल्क पीपीपी बनवाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए उन्हें 20 रुपये प्रति कार्ड दिए जाते हैं, अगर फिर भी कोई सीएससी सेंटर संचालक पैसे लेता है और उसकी कोई लिखित में शिकायत देता है तो उस पर कार्रवाई की जाएगी।
- सुधीर कुमार, प्रोजेक्ट अधिकारी, एडीसी ऑफिस, अंबाला।