अंबाला छावनी के टंगैल गांव की नंदीशाला में भेजे जा रहे बेसहारा गोवंश। नप
अंबाला। बेसहारा गोवंश को सहारा देने का काम आखिरकार नगर परिषद ने शुरु कर ही दिया। दर्जनों लोगों के घायल होने के बाद नगर परिषद नींद से जाग ही गया। अब लोगों को भी बेसहारा पशुओं का डर नहीं सताएगा। नगर परिषद प्रत्येक पशु को पकड़ने पर लगभग 2053 रुपये खर्च करेगा। ठेकेदार ने पशुओं को पकड़ने का कार्य शुरु कर दिया है और लगभग 33 पशुओं को पकड़कर टंगैल नंदीशाला में भेजा गया है। अभी यह कार्य रिहायशी क्षेत्रों में शुरु किया गया है।
नगर परिषद ने लगभग तीन माह पहले बेसहारा पशुओं को पकड़ने की निविदा जारी की थी। लेकिन नंदीशाला में जगह न होने के कारण ठेकेदार काम करने से इंकार कर रहा था। जब नगर परिषद ने स्थानीय नंदीशाला के पदाधिकारियों से बात की तो उन्होंने किसी प्रकार की सहायता करने से इंकार कर दिया क्योंकि पहले ही नंदीशालाओं में पशुओं की भरमार थी और उनके लिए चारे का प्रबंध करना भी काफी परेशानी का सबब बना हुआ था। इसलिए नप ने टंगैल नंदीशाला के पदाधिकारियों से बात की ताकि अंबाला छावनी को बेसहारा पशुओं से मुक्त किया जा सके।
कुत्तों की नसबंदी अटकी
नगर परिषद पहले तो निविदाएं जारी करने में ही काफी समय लगा देता है और इसके लिए नियमों का हवाला दिया जाता है। लेकिन जब निविदाएं सिरे चढ़ जाती हैं तो फिर ठेकेदार निविदा में रुचि नहीं लेते। अगर रुचि ले भी लेते हैं तो अन्य लोग उन्हें परेशान करते हैं। ऐसी ही परेशानी कुत्तों की नसंबदी करने वाले ठेकेदार को झेलनी पड़ रही है। इसलिए उसने कुत्तों की नसंबदी से इंकार कर दिया है। अब फिर नए सिरे से निविदा की प्रक्रिया को शुरु किया जाएगा।