अंबाला सिटी। नशा छुड़ाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कुछ समय पहले नशा मुक्ति केंद्र को सुविधा से लैस करने की घोषणा की थी। 15 अप्रैल तक इस सेंटर के कार्य को पूरा कर देना चाहिए था। मगर हालात ये हैं कि अभी तक सेंटर में न तो बेड की सुविधा है और न ही शौचालय पूरा हुआ।
मौजूदा समय में कपड़े के पर्दे लगाकर बिना दरवाजों के शौचालय का प्रयोग होता दिखाई दे रहा है। इसके साथ ही अतिरिक्त कर्मचारियों की नियुक्ति भी नहीं की जा सकी है। वहीं दूसरी तरफ जिले के ओएसटी केंद्र में नशा करने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। अस्पताल में बने ओएसटी सेंटर में जहां पहले रोजाना 100 मरीज नशा छोड़ने की दवा लेने पहुंच रहे थे तो वहीं अब यह संख्या बढ़कर 150 हो गई है। सुविधाओं के अभाव में मरीजों को निजी केंद्रों की ओर भी रुख करना पड़ रहा है।
नहीं छूट रही लत
ओएसटी सेंटर में ओपियम बेस वाली दवा लेने वालों की संख्या जिलेभर में 600 से अधिक है। यहां पर आने वाले मरीजों को स्टाफ के सामने ही दवा खानी होती है। बीते एक माह में ही इस सेंटर में मरीजों की संख्या बढ़ गई है। सेंटर के सामने चुनौती यह है कि कई मरीज बीच में ही दवा खानी बंद कर देते हैं और नशा करने लग जाते हैं। ऐसे मरीजों को दोबारा से सेंटर पर लाना चुनौती है। वहीं, नए मरीजों को भी सीमित संसाधनों में संभालना मुश्किल दिख रहा है।
अभी तक नहीं लगे बेड, शौचालय भी अधूरा
सरकारी नशा मुक्ति केंद्र में अभी तक शौचालय की व्यवस्था भी सही नहीं है। इसके साथ ही विभाग द्वारा यहां पर पांच मरीजों के बेड की व्यवस्था करनी थी। इसे भी अभी तक पूरा नहीं किया गया है। जबकि इसी माह से यह केंद्र शुरू करना था। केंद्र में प्रर्याप्त संख्या में कर्मचारी व सुरक्षा कर्मी भी नहीं है।
निजी अस्पतालों में महंगा उपचार
जिला अंबाला में 14 नशा मुक्ति केंद्र पंजीकृत हैं। जिनमें नशा करने वाले दवा लेने के साथ- साथ भर्ती भी होते हैं। इन केंद्रों में उपचार महंगा भी है और बार- बार नियमों की भी अवहेलना करते हैं। इसी कारण सभी केंद्रों को नोटिस भी जारी हो चुकी है। अगर सरकारी नशा मुक्ति केंद्र में सुविधाएं दुरूस्त होंगी तो मरीजों को भी परेशानी नहीं होगी।
वर्जन
नशा मुक्ति केंद्र का कार्य अभी बाकी है। जिसे जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही वहां पर व्यवस्थाओं को भी सुधारा जाएगा।
-डॉ. राकेश सहल, सीएमओ, स्वास्थ्य विभाग अंबाला।