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महिला सशक्तीकरण को मिलेगा बल, देश की हर नारी के लिए प्रेरणा

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अंबाला। ओडिशा के आदिवासी समाज से आने वाली द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति का पद संभाला। शहर की महिलाओं ने उनका स्वागत किया। उन्होंने कहा कि कड़ी से कड़ी चुनौतियों का मुकाबला करते हुए महिलाएं इस तरह आगे बढ़ती रहेंगी। उनका कहना था कि पहली बार भारत के सर्वोच्च पद एक आदिवासी महिला आसीन हुई हैं। इसलिए आज का दिन उनके लिए ऐतिहासिक है।
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द्रौपदी मुर्मू का इस पद पर आसीन होना देश की महिलाओं के सशक्तिकरण का उदाहरण है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु जिन विषम परिस्थितियों में संघर्ष करते हुए देश के इस सर्वोच्च पद पर पहुंचीं हैं वह हमारे लोकतंत्र की अपार शक्ति को भी दर्शाता है।
शक्तिरानी शर्मा, मेयर नगर निगम, अंबाला शहर
भारत देश की विभिन्नता ही इस महान राष्ट्र की असली ताकत है। आज हमारे लिए यह सबसे बड़ा गर्व का दिन है कि एक आदिवासी क्षेत्र की शिक्षित महिला इस देश की प्रथम नागरिक बनीं हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सभी महिलाओं के लिए एक प्रेरणास्रोत हैं।
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रजनीश गुप्ता, गणित शिक्षक, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय जलबेड़ा
पहली बार भारत के सर्वोच्च पद पर एक आदिवासी महिला विराजमान हुईं हैं। देश को उनकी कार्यक्षमताओं पर विश्वास है और उम्मीद कि द्रौपदी मुर्मू देश के लिए बेहतरीन राष्ट्रपति साबित होंगी।
राजिंदर कौर, पार्षद आरक्षित वार्ड नंबर 11, अंबाला नगर निगम
इस बात पर खुशी जताई कि भारत के एक अति पिछड़े आदिवासी क्षेत्र की महिला द्रौपदी मुर्मू भारत के सर्वोच्च पद पर पहुंची हैं। उनका शपथ ग्रहण समारोह देश ही नहीं बल्कि दुनियाभर की उन महिलाओं के लिए प्रेरणादायक पल था, जो पुरुष प्रधान समाज में आगे बढ़ने का सपना संजो कर संघर्ष कर रही हैं।
गृहणी शैलजा सचदेवा
द्रौपदी मुर्मू की जीत से महिलाओं एवं खासकर आदिवासी समाज के लिए गर्व की बात है। देश के इतिहास में पहली बार आदिवासी समाज से आने वाली महिला राष्ट्रपति की कुर्सी पर विराजमान हुई हैं। महिला सशक्तिकरण का इससे बड़ा उदाहरण नहीं हो सकता।
पल्लवी आहुजा, अंबाला कैंट
निस्वार्थ भाव से की गई मेहनत हमेशा रंग लाती। द्रौपदी मुर्मू की इस जीत ने समाज की महिलाओं ने जोश व जुनून भर दिया है कि वह अपनी मेहनत के दम पर कोई भी महिला मुकाम हासिल कर सकती है।
नेहा शर्मा, अंबाला कैंट
आज का युग नारी युग है। वह किसी भी क्षेत्र में किसी से कम नहीं है। राष्ट्रपति के लिए एक महिला का चुनना अपने आप में बढ़ी बात है। द्रौपदी मुर्मू की इस उपलब्धि से देश की महिलाओं को प्रेरित होना चाहिए और जीवन में हमेशा आगे बढ़ते रहना चाहिए।
नीलम वासन, अंबाला कैंट
इससे महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलेगा। हर महिला के लिए यह एक प्रेरणा है। आज के युग में नारी किसी से कम नहीं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्र्मू से महिला समाज को काफी उम्मीदें हैं।
सुमनलता, धीन।
एक गांव महिला का राष्ट्रपति बनना बहुत ही गौरव की बात है। हमें उम्मीद है कि महामहिम महिला होने के नाते राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्र्मू कमजोर वर्ग व महिलाओं के हित में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
अंजू शर्मा, एडवोकेट, अलीपुर
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की जीत नारी-शिक्षा, शौर्य, सशक्तिकरण और जनजातीय स्वाभिमान की जीत है। द्रौपदी मुर्मू का राष्ट्रपति भवन में पहुंचना भारत के जीवंत लोकतंत्र का अनुपम उदाहरण है। उनके राष्ट्रपति बनने पर देश की हर नारी को प्रेरणा मिलेगी।
- मोनिका कालड़ा, महिला
भारत में आदि काल से महिलाओं का सम्मान सर्वोच्च रहा है। लेकिन कुछ पुरानी परंपराओं के कारण महिलाओं के कदम कुछ समय के लिए थमे जरूर थे मगर आज के दौर की महिलाएं हर क्षेत्र में यह साबित कर रही है कि नारी किसी से कम नहीं है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से महिलाओं को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी। -दिव्या शर्मा उगाला निवासी
हर नारी को आगे बढ़ना चाहिए। अपने जीवन में दृढ़ संकल्प के साथ कार्य करना चाहिए। ताकि वे भी समाज के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की तरह अलग अलग क्षेत्रों में एक उदाहरण बन सकें। महिलाओं के पास वह शक्ति है, जिसके दम पर वह पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ सकती हैं।
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-कमलप्रीत भाटिया उप प्राचार्य लार्ड पब्लिक स्कूल, उगाला
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