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Ambala News: राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू होने से बढ़ा स्तर, घटे विद्यार्थी

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अंबाला सिटी। उच्चतर शिक्षा विभाग के कॉलेजों में अबकी बार दाखिले कम हुए। अब भी कॉलेजों में 30 अगस्त तक ऑन द स्पॉट दाखिले चल रहे हैं। कई कॉलेज ऐसे हैं, जहां आधी सीट तक रिक्त रह गई हैं। हर वर्ष बीए कोर्स में दाखिले के लिए मारामारी रहती थी, मगर इस बार ज्यादातर कॉलेजों में बीए में भी सीट रिक्त हैं। वहीं, तकनीकी शिक्षा के राजकीय बहुतकनीकी संस्थान, कल्पना चावला राजकीय महिला बहुतकनीकी संस्थान और राजकीय आईटीआई में दाखिले के लिए विद्यार्थियों ने रुझान दिखाया है।
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खास तौर पर शहर के राजकीय बहुतकनीकी संस्थान में इस बार पिछले वर्ष के मुकाबले ज्यादा सीट भर गई। संस्थान में 600 से ज्यादा सीट पर दाखिला हो चुका है। इसका कारण कोर्स के बाद नौकरी के लिए अपार संभावना हैं। इसी तरह राजकीय आईटीआई में कोर्स के बाद विद्यार्थियों की इंडस्ट्री में मांग है। कॉलेजों की बात करें तो कॉलेजों में बीसीए, बीबीए कोर्स की ज्यादा मांग रही। इन कोर्स में दाखिले भी खूब हुए। इस बार विद्यार्थियों का प्रोफेशनल कोर्स की तरफ ज्यादा रुझान दिखा।

स्टाफ की कमी बनी चुनौती
कॉलेजों में विद्यार्थी जहां पहले बीए में चार विषय पढ़ सकते थे, नई शिक्षा नीति में विद्यार्थी आठ विषय पढ़ सकते हैं। कॉलेजों में नई शिक्षा नीति में जहां नए विषय पढ़ने का मौका मिल रहा है, लेकिन उन विषयों के लिए कॉलेजों में स्टाफ की कमी होना भी चुनौती बन गया है। कॉलेजों में नई भर्ती न होने से शिक्षकों की कमी देखी जा रही है। ऐसे में शिक्षकों पर भी वर्कलोड बढ़ा है।
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विदेशों में स्टडी के लिए जा रहे विद्यार्थी
कॉलेजों में सीट रिक्त रहने का कारण विदेशों में विद्यार्थियों का स्टडी के लिए जाने का भी है, क्योंकि विद्यार्थी कॉलेज में दाखिला ले लेते हैं, मगर पढ़ाई के बीच में ही स्टडी वीजा आने पर विद्यार्थी कॉलेज छोड़ देते है और सीट रिक्त हो जाती है। इसके साथ ही विद्यार्थी पढ़ाई के लिए बाहरी दूसरे कॉलेजों की तरफ भी रुख कर रहे हैं।
कोट्स
कॉलेजों में ऑनलाइन और मैन्युअल काउंसलिंग के बाद भी सीट रिक्त हैं। नई शिक्षा नीति से कॉलेजों में पढ़ाई का स्तर बढ़ा है। इस बार कॉलेजों में बीबीए व बीसीए जैसे कोर्स में विद्यार्थियों का ज्यादा रुझान रहा, क्योंकि विद्यार्थी कोर्स को पढ़ाई के बाद नौकरी के विकल्प के तौर पर देखते हैं। 30 अगस्त तक कॉलेजों में दाखिले के लिए पोर्टल खुला है। आवेदक ऑन द स्पॉट दाखिला ले सकते है।
प्रो. निशा बुराक, दाखिला नोडल अधिकारी, राजकीय महिला महाविद्यालय, अंबाला शहर।
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कोट्स
इस बार राजकीय बहुतकनीकी संस्थान में सभी कोर्स की सीट करीबन फुल हो गई हैं। कोर्स करने के बाद औद्योगिक इंडस्ट्री में विद्यार्थियों की मांग बढ़ रही है। नई-नई इंडस्ट्री खुल रही है। बीते माह संस्थान से अंतरराष्ट्रीय कंपनियों में विद्यार्थियों का चयन भी हुआ है। यह भी बड़ा कारण है कि विद्यार्थियों का रुझान बहुतकनीकी के कोर्स की तरफ ज्यादा बढ़ा है। संस्थान में बिहार राज्य से भी विद्यार्थी दाखिले लेने के लिए पहुंचते हैं। इस बार 10वीं परीक्षा परिणाम भी बेहतर रहा। ऐसे में संस्थान में ज्यादा विद्यार्थी दाखिले के लिए पहुंचे।
डॉ. राजीव सपरा, प्राचार्य, राजकीय बहुतकनीकी संस्थान, अंबाला शहर।
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कोट्स
नई शिक्षा नीति 2020 हालांकि अधिक व्यापक और अधिक समायोजित हैं, क्योंकि इसमें मूल्य वृद्धि, कौशल वृद्धि, क्षमता वृद्धि, अंतरविषयक ज्ञान पर अधिक बल दिया गया हैं। इतना ही नहीं बल्कि शिक्षा को समाज, संस्कृति, अर्थव्यवस्था, औद्योगिक जगत, वाणिज्य व व्यवसाय के साथ जोड़ने का व्यापक प्रयास किया गया हैं, परंतु नई शिक्षा नीति को संपूर्ण रूप से लागू करना किसी भी सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है। एक तरफ जहां शिक्षकों को नई शिक्षा नीति के तहत प्रशिक्षित करना है। वहीं, दूसरी तरफ शिक्षा क्षेत्र में ढांचागत सुधारों की भी आवश्यकता है। ढांचागत सुधारों में अध्यापक और प्राध्यापकों की नियुक्ति, स्कूल व कॉलेज में ढांचागत सुधार, पर्याप्त लैबोरेट्री, कंप्यूटर, इंटरनेट, विज्ञान के उपकरण, स्मार्ट क्लास रूम व किताबें इत्यादि पर भारी खर्च की आवश्यकता है।
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प्रो. रविंद्र दुबला, राजनीति शास्त्र विभागाध्यक्ष, राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, अंबाला छावनी।
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