नेशनल खिलाडी शालोक्या फुटबाल मैदान में प्रेक्टिस करते हुए। स्वयं
अंबाला। प्राइवेट नाैकरी में काम करने वाले शशि कुमार कभी फुटबॉल खेलते थे। उनका सपना था कि बेटा भी इस खेल में नाम कमाए। उन्होंने शुरुआती दिनों में बेटे शालोक्या को फुटबॉल खेलने के गुर सिखाए और अब बेटा नेशनल खिलाड़ी बन गया। शालोक्या फुटबाल कोच विशु के सानिध्य में फुटबाल खेल के गुर सीख रहे हैं। वह कई पदक जीत कर राष्ट्रीय स्तर पर नाम चमका रहे हैं।
ऐसे हुई शालोक्या की शुरुआत
अंबाला छावनी निवासी शालोक्या ने बताया कि उसके पिता फुटबाल के खिलाड़ी है, लेकिन किसी कारणवश उन्हें खेलने का मौका नहीं मिला और वह आगे नहीं बढ़ पाए। पिता ने अपने दोनों बेटों शालोक्या और सामित्या को फुटबाल खेलने के लिए प्रेरित किया। सबसे पहले पिता ने दोनों भाइयों को स्टेडियम में लेकर जाकर फुटबाल की प्रेक्टिस करवाई, जिसके कारण शालोक्या ने स्कूल खेलों में पहला स्वर्ण पदक जीता। मौजूदा समय में शालोक्या फुटबाल का नेशनल खिलाड़ी है और जीएमएन कालेज के छात्र हैं। वह 2018 से छावनी के वार हीरोज स्टेडियम में कोच विशु के पास प्रेक्टिस कर रहा है।
यह है उपलब्धि
दो बार नेशनल में भागदारी, जिसमें 2019 में देहरादून में आयोजित केवी नेशनल, 2023 में रांची में आयोजित केवी नेशनल, इसके अलावा केवी रिजनल में चार पदक, जिसमें 2018 में चंडीमंदिर में रजत पदक, 2019 में करनाल में रजत पदक, 2022 अंबाला छावनी में कांस्य पदक और 2023 अंबाला छावनी में रजत पदक जीता और नेशनल के लिए सेलेक्ट हुए। इसके अलावा 2016 में इंटर स्कूल प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक, 2023 में जिला स्तर पर अंबाला छावनी में रनरअप रहे, 2019 में करनाल में आयोजित खेलो हरियाणा में भागीदारी, 2024 में अंबाला छावनी में खेल महाकुंभ में भागीदारी, इसके अलावा गुरुग्राम रीजनल के अंडर हरियाणा और हिमाचल की बेस्ट खिलाड़ियों की नेशनल टीम का कैप्टन रह चुके हैं।
नेशनल खिलाडी शालोक्या फुटबाल मैदान में प्रेक्टिस करते हुए। स्वयं