किसानों की छह माह की खून-पसीने की मेहनत शुक्रवार को प्रशासन की लापरवाही की भेंट चढ़ गई। मंडियों में अव्यवस्थाओं के बीच पड़े गेहूं में देर रात और अल सुबह आई बरसात का पानी भर गया। इस कारण जिलेभर की अनाज मंडियों में करीब 25 हजार मीट्रिक टन गेहूं पानी में भीग गई। हालात यह हो गए थे कि जब मजदूरों ने बोरियों को उठाना चाहा तो पानी भरने के कारण वह उन्हें उठाने में अक्षम रहे। इसीलिए दो-दो मजदूरों ने एक बोरी को पानी के बीच से घसीटकर दूसरी जगह शिफ्ट किया। जो बोरी थोड़ी बहुत उठ रही थी। उसमें से कई लीटर पानी की धार की तरह बह रहा था, जोकि मंडियों में अव्यवस्थाओं की स्थिति बयां करने के लिए पर्याप्त था। अधिकतर बोरियां तो ऐसी भी थीं, जिनपर तिरपाल तक नहीं बिछाई गई थी। इस कारण वह बोरियां नीचे और ऊपर दोनों ही तरफ से पूरी तरह भीग गई। जैसे ही दोपहर के समय धूप निकली तो मजदूर बोरियों को सुखाने के कार्य में जुट गए।
धीमा उठान और क्रेट न होने के कारण भीगा गेहूं
गेहूं के भीगने का सबसे बड़ा कारण गेहूं का धीमा उठान है। क्योंकि गेहूं खरीद होने के बाद भी 35 प्रतिशत गेहूं अभी भी मंडियों में खुले में पड़ा हुआ है। जिसका मंडियों से उठान नहीं हुआ है। हालात तो यहां तक हैं कि इन बोरियों के नीचे लकड़ी के क्रेट भी नहीं लगाए गए। जिससे कि गेहूं को जमीन से थोड़ा ऊपर रखा जा सके। अगर इस गेहूं का सही समय पर उठान हो जाता या फिर क्रेट रख दिया जाता तो गेहूं को भीगने से बचाया जा सकता था।
गेहूं को बचाने के लिए हमारे पास तिरपालों की व्यवस्था है। इसे हमने गेहूं की बोरियों पर बिछा दिया था। इस कारण गेहूं ऊपर की तरफ से तो बच गई है। लेकिन मंडी में पानी निकासी न होने के कारण मंडी में जगह जगह पानी जमा हो गया और बोरियां में भरी गेहूं पूरी तरह भीग गई। अब मजदूरों को भीगी हुई बोरियों को सुखाने के लिए बोला है। - नगेंद्र सिंह, आढ़ती।
अब तो खरीद का कार्य काफी धीमा हो चुका है। लेकिन सरकार अभी तक मंडियों से गेहूं का उठान नहीं करवा सकी है। अगर समय से मंडियों से गेहूं का उठान हो जाता है तो आज गेहूं नहीं भीगती। हमारे पास जो भी ध्यान उपलब्ध थे आधी रात भी वह साधन हमने उपलब्ध करवाएं हैं। जिससे गेहूं को भीगने से बचाया जा सके। लेकिन प्रशासन की लापरवाही के कारण गेहूं को भीगा हुआ देख रहे हैं। - सुखविंद्र सिंह, आढ़ती।
खरीद होने के बाद गेहूं के रख-रखाव की जिम्मेवारी सारी सरकार की होती है। लेकिन किसानों ने इतनी मेहनत कर इस गेहूं को लगाया होता है। इस कारण हमारी ओर से गेहूं के बचाव के लिए जो बन पड़ा हमने किया, लेकिन मंडी में पानी निकासी की व्यवस्था न होने के कारण मंडियों में पानी जमा हो गया और गेहूं नीचे की तरह से पूरी भीग गई। - राजेंद्र सिंह, आढ़ती।
हमने तो बचाव का प्रयास अपनी तरफ से पूरा किया, लेकिन मंडियों का ही हाल ऐसा है कि हम भी क्या करें। विभाग इतनी लापरवाही बरत रहा है तो उसका तो नतीजा दिखना ही था। जो थोड़ी सी बारिश के बाद दिख ही गया। अव्यवस्थाओं के कारण किसानों की 6 माह की मेहनत पानी में भीग गई। - मनोहर लाल, आढ़ती।
हम गेहूं उठान का पूरा प्रयास कर रहे हैं। अभी तक 65 प्रतिशत से अधिक गेहूं का मंडियों से उठान हो चुुका है। जो गेहूं बची है। उसका भी तेजी के साथ उठान किया जाएगा। गेहूं न भीगे इसके लिए आढ़तियों को पर्याप्त साधन भी दिए गए हैं। जहां भी गेहूं भीगी है उसे सुखाकर ही उठाया जाएगा।
- राजेश्वर मोदगिल, डीएफएससी, अंबाला