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पंद्रह दिन बाद नहीं निकला वर्षा का पानी, अफसरों पर भड़के पार्षद

Wed, 07 Oct 2015 12:43 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/अंबाला
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अंबाला में सिर्फ दो घंटे की मूसलाधार बारिश को हुए आज पंद्रह दिन बीत चुके हैं, लेकिन आज भी ट्विनसिटी की करीबन डेढ़ सौ से ज्यादा कालोनियों में बरसाती पानी खड़ा है। इनमें से साठ कालोनियों तो ऐसी है, जहां लोगों के घर बरसाती पानी से घिरे हुए हैं, कच्चे बने रास्तों तक में पानी खड़ा है। जिस वजह से घरों से निकलना दूभर बना हुआ है।इस बरसाती पानी में अब मच्छरों की भी अच्छी खासी फौज भी पनप चुकी है और इन इलाकों से संदिग्ध बुखार से ग्रस्त मरीज भी सामने आने लगे हैं। इसी समस्या को लेकर जहां इलाकावासियों में भारी आक्रोश है, वहीं पानी में पनप रही मच्छरों की फौज और फैले बुखार को लेकर को वे खासे दहशत में भी है। इसी को लेकर अंबाला के सभी बीस वार्ड के पार्षद भी पूरी तरह से गुस्से में हैं। पार्षदों का कहना है कि ऐसे हालातों से उन्होंने पहले ही अफसरों को अवगत करवा दिया था। लेकिन उसके बावजूद अफसरों ने उनकी बातों पर गौर नहीं किया, लिहाजा आज काफी कालोनियों के लोग पंद्रह दिन बाद भी बरसाती पानी की वजह से पैदा हुई समस्याओं को झेल रहे हैं।
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पार्षद बोले, न तो अफसरों, न विधायक मंत्री को लोगों की सुधइस बारे में कई बार हाउस मीटिंग में कह चुकी हूं। लेकिन कोई सुनने को तैयार ही नहीं है। ट्विनसिटी के वार्डों में आज तक जल निकासी की पुख्ता प्लानिंग ही नहीं है। निगम में नई शामिल हुई कालोनियों में तो जलनिकासी के हालात बदत्तर है। लेकिन उसके बावजूद अफसर अपने आंखें मूंदे बैठे हैं।-सोनिया रानी, पार्षद वार्ड नंबर एक

ये प्रशासन और विधायक व मंत्री की नाकामी है, जिस वजह से कालोनियां आज भी बरसाती पानी से डूबी हुई हैं। सिटी विधायक कह रहे हैं पार्षद और मेयर काम नहीं करते देते। तो ऐसा है मेयर और पार्षद साइड में हो जाते हैं, सिटी विधायक बताएं कब तक कालोनियों में से बरसाती पानी निकाल दिया जाएगा?-दर्शन मेहता, पार्षद वार्ड नंबर दो
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मैं बहुत ज्यादा हैरान हूं कि अफसरों को बिल्कुल भी लोगों की टेंशन नहीं है। कालोनियों में बारिश की वजह से इतने बुरे हालात है कि वहां मच्छरों की फौज पनप चुकी है और लोग बुखार से ग्रस्त हो रहे हैं। लेकिन पानी निकालने को लेकर प्रशासनिक अफसर बेफ्रिक है।-बृजलाल सिंगला, पूर्व पार्षद, वार्ड नंबर चार

पंद्रह दिन बाद भी लोग कालोनियों में बरसाती पानी से घिरे नारकीय जीवन जी रहे हैं। लेकिन एक बार भी न तो डीसी, न विधायक और न ही मंत्री ने इन कालोनियों में जाकर हालात देखने की कोशिश की। अब कम से कम लोगों की कालोनियों से ये बरसाती पानी तो निकलवा दो।-रूपम गुगलानी, पार्षद वार्ड नंबर पांच

कालोनियों में खड़े बरसाती पानी को लेकर प्रशासन इस कदर लापरवाह रहेगा, ये नहीं सोचा था। पंद्रह बाद भी पानी नहीं उतरा। कागजों में ही फोगिंग हो रही है, बरसाती पानी की वजह से लोग परेशान ही नहीं, बीमार भी हो रहे हैं। डेंगू और मलेरिया का जबरदस्त खतरा बना हुआ है। मगर विधायक और अफसर दोनों आंखें मूंदे बैठे हैं। हालात यह है कि विधायक पस्त और अफसर मस्त हैं।-पवन अग्रवाल डिंपी, पार्षद, वार्ड नंबर छह

मैने एक हफ्ते पहले नगर निगम में लिखकर दिया था कि उनके वार्ड में जबरदस्त डेंगू और मलेरिया का खतरा पैदा हो चुका है, कालोनियों में काफी पानी खड़ा है। लेकिन मेरी अर्जी पर आज तक तो कोई सुनवाई हुई नहीं, कब होगी ये भी मालूम नहीं। अब यही देख लो, जब अफसर पार्षदों की नहीं सुन रहे तो किसकी सुनेंगे।-दलजीत सिंह भाटिया, पार्षद वार्ड नंबर सात

कालोनियों जल निकासी को लेकर एक पुख्ता प्लानिंग की जरूरत है। पता नहीं प्रशासन कब इस प्लानिंग को तैयार करेगा? मेरा आग्रह है कि एक बार सिटी विधायक और प्रशासनिक अफसर कालोनियों में जाकर खुद दौरा कर लें, लोगों के दर्द की हकीकत खुद पता चल जाएगी।-हिम्मत सिंह, पार्षद वार्ड नंबर नौ

कालोनियों में लोगों के घरों के आगे कच्चे रास्तों तक पानी खड़ा है, जबकि खाली प्लाटों में खड़े पानी की वजह से घर में जबरदस्त सीलन है और बदबू का माहौल है। जहरीले पानी के कीड़ें घरों में घुसते हैं, जबकि सांप तक घरों में मिल चुके हैं। बारिश के पंद्रह दिन बावजूद भी कालोनियों के ये हालात... अफसरों की अब तो नींद टूटनी चाहिए।-हरजीत कौर पार्षद, वार्ड नंबर दस

प्रशासन नाम की कोई चीज अंबाला में नहीं है। सरकार का अफसरों पर कंट्रोल नहीं है। सिटी विधायक और मंत्री बड़ी-बड़ी बातें तो करते हैं, लेकिन जरा बरसाती पानी से लबालब कालोनियों में जाकर लोगों का दर्द तो पूछ लें, वहां जनता खुद ही नेताओं को जवाब दे देगी। सरकार और प्रशासन इस मोर्चे पर बुरी तरह विफल है।-दिलीप बिट्टू, वार्ड नंबर ग्यारह

कहीं बार नगर निगम में कालोनियों में पंप लगाकर पानी निकलवाने के लिए कह चुका हूं। मगर कोई सुनने वाला नहीं है। मच्छरों की वजह से लोगों में बहुत ज्यादा दहशत है। लेकिन अफसर अभी तक बरसाती पानी को निकाले जाने में ज्यादा गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं।-जरनैल सिंह माजरा, पार्षद, वार्ड नंबर बारह

इन हालातों के प्रशासनिक अफसर जिम्मेदार है। मैंने आज गणेश विहार इलाके में खड़े बरसाती पानी निकालने के लिए नगर निगम में कहा था। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। नगर निगम के पास पंप ही नहीं है, है तो खराब है। पानी निकालने का कोई इंतजाम ही नहीं है, कालोनी के लोगों को पूरी तरह राम भरोसे छोड़ा हुआ है। -दुर्गा सिंह अत्रेय, सीनियर डिप्टी मेयर

कई कालोनियों में पानी इकट्ठा है, इस वजह से लोगों में बहुत ज्यादा रोष है। लेकिन लोग इस पानी में पनपने वाले मच्छरों की फौज से ज्यादा दहशत में हैं। उन्हे डेंगू व मलेरिया का जबरदस्त खतरा है। इसलिए मेरी प्रशासन से मांग है कि वे सभी इलाके में फोगिंग करवाएं और कालोनियों में से पानी निकलवाए।-जसबीर सिंह जस्सी, पार्षद वार्ड नंबर चौदह

कालोनियों के हालात देखकर अफसरों की अभी तक नींद नहीं टूटी है। जो प्रशासन कालोनियों में से पंद्रह दिनों में बरसाती पानी नहीं निकाल पाया,  उससे विकास की क्या उम्मीद लगाए जाए? अफसर एसीी कमरों में बैठक्र निचले कर्मचारियों को पानी निकालने का आदेश देते हैं और निचले कर्मचारी निक्कमापन करते हैं, इसलिए लोगों की बरसाती पानी की समस्याएं आज भी मुखर हैं।-स्वर्ण कौर, पार्षद, वार्ड नंबर पंद्रह

पंद्रह दिन बाद भी अभी तक कालोनियों से बरसाती पानी नहीं उतरा। इसे लेकर मैं हैरान हूं। मुझे लगता हैं अफसरों के लिए ये आत्ममंथन की बात है। उन्हे ये समझना चाहिए कि ट्विनसिटी की कालोनियों में उनके लिए जलनिकासी का कोई प्लान ही नहीं है। सबसे पहले प्राथमिकता पर जलनिकासी का पुख्ता प्लान बनाकर चलना पड़ेगा। वरना अभी ताक बाढ़ जैसे हालात थे, लेकिन यदि अंबाला में बाढ़ आई, तो बहुत ज्यादा नुकसान होाग।-चित्रा सरवारा, पार्षद वार्ड नंबर सत्रह

प्रशासनिक अफसरों ने तो शायद पार्षदों की बात न सुनने की कसम खाई हुई है। उनसे कुछ भी कह दो, हमेशा बात को काटना है। पार्षद कभी अपना दर्द लेकर अफसरों के पास नहीं जाता, हमेशा अपने वार्ड के लोगों की समस्या लेकर ही उनतक पहुंचते हैं। अफसरों को भी लोगों का दर्द समझना चाहिए।-सुधीर जयसवाल, डिप्टी मेयर 


ऐसा नहीं हैं कि कारपोरेशन जल निकासी को लेकर गंभीर नहीं है। अफसर पूरी तरह से इस पर काम कर रहे हैं। मैने अभी कुछ दिन पहले ही चार्ज लिया है और सबसे पहले मैने जलनिकासी के साथ-साथ खड़े पानी में एंटी लारवा दवाएं व कच्चा तेल डालने के  साथ-साथ फोगिंग के भी निर्देश दिए हैं। कालोनियों से पानी निकालने का काम चल रहा है, इस काम में और ज्यादा तेजी लाएगी। मैं खुद इस समस्या को मॉनीटर कर रहा हूं। जल्द ही सभी कालोनियों से पानी निकाल दिया जाएगा।-अजय सिंह तोमर, कमिश्नर, म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन, अंबाला

मेयर और सिटी विधायक में ठनीअंबाला सिटी। विधायक असीम गोयल ने निगम क्षेत्र में विकास कार्यों में विलंब होने के लिए विपक्ष को जिम्मेवार ठहराते हुए कहा कि भाजपा को विकास का श्रेय लेने से रोकने के लिए नगर निगम मेयर और पार्षद जानबूझकर विकास में रोड़ा अटका रहे हैं। निगम कमिश्नर के मामले को लेकर राजनैतिक द्वेष के कारण रुकावट पैदा की गई और अब शहर की सड़कों का निर्माण कार्य रोकने के लिए भी सोची-समझी साजिश के तहत रुकावट डालने का प्रयास किया जा रहा है। पूर्व सरकार के कार्यकाल में स्ट्रीट लाइट के नाम पर लाखों रुपये का घोटाला किया गया है और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के कारण विपक्ष के लोग बौखलाहट में अंबाला का विकास रोकने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने लोगों को आश्वासन दिया है कि विकास की गति को किसी भी कीमत पर रुकने नहीं दिया जाएगा।
झूठे दावे छोड़ काम करके दिखाएं विधायक : मेयरअंबाला सिटी। विधायक के बयान पर पलटवार करते हुए मेयर रमेश लाल मल ने सिटी विधायक को झूठे दावे छोड़कर शहरवासियों के लिए काम करने की नसीहत दी है। नगर निगम मेयर रमेश मल ने कहा कि विकास में वास्तविक बाधा तो विधायक की गलत नीतियां रही हैं, लेकिन वह अपनी असफलता का आरोप दूसरों पर मढ़ रहे हैं। मेयर ने कहा कि चार माह पूर्व उन्होंने शहर के विकास हेतु पार्षदों सहित विधायक से मुलाकात की थी ओर उन्हें विकास के मामले को लेकर कई सुझाव भी दिए थे। लेकिन हमारे सुझावों पर कोई गौर नहीं किया गया। मेयर ने कहा की विधायक को न केवल हलके की जनता को गुमराह करने से बचना चाहिए बल्कि अपनी नाकामियों को स्वीकार करके बड़प्पन भी दिखाना चाहिए। लेकिन वह दूसरों पर आरोप मढ़ कर तुच्छ राजनीति कर रहें हैं। उन्होंने स्पष्ट किया की मेयर सहित कोई भी पार्षद नगर के विकास में बाधक नही है और जो बाधा बनने की कोशिश करेगा पार्षद उसका विरोध करने से भी नही हिचकिचाएंगे। उधर, पार्षद के बेटे राजेश मेहता का कहना है कि यदि विधायक को अपने काम गिनवाने का शौक है तो वे खुले मंच आ सकते हैं, वे गिनवा दें कि उन्होंने एक साल में क्या किया है? फिर पार्षद गिनवा देंगे कि पिछले सालों में उन्होंने क्या विकास किया है?
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