फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

प्लॉटों में भरा पानी, खतरे में जिंदगानी

Mon, 08 Aug 2016 12:44 AM IST
अमर उजाला/ब्यूरो/अंबाला
विज्ञापन
प्लॉटों में भरा पानी - फोटो : amar ujala
विज्ञापन
नगर निगम की लापरवाही से लोगों पर बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है। इन बीमारियां का खतरा भी खाली प्लॉटों में भरे गंदे पानी में पैदा होने वाले मच्छरों से है। इससे लोगों में दहशत का माहौल है। लोगों का कहना है कि एक तो अधिकारियों अथवा कर्मचारियों की जवाबदेही कोई नहीं है, दूसरा यदि लोग बीमार हुए तो जिम्मेदार कौन होगा। एक दशक बीत चुका है लेकिन निगम के पास इसका कोई इलाज नहीं है, जबकि जनता हर साल इसी तरह की परेशानियां से जूझ रही है। 
विज्ञापन

यह है समस्या का मुख्य कारण
ट्विन सिटी में लोगों ने प्रॉपर्टी में इनवेस्ट तो किया है, लेकिन खरीदी गई प्रॉपर्टी पर कंस्ट्रक्शन नहीं की गई है। इसके आसपास मकान बन गए हैं, जबकि यह खाली प्लॉट बारिशों में तालाब का रूप ले लेते हैं। महीनों तक पानी सड़ता रहता है और इसी में कीड़े मकौड़े, मच्छर आदि पैदा हो रहे हैं।
इसी तरह ट्विन सिटी के कई इलाके ऐसे हैं, जहां से पानी की निकासी बुरी तरह से प्रभावित है और यहां पर पानी जमा रहता है। प्रशासन की ओर से हर बार ऐसे प्लॉटधारकों पर कार्रवाई की बात तो की जाती है, लेकिन कार्रवाई होती नहीं। निगम भी इन इलाकों की ओर देखने तक नहीं आता, जबकि शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं होती। 
विज्ञापन


यह कहते हैं लोग 
हर साल कागजी दावे किए जाते हैं, लेकिन स्थिति नहीं बदलती। पानी की निकासी नहीं होती और मच्छरों से पैदा होने वाली बीमारियों से जनता जूझ रही है। न तो किसी को जनता की फिक्र है और न ही इसका समाधान कोई करना चाहता है। अब तो लगता है कि बीमारियों से ही जूझते रहें, क्योंकि अधिकारी या प्रशासन तो सुनने वाला है नहीं। 
- प्रदीप शर्मा, पंजाबी बाग अंबाला कैंट

अधिकारी जनता से तो उम्मीद रखते हैं कि वे नियमों का पालन करें, लेकिन जब जनता को राहत देने की बात आती है तो कागजी कार्रवाई की जाती है। अधिकारियों को सब पता है कि कहां पर बरसाती सीजन में दिक्कतें हैं, लेकिन राहत सिर्फ कागजों में ही दिखाई देती है, जमीन पर नहीं। जनता जलजनित बीमारियों से परेशान हैं, लेकिन निगम हाथ पर हाथ धरे बैठा है। 
- संतोष कुमार, अंबाला सिटी
---
खाली प्लॉटों में बरसाती पानी जमा रहता है। न तो इसकी निकासी है और न ही इसके लिए कोई बंदोबस्त होता है। अब जनता से करोड़ों रुपये का टैक्स तो निगम वसूल करती है, लेकिन जब सुविधाएं देने की बात आती है तो आश्वासन देकर टरका दिया जाता है। 
- आनंद मोहन शुक्ला, अंबाला कैंट 
---
कोई ठोस योजना बनाएं तो ही बात बनेगी, सिर्फ दौरे करने या फिर पानी भरने के बाद सड़कों पर उतरने से कुछ नहीं होने वाला। यह सब जनता के लिए राहत नहीं लाएंगे, जबकि बेहतर हो निगम व अधिकारी कुछ ठोस कार्य करें। हर साल पानी से होने वाली बीमारियों से जनता परेशान होती, पानी निकासी का इंतजाम नहीं है तो फिर क्यों नहीं जवाबदेही तय की जाती। स्थिति में सुधार न होने पर अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई हो। 
- हरीश सासन, कांग्रेस नेता अंबाला सिटी 
---
वर्जन
यदि कहीं पर पानी खड़ा है तो इससे मच्छर पनपते हैं, जो बीमारियों का कारण बनते हैं। विभाग अब जागरूकता अभियान चला रहा है, जबकि एंटी लारवा स्प्रे, तेल आदि डालते हैं ताकि लारवा पैदा न हो सके।
- डॉ. विनोद गुप्ता, सीएमओ अंबाला 
---
जहां पर भी वाटर लॉगिंग की समस्या आती है तो उसे निकालने के लिए काम करता है। यदि कहीं पर भी ऐसी समस्या है तो अधिकारियों की जानकारी में लाएं, पानी की निकासी करवाई जाएगी। 
विज्ञापन

- रमेश मल, मेयर, नगर निगम अंबाला 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें