अंबाला। खेल और खिलाड़ियों के लिए हमेशा चर्चा में रहने वाला अंबाला संसाधन की कमी और अधूरे वादों से जूझ रहा है। इसका अंदाजा करीब दो साल से अधर में फंसे तैयार हो रहे छावनी के वार हीरोज मेमोरियल स्टेडियम को देखकर लगाया जा सकता है।
इसमें एथलेक्टिस खिलाड़ियों के बनने वाले सिंथेटिक ट्रैक का निर्माण होना था वो भी महज ट्रैक बनने तक ही सीमित रह गया है। उस पर खिलाड़ियों को सिंथेटिक बिछने का इंतजार है। यही कारण है कि इस ट्रैक के नहीं होने के कारण या तो खिलाड़ियों को सिटी के सेक्टर-10 राजीव गांधी स्टेडियम में मिट्टी के मैदान में दौड़ लगानी पड़ रही है। जबकि स्टेट और नेशनल स्तर की प्रतियोगिताएं सिंथेटिक ट्रैक पर होती हैं। ऐसे में खिलाड़ियों के चुनौती बन जाता है कि मिट्टी के मैदान पर खेलकर सिंथेटिक ट्रैक की टाइमिंग को मात देना। इसलिए खिलाड़ी कई बार संबंधित विभाग में भी इस ट्रैक के पूरा होने के लिए गुहार लगा चुके हैं लेकिन अभी तक यह ठंडे बस्ते में चल रहा है।
कुरुक्षेत्र सिंथेटिक ट्रैक पर जाते हैं खिलाड़ी
हैरानी की बात है कि सिंथेटिक ट्रैक के लिए अंबाला के स्टेट और नेशनल स्तर के खिलाड़ियों को करीब 42 किलोमीटर दूर कुरुक्षेत्र के द्रोणाचार्य स्टेडियम की दौड़ लगानी पड़ती है। जहां पर खिलाड़ी अपनी प्रतियोगिताओं से ठीक पहले प्रैक्टिस कर अपनी टाइमिंग को ठीक करते हैं, जिससे कि वह सिंथेटिक ट्रैक पर उतरकर अपनी जीत का परचम लहरा सके। दरअसल, मिट्टी के मैदान और सिंथेटिक ट्रैक में दौड़ लगाना दोनों अलग-अलग होता है। इस कारण सीधा ट्रैक पर उतरते ही खिलाड़ी दूसरे खिलाड़ियों से पिछड़ जाते हैं। इसलिए वह प्रतियोगिता से पहले कुरुक्षेत्र के स्टेडियम में जाते हैं।
वर्जन
वार हीरोज मेमोरियल स्टेडियम का निर्माण कार्य अभी अधूरा है। इसका निर्माण पीडब्ल्यूडी बीएंडआर की ओर से कराया जा रहा है। खेल विभाग को यह अभी तक हैंडओवर नहीं हुआ है। उम्मीद है कि जल्द ही यह कार्य पूरा हो जाएगा।
राजबीर, जिला खेल अधिकारी, अंबाला
सिटी के सेक्टर-10 राजीव गांधी स्टेडियम में घास के मैदान पर प्रेक्टिस करते हुए एथलेटिक्स खिलाड