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पिता की मेहनत व भाई के त्याग को गोल्ड में बदल रही लिहारसा की पूनम

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राकेश बनवाल
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अंबाला सिटी। पापा तेरी मेहनत का सिला देना अभी बाकी है, धरती मैंने जीत ली अभी आसमान बाकी है...। कुछ ऐसा ही कह रही है कि अंबाला के छोटे से गांव लिहारसा की 18 वर्षीय पूनम। जिसने अपने मेहनत का लोहा मनवाते हुए दो साल में तीन गोल्ड मेडल जीतकर अपने पिता की झोली में डाल दिए हैं। वेट लिफ्टर पूनम, जिन्हाेंने 13 साल की उम्र में स्कूल में पढ़ते हुए कबड्डी और वॉलीबाल में हाथ अजमाया। तीन साल तक स्कूल स्तर पर कबड्डी और वॉलीबाल प्रतियोगिता में संयुक्त रूप से बेहतर प्रदर्शन करते हुए अपनी प्रतिभा दिखाई। 2019 में कॉलेज की पढ़ाई शुरू की तो उन्हें कबड्डी और वॉलीबाल प्रतियोगिता में आत्म संतुष्टि नहीं मिली। इसके बाद पूनम ने 2019 जून से एकल प्रतियोगिता के वेट लिफ्टिंग में हाथ अजमाने का निर्णय लिया और कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। ऐसा करते ही मानो उसकी उम्मीदों को पंख ही लग गए और दो साल में हुई पांच प्रतियोगिताओं में भाग लेते हुए पूनम ने जिला और राज्यस्तरीय प्रतियोगिताओं में पांच मेडल हासिल किए। जिसमें तीन गोल्ड भी शामिल है। अब पूनम ओलंपिक में भाग लेते हुए भारत के लिए गोल्ड हासिल करने का सपना देखते हुए तैयारी करने में दिन रात जुटी हुई हैं।
कॉलेज से आने के बाद ले रही बच्चों की ट्यूशन
पूनम इस समय एमडीएसडी कॉलेज में बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा है। यहां कक्षाएं लगाने के बाद वह घर पहुंच गांव के ही आस पड़ोस के पांचवीं कक्षा के बच्चों को ट्यूशन देती हैं, जिससे कि परिवार पर अतिरिक्त बोझ न पड़े। पूनम बताती है कि मैं पहले ट्यूशन खत्म करने के बाद साइकिल से गांव लिहारसा से 12 किलोमीटर का सफर तय कर सेक्टर 10 स्थित राजीव गांधी स्टेडियम तक आती थी। यहां कोच मधु थापा मुझे बहुत अच्छे से ट्रेनिंग देती हैं और प्रेक्टिस पूरी करने के बाद साइकिल से ही वापस आती थी। इसके बाद में कॉलेज की पढ़ाई पूरी करती थी। परंतु अब मेरे चाचा कश्मीरी लाल ने मेरा सहयोग करते हुए अपनी एक्टिवा दी हुई है ताकि मेरा आने और जाने में मेरा समय ज्यादा खराब न हो।
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पिता करते हैं मजदूरी, बहन आगे बढ़े इसके लिए भाई ने छोड़ी पढ़ाई
पूनम के पिता दलवारा सिंह मजदूरी का काम करते हैं। वहीं बड़े भाई 23 वर्षीय गुरजीत सिंह ने भी बहन को आगे बढ़ाने के लिए खुद भी 10वीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी और कारपेंटर का काम शुरू कर दिया। जिससे कि घर का गुजारा चल सके और बहन का सपना पूरा किया जा सके। मां जसबीर कौर भी गृहिणी होते हुए बेटी के खान पान में पूरी मदद कर रही है। जिससे कि उनकी बेटी आसमान छू सके।
यह जीते पूनम ने पदक
वेट लिफ्टिंग से पहले पूनम ने 2019 में जिला स्तर पर हुई राजीव गांधी स्टेडियम सेक्टर 10 में कबड्डी खेलते हुए संयुक्त रूप से तीसरा स्थान हासिल किया।
- 2019 में ही राज्य स्तरीय कबड्डी प्रतियोगिता में पानीपत में तीसरा स्थान हासिल किया था।
- 2019 में भिवानी में आयोजित राज्य स्तरीय वॉलीबाल प्रतियोगिता में संयुक्त रूप से तीसरा स्थान हासिल किया।
- जनवरी 2020 में राज्यस्तरीय पॉवर वेट लिफ्टिंग में 52 किलो भार वर्ग में 70 वजन उठा कर स्वर्ण पदक हासिल किया।
- दिसंबर 2020 में राजीव गांधी स्टेडियम में आयोजित जिला स्तरीय सीनियर व जूनियर वर्ग में खेलते हुए दो स्वर्ण पदक हासिल किए।
- जनवरी 2021 में पानीपत में हुई राज्य स्तरीय वेट लिफ्टिंग प्रतियोगिता में ब्रॉज मेडल हासिल किया।
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