अंबाला सिटी। जिला अंबाला में धान की उठान बहुत धीमी चल रहा है। इस कारण मंडियों में जगह-जगह धान के ढेर लगे हैं। मजबूरन किसानों को सड़कों पर भी धान सुखाना पड़ रहा है।
जिला अंबाला की मंडियों में अभी 60 प्रतिशत धान का उठान नहीं हुआ है। रोजाना सिर्फ तीन से चार प्रतिशत धान की उठान ही हो पा रही है। जबकि आवक इससे कहीं अधिक है। जिला अंबाला में 39 लाख क्विंटल धान की आवक हुई है। जिला में अभी तक 24 लाख क्विंटल धान की उठान नहीं हुई है।
इससे खरीद का कार्य भी प्रभावित हो रहा है। उठान में देरी के कारण समय पर किसानों को भुगतान नहीं मिल पा रहा है। जिला अंबाला में 337 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। जबकि एजेंसियों को उठान के लिए ही 401 करोड़ रुपये का भुगतान करना है।
जिले की मंडियों की यह स्थिति
अंबाला छावनी से 275060 क्विंटल, अंबाला शहर से 637790 क्विंटल, नन्यौला मंडी से 72590 क्विंटल, साहा मंडी से 389070 क्विंटल, मुलाना मंडी से 375680 क्विंटल, बराड़ा मंडी से 390260 क्विंटल धान खरीदा जा चुका हैं। तलहरहेड़ी मंडी से 122070 क्विंटल, केसरी मंडी से 61450 क्विंटल, उगाला मंडी से 52042 क्विंटल, सरदाहेड़ी मंडी से 58990 क्विंटल, भरेड़ीकलां से 79200 क्विंटल, नारायणगढ़ मंडी से 422510 क्विंटल, शहजादपुर मंडी से 176790 क्विंटल, कड़ासन मंडी से 164000 क्विंटल, बेरखेडी मंडी से 60610 क्विंटल धान की खरीद का कार्य पूरा किया गया हैं। इसके साथ ही जिला अंबाला में धान की 51 प्रतिशत उठान पूरी हो चुकी है।
नहीं देंगे पराली जलाने का जुर्माना : कौथ
रविवार को किसान मजदूर यूनियन हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष सुरेश कौथ अंबाला सिटी की नई अनाज मंडी में पहुंचे और यहां पर फसल बेचने आए किसानों से समस्याएं जानीं। यहां पर किसानों ने उन्हें बताया कि धान की उठान न होने के कारण परेशानी बनी है। इसके साथ ही धान को सुखाने के बाद भी अनावश्यक कट लगाए जा रहे हैं। इससे किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। कौथ ने कहा कि हाल ही में भाजपा की नई सरकार बनी है, लेकिन अभी से सरकार ने किसानों पर पराली संबंधी नए नियम लागू कर दिए है। इससे किसानों को परेशानी बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि जितने भी किसानों के पराली के चालान काटे गए हैं। उनमें से कोई भी किसान पराली जलाने का जुर्माना नहीं भरेगा। सरकार पराली प्रबंधन का दावा तो करती है लेकिन प्रबंधन के लाभ सभी गांवों में नहीं मिल पाए हैं। मशीनें भी गिने- चुने गांवों में ही मिल पाई हैं। इसलिए मजबूरी में किसान पराली जलाने को मजबूर है।
सिटी नई अनाज मंडी में किसानों की समस्या जानने के लिए पहुंचे किसान मजदूर यूनियन हरियाणा के प्रदे