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विज साहब! पुलिस उड़ा रही है आपके आदेशों की सरेआम धज्जियां

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अंबाला। ब्लॉक समिति के पूर्व सदस्य रविंद्र मुनरहेड़ी को इंसाफ नहीं मिल पा रहा है। आबादी देह के एक प्लाट पर जबरन कब्जे को लेकर वह गृहमंत्री अनिल विज से लेकर पुलिस के तमाम बड़े अफसरों को शिकायत दे चुके हैं। आरटीआई में भी पुलिस की ओर से रविंद्र को उसकी शिकायतों पर हुई कार्रवाई की जानकारी उपलब्ध नहीं करवाई जा रही है। पुलिस के रवैये से परेशान परिवादी अब पूरे मामले को अदालत में चुनौती देने की तैयारी कर रहा है। उसका आरोप है कि पुलिस अधिकारी गृहमंत्री अनिल विज के आदेशों की भी धज्जियां उड़ा रहे हैं।
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गांव मुनरहेड़ी के रहने वाले रविंद्र कुमार ने बताया कि गांव में आबादी देह के एक प्लाट को लेकर जूनियर डिविजन के सिविल जज की अदालत 16 दिसंबर 2009 को उनके हक में फैसला सुना चुके हैं। इसके बावजूद गांव के कुछ लोग इस प्लाट पर जबरन कब्जा जमाना चाहते हैं। इसके लिए रविंद्र ने राजेंद्र, सलिंद्र, ओमप्रकाश, सुभाष व दर्शन को जिम्मेदार ठहराया है। परिवादी का आरोप है कि कब्जे की नीयत से इस प्लाट पर जानबूझकर कूड़ा कर्कट डाला जा रहा है। कुछ पेड़ों को भी काटने की कोशिश हो रही है। गांव के कुछ लोग इन्हें शह दे रहे हैं। इसी वजह से उनके परिवार की जान को खतरा है। इनके खिलाफ रविंद्र की ओर से महेशनगर पुलिस को कई बार शिकायत दी जा चुकी है। पर पुलिस ने कभी किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की। रविवार को रविंद्र ने पूरे मामले से गृहमंत्री विज को भी अवगत करवाया। इस मामले को लेकर वे पहले भी उनके जनता दरबार में शिकायत दे चुके हैं। मगर हर बाद पुलिस उनकी शिकायत पर कार्रवाई करने की बजाय उसे डस्टबिन में डाल देती है। रविंद्र ने साफ कहा कि अब उसे पुलिस से इंसाफ की उम्मीद नहीं है। पुलिस गृहमंत्री के आदेशों की अवहेलना कर रही है। उसने कहा कि अगर उस या फिर उसके परिवार पर कोई हमला होता है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी पुलिस की होगी। उन्होंने कहा कि से मामले को लेकर जल्द ही अदालत में चुनौती देंगे।
सूचना में पुलिस ने दिया अजब जवाब
रविंद्र ने पुलिस से आरटीआई के जरिए अपनी शिकायतों पर हुई कार्रवाई की सूचना मांगी थी। मगर पुलिस सूचना में अजब जवाब दे रही है। पांच मार्च को पुलिस की ओर से सूचना की एवज में दिए गए जवाब में रविंद्र को बताया गया कि जिस शिकायत पर वे कार्रवाई की सूचना मांग रह हैं। उस साल का पूरा रिकार्ड तल्क कर दिया गया है। इसलिए अब उस रिकार्ड की सूचना नहीं मिल सकती। रविंद्र का आरोप है कि अफसर जानबूझकर ऐसे जवाब देकर दूसरे पक्ष को बचा रहे हैं।
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